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22-09-2026

चीन पर निर्भरता घटाने के लिए 5-7 हजार करोड़ रुपये की योजना लाए सरकार : एसीएफआई

  •  उद्योग निकाय एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट में कहा कि सरकार को कृषि रसायन तकनीकी और मध्यवर्ती उत्पादों में देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने तथा चीन के लागत लाभ का मुकाबला करने के लिए 5,000 से 7,000 करोड़ रुपये की सहायता योजना लानी चाहिए।  परामर्श फर्म केपीएमजी के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट में 7 से 8 वर्ष के कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया है। इसमें संयंत्र स्थापित करने के लिए 2 से 3 वर्ष और उसके बाद उत्पादन सहायता शामिल है। रिपोर्ट में वृद्धिशील बिक्री पर 5 से 8' प्रोत्साहन व औद्योगिक बिजली व साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों पर 30 से 40' सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार यह कदम सीधे तौर पर चीन की कम परिचालन लागत का मुकाबला करेगा। रिपोर्ट में कहा गया कि इस नीतिगत ढांचे में नई और मौजूदा विस्तार परियोजनाओं, दोनों के लिए बड़ी कंपनियों तथा छोटी इकाइयों को शामिल करते हुए निवेश की क्रमिक सीमा तय की जानी चाहिए। इसके अलावा विशेष अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए पूंजीगत अनुदान देने की भी मांग की गई है। रिपोर्ट में जोर दिया गया कि किसी भी नीति का उद्देश्य स्थायी संरक्षण या सब्सिडी पर निर्भरता पैदा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन संरचनात्मक कमियों को दूर करना होना चाहिए जो प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाती हैं।

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चीन पर निर्भरता घटाने के लिए 5-7 हजार करोड़ रुपये की योजना लाए सरकार : एसीएफआई

 उद्योग निकाय एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट में कहा कि सरकार को कृषि रसायन तकनीकी और मध्यवर्ती उत्पादों में देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने तथा चीन के लागत लाभ का मुकाबला करने के लिए 5,000 से 7,000 करोड़ रुपये की सहायता योजना लानी चाहिए।  परामर्श फर्म केपीएमजी के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट में 7 से 8 वर्ष के कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया है। इसमें संयंत्र स्थापित करने के लिए 2 से 3 वर्ष और उसके बाद उत्पादन सहायता शामिल है। रिपोर्ट में वृद्धिशील बिक्री पर 5 से 8' प्रोत्साहन व औद्योगिक बिजली व साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों पर 30 से 40' सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार यह कदम सीधे तौर पर चीन की कम परिचालन लागत का मुकाबला करेगा। रिपोर्ट में कहा गया कि इस नीतिगत ढांचे में नई और मौजूदा विस्तार परियोजनाओं, दोनों के लिए बड़ी कंपनियों तथा छोटी इकाइयों को शामिल करते हुए निवेश की क्रमिक सीमा तय की जानी चाहिए। इसके अलावा विशेष अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए पूंजीगत अनुदान देने की भी मांग की गई है। रिपोर्ट में जोर दिया गया कि किसी भी नीति का उद्देश्य स्थायी संरक्षण या सब्सिडी पर निर्भरता पैदा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन संरचनात्मक कमियों को दूर करना होना चाहिए जो प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाती हैं।


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