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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-01-2026

प्लास्टिकवेयर से ग्लासवेयर पर शिफ्ट हो रहा ‘किचनवेयर’

  •  किचनवेयर और क्रॉकरी कम्पनियां प्लास्टिकवेयर से ग्लासवेयर पर शिफ्ट हो रही है। पोस्ट पेंडेमिक हैल्थ पर फोकस बढ़ा है और इसे कम्पनियां प्रीमियम लेवल पर कैश कर रही हैं। इसे प्रीमियम लाइफस्टाइल अपगे्रडेशन भी कह सकते हैं और यह हैल्दी आल्टरनेटिव तो है ही। किचनवेयर फर्म बोरोसिल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव के अनुसार मैन्युफैक्चसर्स की नजर से देखें तो यह कमर्शियल प्ले है क्योंकि कन्ज्यूमर प्रिफरेंस बदल रहा है। बदलाव का एक समय होता है और किचनवेयर में हम नया बदलाव देख रहे हैं। एक समय था जब किचन में प्लास्टिकवेयर की अधिकता होती थी लेकिन हैल्थ कॉन्शियस कन्जयूमर्स में ग्लासवेयर का के्रज बढ़ता देखा जा सकता है। इंडस्ट्री के अनुमानों को देखें तो ग्लासवेयर हाई मार्जिन ऑफर करते हैं। ग्लास बाउल, स्टोरेज कंटेनर्स प्लास्टिकवेयर की तुलना में बीस से पचास प्रतिशत ज्यादा प्राइस के होते हैं। इनके डिजाइन भी प्लास्टिक से ज्यादा अलग होते हैं। हालांकि यह नीश कैटेगरी है, इसलिये ज्यादा शिफ्टिंग तो नहीं देखी जायेगी। मैनेजमेंट कन्सल्टिंग फर्म द नॉलेज कम्पनी के अनुसार देश का ब्राण्डेड बोरोसीलीकेट ग्लासवेयर मार्केट, जिसमें माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, टम्बलर्स, स्टोरेज प्रोडक्ट्स शामिल हैं, करीब 7,900 करोड़ रुपये का है। यह वार्षिक स्तर पर करीब 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। ओपलवेयर मार्केट जिसमें हल्के, हीट रेजिस्टेंट टेम्पर्ड ग्लास प्रोडक्ट्स आते हैं और पोर्शेलीन फिनिश होती है, इसका मार्केट करीब 2,000 करोड़ रुपये का है और करीब दस प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रहा है। तुलनात्मक रूप से देखें तो कुकवेयर मार्केट जिसमें स्टील, नॉन-स्टिक और कास्ट आयरन प्रोडक्ट्स शामिल हैं, करीब 8100 करोड़ रुपये का है और 8.5 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रहा है। नॉन ग्लास कैटेगरी में यह डॉमीनेंस रखता है। बोरोसिल करीब 64 वर्ष पुरानी है और तीनों ही कैटेगरीज में ऑपरेट करती है। सैलो वल्र्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर के अनुसार एक बार यूटीलाइजेशन करीब 70-75 प्रतिशत पहुंच जाये तो मीनिंगफुल प्रॉफिट मेकिंग हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कन्ज्यूमर्स धीरे-धीरे टॉक्सिन-फ्री मैटीरियल्स की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि मास मार्केट कन्ज्यूमर इसमें शामिल नहीं है, ऐसे में कैटेगरी को प्रीमियम पुश ही ज्यादा मिल रहा है। फीमोरा का फोकस डिजाइन लैड एक्सपेंशन पर है। फाउंडर के अनुसार मॉर्डन डाइनिंग, लिविंग स्पेसेज को देखते हुए डिमांड डिजाइन में नयेपन को लेकर ज्यादा है।

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प्लास्टिकवेयर से ग्लासवेयर पर शिफ्ट हो रहा ‘किचनवेयर’

 किचनवेयर और क्रॉकरी कम्पनियां प्लास्टिकवेयर से ग्लासवेयर पर शिफ्ट हो रही है। पोस्ट पेंडेमिक हैल्थ पर फोकस बढ़ा है और इसे कम्पनियां प्रीमियम लेवल पर कैश कर रही हैं। इसे प्रीमियम लाइफस्टाइल अपगे्रडेशन भी कह सकते हैं और यह हैल्दी आल्टरनेटिव तो है ही। किचनवेयर फर्म बोरोसिल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव के अनुसार मैन्युफैक्चसर्स की नजर से देखें तो यह कमर्शियल प्ले है क्योंकि कन्ज्यूमर प्रिफरेंस बदल रहा है। बदलाव का एक समय होता है और किचनवेयर में हम नया बदलाव देख रहे हैं। एक समय था जब किचन में प्लास्टिकवेयर की अधिकता होती थी लेकिन हैल्थ कॉन्शियस कन्जयूमर्स में ग्लासवेयर का के्रज बढ़ता देखा जा सकता है। इंडस्ट्री के अनुमानों को देखें तो ग्लासवेयर हाई मार्जिन ऑफर करते हैं। ग्लास बाउल, स्टोरेज कंटेनर्स प्लास्टिकवेयर की तुलना में बीस से पचास प्रतिशत ज्यादा प्राइस के होते हैं। इनके डिजाइन भी प्लास्टिक से ज्यादा अलग होते हैं। हालांकि यह नीश कैटेगरी है, इसलिये ज्यादा शिफ्टिंग तो नहीं देखी जायेगी। मैनेजमेंट कन्सल्टिंग फर्म द नॉलेज कम्पनी के अनुसार देश का ब्राण्डेड बोरोसीलीकेट ग्लासवेयर मार्केट, जिसमें माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, टम्बलर्स, स्टोरेज प्रोडक्ट्स शामिल हैं, करीब 7,900 करोड़ रुपये का है। यह वार्षिक स्तर पर करीब 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। ओपलवेयर मार्केट जिसमें हल्के, हीट रेजिस्टेंट टेम्पर्ड ग्लास प्रोडक्ट्स आते हैं और पोर्शेलीन फिनिश होती है, इसका मार्केट करीब 2,000 करोड़ रुपये का है और करीब दस प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रहा है। तुलनात्मक रूप से देखें तो कुकवेयर मार्केट जिसमें स्टील, नॉन-स्टिक और कास्ट आयरन प्रोडक्ट्स शामिल हैं, करीब 8100 करोड़ रुपये का है और 8.5 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रहा है। नॉन ग्लास कैटेगरी में यह डॉमीनेंस रखता है। बोरोसिल करीब 64 वर्ष पुरानी है और तीनों ही कैटेगरीज में ऑपरेट करती है। सैलो वल्र्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर के अनुसार एक बार यूटीलाइजेशन करीब 70-75 प्रतिशत पहुंच जाये तो मीनिंगफुल प्रॉफिट मेकिंग हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कन्ज्यूमर्स धीरे-धीरे टॉक्सिन-फ्री मैटीरियल्स की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि मास मार्केट कन्ज्यूमर इसमें शामिल नहीं है, ऐसे में कैटेगरी को प्रीमियम पुश ही ज्यादा मिल रहा है। फीमोरा का फोकस डिजाइन लैड एक्सपेंशन पर है। फाउंडर के अनुसार मॉर्डन डाइनिंग, लिविंग स्पेसेज को देखते हुए डिमांड डिजाइन में नयेपन को लेकर ज्यादा है।


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