इंडियन स्टॉक मार्केट में पिछले दो वर्षों के दौरान आईपीओ का जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। रिकॉर्ड फंड जुटाने वाले कई बड़े इश्यू बाजार में आए और निवेशकों ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल अनसर्टेनिटी के बीच मेनबोर्ड आईपीओ मार्केट की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि एसएमई (लघु एवं मध्यम उद्यम) आईपीओ मार्केट में गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। मई 2026 में कोई बड़ा मेनबोर्ड आईपीओ नहीं आया, जो मार्च 2025 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब वित्त वर्ष 2025-26 में इंडियन कंपनियों ने मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.62 लाख करोड़ रुपये था। यदि पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2025 में 10 आईपीओ के जरिए 45,188 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इसके बाद नवंबर और दिसंबर में भी अच्छी गतिविधि रही, लेकिन 2026 की शुरुआत से ही मार्केट में सुस्ती दिखने लगी। जनवरी में केवल तीन आईपीओ आए, फरवरी में सात और मार्च में आठ इश्यू बाजार में उतरे। अप्रैल में यह संख्या घटकर दो रह गई और मई में कोई भी बड़ा मेनबोर्ड आईपीओ लॉन्च नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उससे पैदा हुई ग्लोबल मार्केट करेक्शन है। निवेशक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं और कंपनियां भी बेहतर माहौल का इंतजार कर रही हैं। कई कंपनियों ने सेबी की मंजूरी मिलने के बावजूद अपने आईपीओ को फिलहाल टाल दिया है। दूसरी ओर एसएमई आईपीओ मार्केट ने मजबूती दिखाई है। जनवरी 2026 में 19 एसएमई आईपीओ के जरिए 865 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, जबकि मई में 17 एसएमई कंपनियों ने 733 करोड़ रुपये जुटाने में सफलता हासिल की। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में एसएमई आईपीओ के माध्यम से 10,955 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक है। विश्लेषकों का कहना है कि छोटे आकार के इश्यू निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। 10 करोड़ से 100 करोड़ रुपये के बीच के आईपीओ अपेक्षाकृत आसानी से निवेश हासिल कर पा रहे हैं, क्योंकि इनमें पूंजी की जरूरत कम होती है और उच्च विकास की संभावनाएं दिखाई देती हैं। हालांकि, इसे व्यापक निवेशक विश्वास का संकेत नहीं माना जा सकता। एसएमई मार्केट में चुनिंदा और अधिक जोखिम लेने वाले निवेशक सक्रिय हैं। आईपीओ मार्केट के सामने एक और चुनौती कमजोर लिस्टिंग प्रदर्शन है। वर्ष 2026 में सूचीबद्ध हुए लगभग दो-तिहाई आईपीओ अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं। औसत लिस्टिंग गेन घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गया है, जबकि वर्ष 2024 में यह 49 प्रतिशत था। इससे रिटेल और हाई नेटवर्थ निवेशकों (एचएनआई) का उत्साह प्रभावित हुआ है। फिर भी आईपीओ की पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है। सेबी से मंजूरी प्राप्त 2.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आईपीओ लॉन्च के इंतजार में हैं, जबकि करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव अभी मंजूरी प्रक्रिया में हैं पर मार्केट एक्सपटर््स का मानना है कि इन इश्यू के मार्केट में आने का समय निवेशकों के विश्वास और ग्लोबल सिचुएशन पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर इंडियन आईपीओ मार्केट समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब वह अधिक परिपक्वऔर चयनात्मक दौर में प्रवेश कर चुका है। निवेशक अब केवल नाम और प्रचार के आधार पर निवेश नहीं कर रहे, बल्कि कंपनी की गुणवत्ता, मूल्यांकन और फ्यूचर की संभावनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में केवल मजबूत और उचित मूल्यांकन वाले आईपीओ ही निवेशकों का भरोसा जीत पाएंगे।
