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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-06-2026

क्या आप जानते हैं?

  •  आजकल फिट रहने और वजन कम करने को लेकर लोग जिम में घंटों पसीना बहाते हैं, लेकिन जब कुछ दिनों बाद वे वजन मापते हैं, तो वही पुराना वजन दिखाई देता है। ऐसे में निराशा छाने लगती है। लेकिन यहां सवाल यह है कि जब इतनी मेहनत की जा रही है, तो फिर वजन कम क्यों नहीं हो रहा? दरअसल, विज्ञान की नजर से देखें तो वजन कम होना केवल जिम में पसीना बहाने से तय नहीं होता। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शरीर की कई आदतें और कई तरह के कारक एक साथ काम करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारा वजन इस बात पर निर्भर करता है कि हम पूरे दिन में कितनी कैलोरी लेते हैं और कितनी कैलोरी खर्च करते हैं। अगर शरीर में आने वाली ऊर्जा और खर्च होने वाली ऊर्जा के बीच संतुलन नहीं बनता, तो वजन कम होने की गति धीमी पड़ सकती है। कई लोग यह मान लेते हैं कि एक घंटा जिम करने से ज्यादा कैलोरी बर्न हो जाती है, लेकिन असल में ऐसा हमेशा नहीं होता। शरीर एक्सरसाइज के दौरान खर्च हुई ऊर्जा की भरपाई दूसरे तरीकों से करने लगता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्कआउट बहुत जरूरी है, लेकिन उसका सही तरीका और संतुलन समझना भी उतना ही जरूरी है। उदाहरण के लिए, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानी वजन उठाने वाली एक्सरसाइज मसल्स बनाने में मदद करती है। जब शरीर में मांसपेशियां बढ़ती हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। शरीर आराम करते समय भी ज्यादा कैलोरी खर्च करता है। इसलिए सिर्फ कार्डियो एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी फिटनेस रूटीन में शामिल करना जरूरी माना जाता है। वजन घटाने की प्रक्रिया में खानपान की भूमिका अहम होती है। कई बार लोग सोचते हैं कि अगर वे हेल्दी खाना खा रहे हैं तो उनका वजन अपने आप कम हो जाएगा, लेकिन यहां एक छोटी सी गलती हो जाती है। हेल्दी फूड भी अगर ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो उसमें मौजूद कैलोरी वजन कम होने की गति को धीमा कर सकती है। उदाहरण के तौर पर, नट्स, घी, एवोकाडो, स्मूदी और सूखे मेवे जैसे कई खाद्य पदार्थ सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन इनमें कैलोरी भी काफी ज्यादा होती है। अगर इनका सेवन जरूरत से ज्यादा किया जाए तो शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा जमा हो सकती है। इसके अलावा, बार-बार स्नैकिंग करने की आदत भी वजन घटाने में रुकावट बन सकती है। कई लोग दिनभर थोड़ा-थोड़ा खाते रहते हैं और उन्हें अहसास भी नहीं होता कि वे कितनी कैलोरी ले चुके हैं। मीठे पेय पदार्थ, शुगर वाली कॉफी या कोल्ड ड्रिंक भी शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जोड़ देते हैं। इसी तरह, प्रोटीन की कमी भी एक बड़ी समस्या हो सकती है। जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो मांसपेशियां मजबूत नहीं बन पातीं और मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर भोजन में प्रोटीन का कोई न कोई स्रोत जरूर होना चाहिए, जैसे अंडे, दालें, पनीर, टोफू या मछली।

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क्या आप जानते हैं?

 आजकल फिट रहने और वजन कम करने को लेकर लोग जिम में घंटों पसीना बहाते हैं, लेकिन जब कुछ दिनों बाद वे वजन मापते हैं, तो वही पुराना वजन दिखाई देता है। ऐसे में निराशा छाने लगती है। लेकिन यहां सवाल यह है कि जब इतनी मेहनत की जा रही है, तो फिर वजन कम क्यों नहीं हो रहा? दरअसल, विज्ञान की नजर से देखें तो वजन कम होना केवल जिम में पसीना बहाने से तय नहीं होता। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शरीर की कई आदतें और कई तरह के कारक एक साथ काम करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारा वजन इस बात पर निर्भर करता है कि हम पूरे दिन में कितनी कैलोरी लेते हैं और कितनी कैलोरी खर्च करते हैं। अगर शरीर में आने वाली ऊर्जा और खर्च होने वाली ऊर्जा के बीच संतुलन नहीं बनता, तो वजन कम होने की गति धीमी पड़ सकती है। कई लोग यह मान लेते हैं कि एक घंटा जिम करने से ज्यादा कैलोरी बर्न हो जाती है, लेकिन असल में ऐसा हमेशा नहीं होता। शरीर एक्सरसाइज के दौरान खर्च हुई ऊर्जा की भरपाई दूसरे तरीकों से करने लगता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्कआउट बहुत जरूरी है, लेकिन उसका सही तरीका और संतुलन समझना भी उतना ही जरूरी है। उदाहरण के लिए, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानी वजन उठाने वाली एक्सरसाइज मसल्स बनाने में मदद करती है। जब शरीर में मांसपेशियां बढ़ती हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। शरीर आराम करते समय भी ज्यादा कैलोरी खर्च करता है। इसलिए सिर्फ कार्डियो एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी फिटनेस रूटीन में शामिल करना जरूरी माना जाता है। वजन घटाने की प्रक्रिया में खानपान की भूमिका अहम होती है। कई बार लोग सोचते हैं कि अगर वे हेल्दी खाना खा रहे हैं तो उनका वजन अपने आप कम हो जाएगा, लेकिन यहां एक छोटी सी गलती हो जाती है। हेल्दी फूड भी अगर ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो उसमें मौजूद कैलोरी वजन कम होने की गति को धीमा कर सकती है। उदाहरण के तौर पर, नट्स, घी, एवोकाडो, स्मूदी और सूखे मेवे जैसे कई खाद्य पदार्थ सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन इनमें कैलोरी भी काफी ज्यादा होती है। अगर इनका सेवन जरूरत से ज्यादा किया जाए तो शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा जमा हो सकती है। इसके अलावा, बार-बार स्नैकिंग करने की आदत भी वजन घटाने में रुकावट बन सकती है। कई लोग दिनभर थोड़ा-थोड़ा खाते रहते हैं और उन्हें अहसास भी नहीं होता कि वे कितनी कैलोरी ले चुके हैं। मीठे पेय पदार्थ, शुगर वाली कॉफी या कोल्ड ड्रिंक भी शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जोड़ देते हैं। इसी तरह, प्रोटीन की कमी भी एक बड़ी समस्या हो सकती है। जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो मांसपेशियां मजबूत नहीं बन पातीं और मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर भोजन में प्रोटीन का कोई न कोई स्रोत जरूर होना चाहिए, जैसे अंडे, दालें, पनीर, टोफू या मछली।


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