ऑनलाइन ग्रोसरी में नेक्स्ट ग्रोथ इंडिया में 10 मिनट डिलीवरी पर अथाह दांव लगाने से नहीं बल्कि भारत (स्मॉल टाउन और सिटी) की प्राइस सेंसिटिव फैमिली की जरूरतों को पूरा करने से अनलॉक होगी। मार्केट रिसर्च फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की लेटेस्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2030 तक भारत के कुल परिवारों में लगभग 40 परसेंट इंडिया नहीं भारत (स्मॉल टाउन और सिटी) के होंगे। इन परिवारों की संख्या वित्त वर्ष 2024 के लगभग 12 करोड़ से बढक़र वित्त वर्ष 2030 तक 15 करोड़ से अधिक हो जाएगी। जो गुड्स एंड सर्विसेस पर एक ट्रिलियन डॉलर (लगभग 90 लाख करोड़ रुपये) ज्यादा खर्च करेंगे जिससे डिजिटल ग्रोसरी कंपनियों के लिए एक विशाल और अब तक अनछुआ रहा बाजार तैयार हो रहा है। भारत का कुल ग्रोसरी मार्केट 2025 के 658 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक लगभग 992 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यानी केवल पांच वर्ष में लगभग 334 बिलियन डॉलर (30 लाख करोड़ रुपये) मार्केट में आएंगे। लेकिन इसमें से ज्यादातर फायदा पारंपरिक किराना दुकानों को मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भी किराना दुकानों का मार्केट शेयर 86 परसेंट रहने की संभावना है, जो अभी 91 परसेंट के करीब है। दूसरी ओर, ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स का कुल मार्केट शेयर वर्ष 2025 के 3 परसेंट से बढक़र 2030 तक 7 परसेंट होने का अनुमान है। यह सुनने में मामूली लगे लेकिन 992 बिलियन डॉलर के मार्केट का 7 परसेंट हिस्सा लगभग 69 बिलियन डॉलर का ऑनलाइन किराना मार्केट होगा। रेडसीर के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का ऑनलाइन रिटेल मार्केट 21 परसेंट की ग्रोथ के साथ 79 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान लेन-देन (ट्रांजेक्शन) की संख्या लगभग 40 परसेंट बढ़ी है और एक्टिव बायर लगभग 25 परसेंट बढक़र 33.5 करोड़ से 35.5 करोड़ के बीच पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार भारत कैसे तेजी से इंडिया के साथ जुड़ता जा रहा है इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि पैकेटबंद कुकिंग ऑइल का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 70 परसेंट नॉन मेट्रो मार्केट (भारत या स्मॉल टाउन) तक पहुंच चुका है। इसी तरह पैकेटबंद आटा और चावल में हाई डबल डिजिट ग्रोथ हो रही है। 10 में से 8 परिवारों में अब रोजमर्रा हाई-प्रोटीन या प्रोटीन-रिच फूड आइटम जैसे पनीर का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन भारत में कामयाबी का मंत्रा 10 मिनट डिलिवरी नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बड़े वेल्यू सेंट्रिक किराना प्लेटफॉर्म में लगभग 58 परसेंट प्रोडक्ट रीजनल या प्राइवेट लेबल के हैं जबकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ये केवल 18-20 परसेंट ही हंै। प्राइस सेंसिटिव बायर के लिए इस प्लेटफॉर्म पर पैक साइज छोटा है और पर ऑर्डर डिलिवरी फीस भी 50-55 रुपये ही है। भारत में लगभग 1.3 करोड़ से अधिक किराना दुकानें हैं अधिकांश परिवार रोजमर्रा परचेज लोकल दुकानों से करते हैं। इसीलिए 2030 तक भी किराना दुकानों का 86 परसेंट मार्केट पर कब्जा होगा।

