सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के कथित दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के मकसद से सोना, चांदी और प्लैटिनम आभूषणों के इंपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधात्मक शर्तें लागू कर दी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, सीमा शुल्क वर्गीकरण शीर्ष 7113 के तहत आने वाले इन उत्पादों की इंपोर्ट नीति को मुक्त से बदलकर प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब सोना, चांदी एवं प्लेटिनम से बने आभूषणों का इंपोर्ट करने के लिए डीजीएफटी से लाइसेंस या पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध पहले से किए गए सौदों या भुगतान जैसी किसी भी शर्त के बावजूद लागू होंगे। साथ ही, संक्रमणकालीन प्रावधान का लाभ भी उपलब्ध नहीं होगा। हालांकि, 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख इकाइयों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में स्थित इकाइयों की तरफ से किए जाने वाले आभूषण इंपोर्ट पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इसके अलावा, रत्न एवं आभूषण निर्यात से जुड़ी योजनाओं के तहत होने वाले इंपोर्ट को भी छूट दी गई है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, कुछ इंपोर्टक भारत-आसियान मुक्त व्यापार समझौता का दुरुपयोग कर शुल्क में मौजूद अंतराल का फायदा उठा रहे थे। इसके अलावा वे थाईलैंड जैसे देशों से बिना रत्न-पत्थर वाले आभूषण के नाम पर कीमती धातुओं का इंपोर्ट कर रहे थे। एक उद्योग अधिकारी ने कहा कि लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक कारोबारी इस कदम से प्रभावित न हों। भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समूह आसियान के बीच वस्तुओं के व्यापार पर यह समझौता 2010 से लागू है। इससे पहले सरकार प्लैटिनम और चांदी के आभूषणों के इंपोर्ट पर भी समय-समय पर इसी तरह के प्रतिबंध लगा चुकी है।