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20-04-2026

राजस्थान पेट्रो जोन में डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट्स के लिए 18 एमओयू

  •  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में मुख्यमंत्री निवास पर बालोतरा स्थित राजस्थान पेट्रो जोन में इंडस्ट्रीयल यूनिटों को डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट्स की सप्लाई करने के लिए एचपीसीएल रिफाइनरी, इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग तथा उद्योगों के बीच 18 त्रिपक्षीय एमओयू हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स प्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित औद्योगिक क्रांति की धुरी भी साबित होगा। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी से निकलने वाले डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट बेस्ड सहायक उद्योगों की स्थापना के लिए राजस्थान पेट्रो जोन (आरपीजेड) डवलप किया गया है। इसमें प्लास्टिक, फार्मा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के प्रॉडक्ट का निर्माण होगा।

    45 इंडस्ट्रीयल प्लॉट्स अलॉट : सीएम ने कहा कि रिफाइनरी के समीप बोरावास-कलावा में राजस्थान पेट्रो जोन (आरपीजेड) 1022 हैक्टेयर में डवलप किया जा रहा है। प्रथम चरण में लगभग 30 हैक्टेयर भूमि डवलप  की जा चुकी है। वहीं 86 इंडस्ट्रीयल प्लॉट्स में से 45 प्लॉट्स का अलॉट भी किये जा चुके है। इसके अतिरिक्त 8 प्लग एंड प्ले फैक्ट्री शेड्स का भी निर्माण किया गया है, ताकि इन्वेस्टर अपनी मशीनरी इंस्टॉल करें और तुरंत कार्य शुरू कर दें।

    दूसरे फेज में होंगे 257 प्लॉट्स  :  उन्होंने कहा कि राजस्थान पेट्रो जोन के दूसरे फेज में 213 हैक्टेयर में 257 प्लॉट्स डवलप किये जायेंगे। इनके लिये ‘ए’ कैटेगरी की पर्यावरण क्लीयरेंस प्राप्त की जा चुकी है। इस क्षेत्र में 500 से 162000 वर्ग मीटर के कुल 8 भूखंड भी नियोजित है। इसमें से लगभग 87 हैक्टेयर पर 68 करोड़ रुपये की लागत से सडक़, बिजली, स्ट्रीट लाइट, और साइन बोर्ड जैसे इंन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास कार्य हेतु स्वीकृति दे दी गई है।

    780 हैक्टेयर लैंड पर बनेगा तीसरा फेज:          सीएम शर्मा ने कहा कि इस जोन का तीसरा फेज 780 हैक्टेयर का होगा, जिसमें से 447 हैक्टेयर के लिये कैटेगरी ‘ए’ की पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए अप्लाई किया जा चुका है। इसमें रामनगर (थोब), सिंधियों की ढाणी, वेदरलाई, बोरावास विस्तार और खेमाबाबा नगर में लगभग 780 हैक्टेयर लैंड रीको को सौंपी गई है। यहां भी इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप कर प्लॉट अलॉट किये जायेंगे।  इसके साथ ही जेरला में भी इंडस्ट्रीयल एरिया विकसित किया जाएगा।

    ये होंगे डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट्स : रिफाइनरी से मुख्य ईंधन के अतिरिक्त भारी मात्रा में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल प्रॉडक्ट निकलेंगे, जो कई इंडस्ट्रीज के लिए अच्छी क्वालिटी वाला कच्चा माल होगा। आरपीजेड में पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीथीन (एचडीपीई/एलएलडीपीई), बेंजीन, टोलुइन और ब्यूटाडाईन जैसे सब-प्रॉडक्ट्स बेस्ड इंडस्ट्रीज लग सकेंगी। इस कच्चे माल को प्रोसेस्ड करके घरेलू और इंडस्ट्रीयल उपयोग के लिए कई तरह के प्रॉडक्ट तैयार किये जा सकेंगे। इनमें प्लास्टिक फर्नीचर, कृषि पाइप, पैकेजिंग फिल्म्स, ऑटोमोबाइल के डैशबोर्ड एवं बंपर, सिंथेटिक फाइबर, मेडिकल सीरिंज और पेंट-डिटर्जेंट जैसे प्रॉडक्ट शामिल हैं।  इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर वैल्यू-एडेड प्रॉडक्ट्स के निर्माण से राजस्थान का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना संभव है।

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राजस्थान पेट्रो जोन में डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट्स के लिए 18 एमओयू

 मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में मुख्यमंत्री निवास पर बालोतरा स्थित राजस्थान पेट्रो जोन में इंडस्ट्रीयल यूनिटों को डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट्स की सप्लाई करने के लिए एचपीसीएल रिफाइनरी, इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग तथा उद्योगों के बीच 18 त्रिपक्षीय एमओयू हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स प्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित औद्योगिक क्रांति की धुरी भी साबित होगा। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी से निकलने वाले डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट बेस्ड सहायक उद्योगों की स्थापना के लिए राजस्थान पेट्रो जोन (आरपीजेड) डवलप किया गया है। इसमें प्लास्टिक, फार्मा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के प्रॉडक्ट का निर्माण होगा।

45 इंडस्ट्रीयल प्लॉट्स अलॉट : सीएम ने कहा कि रिफाइनरी के समीप बोरावास-कलावा में राजस्थान पेट्रो जोन (आरपीजेड) 1022 हैक्टेयर में डवलप किया जा रहा है। प्रथम चरण में लगभग 30 हैक्टेयर भूमि डवलप  की जा चुकी है। वहीं 86 इंडस्ट्रीयल प्लॉट्स में से 45 प्लॉट्स का अलॉट भी किये जा चुके है। इसके अतिरिक्त 8 प्लग एंड प्ले फैक्ट्री शेड्स का भी निर्माण किया गया है, ताकि इन्वेस्टर अपनी मशीनरी इंस्टॉल करें और तुरंत कार्य शुरू कर दें।

दूसरे फेज में होंगे 257 प्लॉट्स  :  उन्होंने कहा कि राजस्थान पेट्रो जोन के दूसरे फेज में 213 हैक्टेयर में 257 प्लॉट्स डवलप किये जायेंगे। इनके लिये ‘ए’ कैटेगरी की पर्यावरण क्लीयरेंस प्राप्त की जा चुकी है। इस क्षेत्र में 500 से 162000 वर्ग मीटर के कुल 8 भूखंड भी नियोजित है। इसमें से लगभग 87 हैक्टेयर पर 68 करोड़ रुपये की लागत से सडक़, बिजली, स्ट्रीट लाइट, और साइन बोर्ड जैसे इंन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास कार्य हेतु स्वीकृति दे दी गई है।

780 हैक्टेयर लैंड पर बनेगा तीसरा फेज:          सीएम शर्मा ने कहा कि इस जोन का तीसरा फेज 780 हैक्टेयर का होगा, जिसमें से 447 हैक्टेयर के लिये कैटेगरी ‘ए’ की पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए अप्लाई किया जा चुका है। इसमें रामनगर (थोब), सिंधियों की ढाणी, वेदरलाई, बोरावास विस्तार और खेमाबाबा नगर में लगभग 780 हैक्टेयर लैंड रीको को सौंपी गई है। यहां भी इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप कर प्लॉट अलॉट किये जायेंगे।  इसके साथ ही जेरला में भी इंडस्ट्रीयल एरिया विकसित किया जाएगा।

ये होंगे डाउनस्ट्रीम प्रॉडक्ट्स : रिफाइनरी से मुख्य ईंधन के अतिरिक्त भारी मात्रा में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल प्रॉडक्ट निकलेंगे, जो कई इंडस्ट्रीज के लिए अच्छी क्वालिटी वाला कच्चा माल होगा। आरपीजेड में पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीथीन (एचडीपीई/एलएलडीपीई), बेंजीन, टोलुइन और ब्यूटाडाईन जैसे सब-प्रॉडक्ट्स बेस्ड इंडस्ट्रीज लग सकेंगी। इस कच्चे माल को प्रोसेस्ड करके घरेलू और इंडस्ट्रीयल उपयोग के लिए कई तरह के प्रॉडक्ट तैयार किये जा सकेंगे। इनमें प्लास्टिक फर्नीचर, कृषि पाइप, पैकेजिंग फिल्म्स, ऑटोमोबाइल के डैशबोर्ड एवं बंपर, सिंथेटिक फाइबर, मेडिकल सीरिंज और पेंट-डिटर्जेंट जैसे प्रॉडक्ट शामिल हैं।  इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर वैल्यू-एडेड प्रॉडक्ट्स के निर्माण से राजस्थान का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना संभव है।


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