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03-04-2026

फीमेल वर्कफोर्स में जॉब स्टेबिलिटी प्रमुख प्रायोरिटी

  •  भारत में संगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं, पुरुषों की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक समय तक अपनी नौकरी में टिकी रहती हैं। एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है, जो इस पुरानी धारणा को गलत साबित करती है कि महिलाएं जल्दी नौकरी छोड़ देती हैं। वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) प्लेटफॉर्म सैलरी-से द्वारा किए गए इस अध्ययन के आंकड़े 47,800 से अधिक ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) रिकॉर्ड के विश्लेषण पर आधारित हैं। इनमें मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों के वेतनभोगी पेशेवरों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं का नौकरी पर टिके रहने का औसत समय 10.6 महीने है, जबकि पुरुषों के लिए यह केवल 7.8 महीने है। वास्तव में केवल 36 प्रतिशत महिलाएं ही पहले छह महीनों के भीतर नौकरी छोड़ती हैं, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 44' है। हालांकि, नौकरी में अधिक स्थिरता के बावजूद काम करने वाले कुल लोगों में महिलाओं की भागीदारी अब भी काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यबल में प्रत्येक 13 कर्मचारियों में से केवल एक महिला है, जो कुल ईपीएफओ रिकॉर्ड का मात्र 7.6 प्रतिशत है। विश्लेषण में यह भी पाया गया कि जो महिलाएं कार्यबल में शामिल होती हैं, वे लंबे समय तक काम करती हैं, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों और भूमिकाओं में उन्हें मिलने वाले अवसरों में असमानता बनी हुई है। क्षेत्रवार आंकड़ों को देखें तो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग में महिलाओं की हिस्सेदारी 13.2 प्रतिशत रही, जो कुल औसत से लगभग दोगुनी है। शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक 20.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके विपरीत, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा बना हुआ है, जहां महिलाओं की भागीदारी क्रमश: 3.6 प्रतिशत और 3.2 प्रतिशत ही है। अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया है कि 35 से 45 वर्ष की आयु के बीच महिलाओं की भागीदारी में भारी गिरावट आती है। इस आयु वर्ग में 19.5 प्रतिशत महिलाएं कार्यबल से बाहर हो जाती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह दर 12.4 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण विवाह और मातृत्व जैसे जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव माने गए हैं।

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फीमेल वर्कफोर्स में जॉब स्टेबिलिटी प्रमुख प्रायोरिटी

 भारत में संगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं, पुरुषों की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक समय तक अपनी नौकरी में टिकी रहती हैं। एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है, जो इस पुरानी धारणा को गलत साबित करती है कि महिलाएं जल्दी नौकरी छोड़ देती हैं। वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) प्लेटफॉर्म सैलरी-से द्वारा किए गए इस अध्ययन के आंकड़े 47,800 से अधिक ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) रिकॉर्ड के विश्लेषण पर आधारित हैं। इनमें मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों के वेतनभोगी पेशेवरों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं का नौकरी पर टिके रहने का औसत समय 10.6 महीने है, जबकि पुरुषों के लिए यह केवल 7.8 महीने है। वास्तव में केवल 36 प्रतिशत महिलाएं ही पहले छह महीनों के भीतर नौकरी छोड़ती हैं, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 44' है। हालांकि, नौकरी में अधिक स्थिरता के बावजूद काम करने वाले कुल लोगों में महिलाओं की भागीदारी अब भी काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यबल में प्रत्येक 13 कर्मचारियों में से केवल एक महिला है, जो कुल ईपीएफओ रिकॉर्ड का मात्र 7.6 प्रतिशत है। विश्लेषण में यह भी पाया गया कि जो महिलाएं कार्यबल में शामिल होती हैं, वे लंबे समय तक काम करती हैं, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों और भूमिकाओं में उन्हें मिलने वाले अवसरों में असमानता बनी हुई है। क्षेत्रवार आंकड़ों को देखें तो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग में महिलाओं की हिस्सेदारी 13.2 प्रतिशत रही, जो कुल औसत से लगभग दोगुनी है। शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक 20.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके विपरीत, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा बना हुआ है, जहां महिलाओं की भागीदारी क्रमश: 3.6 प्रतिशत और 3.2 प्रतिशत ही है। अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया है कि 35 से 45 वर्ष की आयु के बीच महिलाओं की भागीदारी में भारी गिरावट आती है। इस आयु वर्ग में 19.5 प्रतिशत महिलाएं कार्यबल से बाहर हो जाती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह दर 12.4 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण विवाह और मातृत्व जैसे जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव माने गए हैं।


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