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15-04-2026

अमेरिकी नाकेबंदी से रोजाना 20 लाख बैरल ईरानी तेल के ग्लोबल मार्केट्स से बाहर होने की आशंका

  •  अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू होने के साथ रोजाना करीब 20 लाख बैरल ईरानी तेल के वैश्विक बाजारों से बाहर होने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ेगा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। नोमुरा में इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषक बिनीत बांका ने अपने नोट में लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की पूरी तरह नाकेबंदी भारत के लिए एलपीजी सप्लाई को भी प्रभावित कर सकती है। पिछले एक महीने में भारत ने कम से कम 8 एलपीजी टैंकर इस मार्ग से सुरक्षित पार कराए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी घोषणा की है कि अमेरिका किसी भी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को टोल देने की अनुमति नहीं देगा। हालांकि भारत ने हाल ही में अपने एलपीजी जहाजों के लिए कोई टोल नहीं दिया है, लेकिन आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नोमुरा ने अपने नोट में कहा, अगर यह संघर्ष लंबा चलता है, तो रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से सप्लाई संतुलित करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है, जिससे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इस बीच, ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका और ईरान पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में सप्ताहांत में हुई वार्ता के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने के बाद बातचीत के दूसरे दौर पर विचार कर रहे हैं। इसी कारण कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि मंगलवार को संभावित बातचीत की उम्मीद के चलते कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर यह करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। नोमुरा का मानना है कि शांति वार्ता विफल रहने के कारण तेल की कीमतों में 'वॉर रिस्क प्रीमियम' और बढ़ सकता है। अगर अमेरिका पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है। हाल के हफ्तों में तेल की कीमतों में आई तेजी ने सऊदी अरब के एक्सपोर्ट में आई गिरावट की भरपाई कर दी है। मार्च 2026 में सऊदी अरब की तेल आय सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की पूरी क्षमता हासिल कर ली है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करती है और रेड सी तक जाती है। अनुमान है कि इसमें से 2 मिलियन बैरल घरेलू रिफाइनरी में इस्तेमाल होगा, जबकि करीब 5 मिलियन बैरल एक्सपोर्ट के लिए उपलब्ध रह सकता है, जो मार्च 2026 के 4.4 मिलियन बैरल से ज्यादा है। वहीं यूएई ने भी अन्य खाड़ी देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां तेल राजस्व में केवल 3 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। बांका के अनुमानों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से तेल राजस्व के मामले में ईरान को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। मार्च 2026 में ईरान की तेल आय सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढक़र 5.7 अरब डॉलर पहुंच गई।

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अमेरिकी नाकेबंदी से रोजाना 20 लाख बैरल ईरानी तेल के ग्लोबल मार्केट्स से बाहर होने की आशंका

 अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू होने के साथ रोजाना करीब 20 लाख बैरल ईरानी तेल के वैश्विक बाजारों से बाहर होने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ेगा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। नोमुरा में इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषक बिनीत बांका ने अपने नोट में लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की पूरी तरह नाकेबंदी भारत के लिए एलपीजी सप्लाई को भी प्रभावित कर सकती है। पिछले एक महीने में भारत ने कम से कम 8 एलपीजी टैंकर इस मार्ग से सुरक्षित पार कराए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी घोषणा की है कि अमेरिका किसी भी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को टोल देने की अनुमति नहीं देगा। हालांकि भारत ने हाल ही में अपने एलपीजी जहाजों के लिए कोई टोल नहीं दिया है, लेकिन आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नोमुरा ने अपने नोट में कहा, अगर यह संघर्ष लंबा चलता है, तो रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से सप्लाई संतुलित करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है, जिससे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इस बीच, ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका और ईरान पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में सप्ताहांत में हुई वार्ता के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने के बाद बातचीत के दूसरे दौर पर विचार कर रहे हैं। इसी कारण कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि मंगलवार को संभावित बातचीत की उम्मीद के चलते कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर यह करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। नोमुरा का मानना है कि शांति वार्ता विफल रहने के कारण तेल की कीमतों में 'वॉर रिस्क प्रीमियम' और बढ़ सकता है। अगर अमेरिका पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है। हाल के हफ्तों में तेल की कीमतों में आई तेजी ने सऊदी अरब के एक्सपोर्ट में आई गिरावट की भरपाई कर दी है। मार्च 2026 में सऊदी अरब की तेल आय सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की पूरी क्षमता हासिल कर ली है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करती है और रेड सी तक जाती है। अनुमान है कि इसमें से 2 मिलियन बैरल घरेलू रिफाइनरी में इस्तेमाल होगा, जबकि करीब 5 मिलियन बैरल एक्सपोर्ट के लिए उपलब्ध रह सकता है, जो मार्च 2026 के 4.4 मिलियन बैरल से ज्यादा है। वहीं यूएई ने भी अन्य खाड़ी देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां तेल राजस्व में केवल 3 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। बांका के अनुमानों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से तेल राजस्व के मामले में ईरान को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। मार्च 2026 में ईरान की तेल आय सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढक़र 5.7 अरब डॉलर पहुंच गई।


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