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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

10-06-2026

रक्त की जांच से पहले चल जाएगा लंग कैंसर का पता

  •  वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए ब्लड सिग्नेचर (रक्त संकेतक) की पहचान की है, जो फेफड़ों के कैंसर के खतरे का पता पांच साल से भी अधिक समय पहले लगा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में कैंसर की जल्द पहचान और रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका सेल में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार, यह नई तकनीक उन लोगों को प्रिवेंटिव ड्रग्स के जरिए मदद कर सकती है जिन्हें लंग कैंसर होने का खतरा हो सकता है। वाल्टर एंड एलिजा हॉल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (डब्ल्यूईएचआई) ने इसे लेकर रिपोर्ट जारी की। जिसके मुताबिक, वैज्ञानिकों ने 48,000 से अधिक रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्हें 14 विशेष प्रोटीनों का एक ऐसा समूह मिला, जो अगले पांच वर्षों के भीतर फेफड़ों के कैंसर के जोखिम का संकेत दे सकता है। इस खोज की पुष्टि दुनिया भर के आठ अलग-अलग डेटा सेटों में भी हुई, जिनमें धूम्रपान न करने वाले लोग भी शामिल थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह संकेतक सीधे ट्यूमर से नहीं आता, बल्कि फेफड़ों में कैंसर बनने से पहले होने वाले सूजन संबंधी बदलावों को दर्शाता है। इसका मतलब है कि बीमारी शुरू होने से पहले ही शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं, जिन्हें पहचानकर समय रहते उपचार किया जा सकता है। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि अध्ययन के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर आज भी दुनिया में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। वर्तमान में स्क्रीनिंग कार्यक्रम मुख्य रूप से उन बुजुर्ग लोगों पर केंद्रित हैं, जिनका धूम्रपान का इतिहास रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। अध्ययन की सह-लेखिका और डब्ल्यूईएचआई की वैज्ञानिक क्लेर वीडेन ने कहा कि यह खोज ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया भर में अधिक प्रभावी और समावेशी कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम विकसित करने में मदद कर सकती है। वीडेन ने अपने समय में ये रिसर्च ब्रिटेन के क्रिक इंस्टीट्यूट में किया था। उन्होंने कहा कि ये नतीजे हमें ऐसे भविष्य के करीब ले जाते हैं, जहां कैंसर विकसित होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए कदम उठाए जा सकेंगे। वहीं क्रिक इंस्टीट्यूट में क्लिनिकल रिसर्च डायरेक्टर चार्ली स्वैंटन ने कहा कि यह अध्ययन उस धारणा को मजबूत करता है कि उम्र बढऩे के साथ होने वाली कई बीमारियों के पीछे शरीर में पहले से मौजूद सूजन की एक समान अवस्था हो सकती है। उनका मानना है कि भविष्य में यह ब्लड सिग्नेचर न केवल फेफड़ों के कैंसर बल्कि अन्य फेफड़ों की बीमारियों के जोखिम का भी पूर्वानुमान लगाने में मदद कर सकता है।

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रक्त की जांच से पहले चल जाएगा लंग कैंसर का पता

 वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए ब्लड सिग्नेचर (रक्त संकेतक) की पहचान की है, जो फेफड़ों के कैंसर के खतरे का पता पांच साल से भी अधिक समय पहले लगा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में कैंसर की जल्द पहचान और रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका सेल में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार, यह नई तकनीक उन लोगों को प्रिवेंटिव ड्रग्स के जरिए मदद कर सकती है जिन्हें लंग कैंसर होने का खतरा हो सकता है। वाल्टर एंड एलिजा हॉल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (डब्ल्यूईएचआई) ने इसे लेकर रिपोर्ट जारी की। जिसके मुताबिक, वैज्ञानिकों ने 48,000 से अधिक रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्हें 14 विशेष प्रोटीनों का एक ऐसा समूह मिला, जो अगले पांच वर्षों के भीतर फेफड़ों के कैंसर के जोखिम का संकेत दे सकता है। इस खोज की पुष्टि दुनिया भर के आठ अलग-अलग डेटा सेटों में भी हुई, जिनमें धूम्रपान न करने वाले लोग भी शामिल थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह संकेतक सीधे ट्यूमर से नहीं आता, बल्कि फेफड़ों में कैंसर बनने से पहले होने वाले सूजन संबंधी बदलावों को दर्शाता है। इसका मतलब है कि बीमारी शुरू होने से पहले ही शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं, जिन्हें पहचानकर समय रहते उपचार किया जा सकता है। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि अध्ययन के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर आज भी दुनिया में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। वर्तमान में स्क्रीनिंग कार्यक्रम मुख्य रूप से उन बुजुर्ग लोगों पर केंद्रित हैं, जिनका धूम्रपान का इतिहास रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। अध्ययन की सह-लेखिका और डब्ल्यूईएचआई की वैज्ञानिक क्लेर वीडेन ने कहा कि यह खोज ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया भर में अधिक प्रभावी और समावेशी कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम विकसित करने में मदद कर सकती है। वीडेन ने अपने समय में ये रिसर्च ब्रिटेन के क्रिक इंस्टीट्यूट में किया था। उन्होंने कहा कि ये नतीजे हमें ऐसे भविष्य के करीब ले जाते हैं, जहां कैंसर विकसित होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए कदम उठाए जा सकेंगे। वहीं क्रिक इंस्टीट्यूट में क्लिनिकल रिसर्च डायरेक्टर चार्ली स्वैंटन ने कहा कि यह अध्ययन उस धारणा को मजबूत करता है कि उम्र बढऩे के साथ होने वाली कई बीमारियों के पीछे शरीर में पहले से मौजूद सूजन की एक समान अवस्था हो सकती है। उनका मानना है कि भविष्य में यह ब्लड सिग्नेचर न केवल फेफड़ों के कैंसर बल्कि अन्य फेफड़ों की बीमारियों के जोखिम का भी पूर्वानुमान लगाने में मदद कर सकता है।


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