देश का एआई इको-सिस्टम धीरे-धीरे विस्तार ले रहा है। जैनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और एंटरप्राइज अडॉप्शन का साथ लेकर यह विस्तार किया जा रहा है। अगले चरण में समस्या तब आयेगी जबकि स्किल्ड इंजीनियरों की भारी किल्लत होगी। यही वह टीम है जो एआई सिस्टम में प्रोडक्शन ग्रेड एआई सिस्टम को बना सकते हैं और नियुक्त कर सकते हैं। फाउंडर्स और रिकू्रटर्स का कहना है कि एंट्री लेवल एआई स्किल में गैप तो है ही साथ ही अनुभवी टैलेंट की कमी रहेगी जो रिलाएबल और स्केलेबल प्रोडक्ट्स दे सकती है। जहां तक स्टार्टअप्स का सवाल है उनके पास लार्ज टैक फम्र्स के समान देने के लिये मोटा पैकेज नहीं है। एआई बिजनस जिस प्रकार से पैर पसार रहा है, टैलेंट की सप्लाई उतनी नहीं है। जज गु्रप के सीटीओ के अनुसार शॉर्टेज वास्तव में आ रही है। बेन एंड कम्पनी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2027 में भारत में 2.3 मिलियन एआई जॉब ओपनिंग रह सकती है लेकिन इनमें से 1.2 मिलियन ही योग्यता प्राप्त पेशेवर रहेंगे यानि कि करीब एक मिलियन जॉब रोल्स शेष रह जायेंगे। ग्लोबली भी अनुभवी एआई टैलेंट की सप्लाई सीमित ही है। ओरीसर्व के फाउंडर और सीईओ के अनुसार यह चैलेंज प्रोडक्शन गे्रड सिस्टम में बाधा है। सिलिकॉन वैली में भी सप्लाई डिमांड से कम है। समस्या से उबरने के लिये स्टार्टअप्स हायरिंग और स्केलिंग पर पुन: सोच रहे हैं। कई टैलेंट पाइपलाइन को ट्रेन करने के बारे में सोच रहे हैं। समय से पहले ही इंटरनल ट्रेनिंग में निवेश करने का विचार किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार एआई सॉल्यूशंस में डिमांड बढ़ रही है और टैलेंट पूल की शॉर्टेज है, यह स्थिति तो रहने वाली है। इसके बारे में सॉल्यूशंस का विचार तो करना ही होगा।