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22-04-2026

श्री सीमेंट की कुल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी हो जाएगी सालाना 80 मिलियन टन

  •  अमरीका-ईरान वॉर की वजह से दुनिया भर में क्रूड ऑयल व गैस का संकट खड़ा हो गया है। इसका असर इंडिया में भी प्रत्येक इंडस्ट्रीज पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया क्राइसिस के कारण इंडस्ट्री की एनर्जी और इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है, जिसके कारण इंडस्ट्रीज पर ओवरऑल प्रेशर बढ़ रहा है जबकि इस दौरान सीमेंट सेक्टर एक्सपेंशन के दौर में एंटर कर रहा है। देश की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से विकसित होती सीमेंट कंपनियों में से एक श्री सीमेंट लिमिटेड के चेयरमैन हरिमोहन बांगड़ का कहना हैं कि ग्लोबल चैलेंजेज के बावजूद कंपनी की स्ट्रक्चरली पॉजीशन स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। कॉस्टिंग बढऩे के बावजूद कंपनियों ने अभी तक इसका पूरा भार कस्टमर्स पर पासऑन नहीं किया है। इसके बजाय वे इसका कुछ हिस्सा स्वयं वहन कर रही हैं। बांगड़ के अनुसार सीमेंट की रेट्स में कोई भी एडजस्टमेंट्स अचानक नहीं बल्कि क्रमिक रूप से होगा। श्री सीमेंट ने 6 लाख टन मॉडेस्ट बेस से बढक़र 70 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से अधिक सीमेंट का प्रोडक्शन किया है। कंपनी ने अपनी मौजूदा सीमेंट कैपेसिटी 70 एमटीपीए को आगामी वर्षों में 80 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्थान नॉर्थ इंडिया मार्केट के लिए सीमेंट का एक प्रमुख हब बनकर उभरा है, जो दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते फास्ट ग्रोइंग मार्केट्स को सीमेंट की सप्लाई करता है। डिमांड के आउटलुक को अंडरस्कोरिंग करते हुए बांगड़ ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी करीब 7 फीसदी एनुअली राइजिंग कर रही है और Per Capita Income में 2500 सें 3000 डॉलर की राइजिंग से हाउसिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड में उछाल आने की संभावना है, जिससे सीमेंट और स्टील के कंजंप्शन में ग्रोथ होगी।

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श्री सीमेंट की कुल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी हो जाएगी सालाना 80 मिलियन टन

 अमरीका-ईरान वॉर की वजह से दुनिया भर में क्रूड ऑयल व गैस का संकट खड़ा हो गया है। इसका असर इंडिया में भी प्रत्येक इंडस्ट्रीज पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया क्राइसिस के कारण इंडस्ट्री की एनर्जी और इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है, जिसके कारण इंडस्ट्रीज पर ओवरऑल प्रेशर बढ़ रहा है जबकि इस दौरान सीमेंट सेक्टर एक्सपेंशन के दौर में एंटर कर रहा है। देश की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से विकसित होती सीमेंट कंपनियों में से एक श्री सीमेंट लिमिटेड के चेयरमैन हरिमोहन बांगड़ का कहना हैं कि ग्लोबल चैलेंजेज के बावजूद कंपनी की स्ट्रक्चरली पॉजीशन स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। कॉस्टिंग बढऩे के बावजूद कंपनियों ने अभी तक इसका पूरा भार कस्टमर्स पर पासऑन नहीं किया है। इसके बजाय वे इसका कुछ हिस्सा स्वयं वहन कर रही हैं। बांगड़ के अनुसार सीमेंट की रेट्स में कोई भी एडजस्टमेंट्स अचानक नहीं बल्कि क्रमिक रूप से होगा। श्री सीमेंट ने 6 लाख टन मॉडेस्ट बेस से बढक़र 70 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से अधिक सीमेंट का प्रोडक्शन किया है। कंपनी ने अपनी मौजूदा सीमेंट कैपेसिटी 70 एमटीपीए को आगामी वर्षों में 80 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्थान नॉर्थ इंडिया मार्केट के लिए सीमेंट का एक प्रमुख हब बनकर उभरा है, जो दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते फास्ट ग्रोइंग मार्केट्स को सीमेंट की सप्लाई करता है। डिमांड के आउटलुक को अंडरस्कोरिंग करते हुए बांगड़ ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी करीब 7 फीसदी एनुअली राइजिंग कर रही है और Per Capita Income में 2500 सें 3000 डॉलर की राइजिंग से हाउसिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड में उछाल आने की संभावना है, जिससे सीमेंट और स्टील के कंजंप्शन में ग्रोथ होगी।


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