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07-04-2026

देश के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ रेट मार्च में 14 महीने में सबसे धीमी रही : पीएमआई

  •  देश के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ रेट मार्च में 14 महीने में सबसे धीमी रही जो नए कारोबार में नरमी को दर्शाती है। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी मिली। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 रह गया। यह जनवरी 2025 के बाद से नए कारोबार एवं गतिविधियों में सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाता है। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर अंक का मतलब गतिविधियों में विस्तार से और 50 से कम का आशय संकुचन से होता है। एचएसबीसी की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा, ‘‘ देश के सर्विस सेक्टर में मार्च में विस्तार कायम रहा लेकिन वृद्धि की गति लगातार दूसरे महीने धीमी पड़ी। मांग मजबूत बनी रही, जिसका नेतृत्व नए एक्सपोर्ट ऑर्डर ने किया जो 2024 के मध्य के बाद से सबसे अधिक बढ़े। इससे सेवा प्रदाताओं की भविष्य की गतिविधियों को लेकर उम्मीदें सकारात्मक बनी रहीं।’’ सर्विस सेक्टर में नए एक्सपोर्ट ऑर्डर में हालांकि तेज वृद्धि दर्ज की गई। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका और पश्चिम एशिया से मांग बढऩे की बात कही। कीमतों के मोर्चे पर सेल्स मूल्य मुद्रास्फीति सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई, क्योंकि जून 2022 के बाद से कच्चे माल की लागत में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों के अनुसार फरवरी के बाद खाना पकाने का तेल, अंडे, बिजली, फल, ईंधन, श्रम, मछली, चिकन, मीट (मांस) व सब्जियों की लागत बढ़ी है। रोजगार के संदर्भ में लगातार तीसरे महीने इसमें वृद्धि दर्ज हुई। कारोबार को लेकर बढ़ते विश्वास के कारण नौकरी सृजन की गति मजबूत रही और यह 2025 के मध्य के बाद से सबसे अधिक रही। सर्वेक्षण में कहा गया, ‘‘कंपनियां उत्पादन के दृष्टिकोण को लेकर करीब पिछले 12 वर्ष की तुलना में सबसे अधिक आशावादी रहीं। यह आशावाद मांग व बाजार स्थितियों में सुधार की उम्मीदों पर आधारित है। कंपनियों को उम्मीद है कि विज्ञापन एवं बेहतर ग्राहक संबंध सकारात्मक परिणाम देंगे।’’ इस बीच, एचएसबीसी इंडिया समग्र पीएमआई उत्पादन सूचकांक फरवरी के 58.9 से घटकर मार्च में 57.0 पर आ गया जो करीब साढ़े तीन वर्ष में विस्तार की सबसे धीमी दर को दर्शाता है। समग्र पीएमआई सूचकांक, तुलनीय विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई सूचकांकों का भारित औसत है। भार, आधिकारिक जीडीपी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण और सर्विस सेक्टरों के सापेक्ष आकार को दर्शाता है। निजी क्षेत्र में लागत दबाव चार वर्ष में सबसे अधिक रहा। सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने सेल्स कीमतों में अधिक वृद्धि की, वहीं दूसरी ओर विनिर्माताओं ने दो वर्ष में सबसे कमजोर वृद्धि का संकेत दिया। समग्र रूप से महंगाई की दर पिछले महीने के मुकाबले लगभग अपरिवर्तित रही। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल द्वारा सर्विस सेक्टर की करीब 400 कंपनियों से प्राप्त प्रश्नावली के जवाबों के आधार पर तैयार किया जाता है।

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देश के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ रेट मार्च में 14 महीने में सबसे धीमी रही : पीएमआई

 देश के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ रेट मार्च में 14 महीने में सबसे धीमी रही जो नए कारोबार में नरमी को दर्शाती है। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी मिली। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 रह गया। यह जनवरी 2025 के बाद से नए कारोबार एवं गतिविधियों में सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाता है। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर अंक का मतलब गतिविधियों में विस्तार से और 50 से कम का आशय संकुचन से होता है। एचएसबीसी की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा, ‘‘ देश के सर्विस सेक्टर में मार्च में विस्तार कायम रहा लेकिन वृद्धि की गति लगातार दूसरे महीने धीमी पड़ी। मांग मजबूत बनी रही, जिसका नेतृत्व नए एक्सपोर्ट ऑर्डर ने किया जो 2024 के मध्य के बाद से सबसे अधिक बढ़े। इससे सेवा प्रदाताओं की भविष्य की गतिविधियों को लेकर उम्मीदें सकारात्मक बनी रहीं।’’ सर्विस सेक्टर में नए एक्सपोर्ट ऑर्डर में हालांकि तेज वृद्धि दर्ज की गई। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका और पश्चिम एशिया से मांग बढऩे की बात कही। कीमतों के मोर्चे पर सेल्स मूल्य मुद्रास्फीति सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई, क्योंकि जून 2022 के बाद से कच्चे माल की लागत में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों के अनुसार फरवरी के बाद खाना पकाने का तेल, अंडे, बिजली, फल, ईंधन, श्रम, मछली, चिकन, मीट (मांस) व सब्जियों की लागत बढ़ी है। रोजगार के संदर्भ में लगातार तीसरे महीने इसमें वृद्धि दर्ज हुई। कारोबार को लेकर बढ़ते विश्वास के कारण नौकरी सृजन की गति मजबूत रही और यह 2025 के मध्य के बाद से सबसे अधिक रही। सर्वेक्षण में कहा गया, ‘‘कंपनियां उत्पादन के दृष्टिकोण को लेकर करीब पिछले 12 वर्ष की तुलना में सबसे अधिक आशावादी रहीं। यह आशावाद मांग व बाजार स्थितियों में सुधार की उम्मीदों पर आधारित है। कंपनियों को उम्मीद है कि विज्ञापन एवं बेहतर ग्राहक संबंध सकारात्मक परिणाम देंगे।’’ इस बीच, एचएसबीसी इंडिया समग्र पीएमआई उत्पादन सूचकांक फरवरी के 58.9 से घटकर मार्च में 57.0 पर आ गया जो करीब साढ़े तीन वर्ष में विस्तार की सबसे धीमी दर को दर्शाता है। समग्र पीएमआई सूचकांक, तुलनीय विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई सूचकांकों का भारित औसत है। भार, आधिकारिक जीडीपी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण और सर्विस सेक्टरों के सापेक्ष आकार को दर्शाता है। निजी क्षेत्र में लागत दबाव चार वर्ष में सबसे अधिक रहा। सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने सेल्स कीमतों में अधिक वृद्धि की, वहीं दूसरी ओर विनिर्माताओं ने दो वर्ष में सबसे कमजोर वृद्धि का संकेत दिया। समग्र रूप से महंगाई की दर पिछले महीने के मुकाबले लगभग अपरिवर्तित रही। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल द्वारा सर्विस सेक्टर की करीब 400 कंपनियों से प्राप्त प्रश्नावली के जवाबों के आधार पर तैयार किया जाता है।


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