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23-05-2026

म्यूचुअल फंड नहीं! फैमिली सेविंग्स के सेफ हेवन

  •  भारत में सेविंग्स पैटर्न को लेकर गर्मा-गर्म बहस चल रही है। ना पक्ष की लॉबी कह रही है कि महंगाई बढ़ रही तो सेविंग्स घट रही है। लेकिन हां पक्ष की लॉबी कहती है सेविंग्स घट नहीं रही बल्कि डाइवर्ट हो रही है...फिजिकल से फाइनेंशियल की ओर। साथ में लगी टेबल 1 के अनुसार वित्त वर्ष 23 से 25 के बीच फिजिकल सेविंग्स 6 परसेंट घटकर 73 से 67 परसेंट पर आ गई और फाइनेंशियल सेविंग्स इतनी ही बढ़ गई। सेबी के एक रिसर्च पेपर के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में इंडियन फैमिली की सिक्यॉरिटी•ा मार्केट के जरिए की गई सेविंग लगभग दोगुनी होकर 6.91 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। वित्त वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 3.58 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2023 में यह केवल 2.59 लाख करोड़ रुपये रहा था। यानी तीन साल में फाइनेंशियल सेविंग्स करीब तीन गुना हो गई। सिक्यॉरिटीज मार्केट इस फास्ट्रेक ग्रोथ का फैक्टर म्यूचुअल फंड्स रहे। रिसर्च पेपर के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में सिक्यॉरिटीज मार्केट में आने वाली कुल हाउसहोल्ड सेविंग्स का लगभग 80 परसेंट हिस्सा म्यूचुअल फंड के जरिए आया। प्राइमरी मार्केट में म्यूचुअल फंड में इंवेस्टमेंट वित्त वर्ष 25 में 5.13 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 2.85 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 केवल 1.66 लाख करोड़ रुपये था। कुल प्राइमरी मार्केट इंवेस्टमेंट भी लगभग दोगुना होकर 6.31 लाख करोड़ रुपये हो गया। म्यूचुअल फंड्स इंवेस्टमेंट में इस तेज ग्रोथ का बड़ा कारण इंवेस्टर्स का सीधे शेयर्स में इंवेस्ट करने के बजाय प्रोफेशनल मैनेजमेंट वाले निवेश साधनों में भरोसा बढऩा है। पेपर के अनुसार इंडियन इंवेस्टर्स का डायरेक्ट इक्विटी इंवेस्टमेंट से वित्त वर्ष 2025 में 54,786 करोड़ रुपये के नेट विद्ड्रॉल रहा जबकि वित्त वर्ष 2024 में 69,329 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 27,684 करोड़ रुपये की निकासी हुई । सेबी के रिसर्च पेपर में कहा गया है कि प्राइमरी और सैकंडरी दोनों बाजारों को मिलाकर डैट इंस्ट्रूमेंट्स में इंवेस्टमेंट 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यानी मार्केट में भयंकर वॉलेटिलिटी के बीच इंवेस्टर का स्टेबल इनकम वाले प्रोडक्ट्स में भरोसा बढ़ा है। एनेलिस्ट कहते हैं कि यह पैटर्न इंवेस्टर्स का शेयर मार्केट से दूरी बनाना नहीं बल्कि उनके व्यवहार में स्ट्रक्चरल शिफ्ट की ओर इशारा करता है। महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हाउसहोल्ड सेविंग्स बढ़ी है, बल्कि यह है कि इंडियन फैमिली शेयर में प्रोफिटबुक कर नई सेविंग्स के प्रोफेशनल मैनेजमेंट वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रहे हैं। भारत का इक्विटी मार्केट अब स्पिकुलेटर मार्केट (सट्टेबाज बाजार) से  इंवेस्टर्स मार्केट (निवेशक बाजार) में बदल रहा है। हाउसहोल्ड सेविंग्स का सबसे बड़ा जरिया म्यूचुअल फंड बन चुके हैं। वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2025 के बीच म्यूचुअल फंड में इंवेस्टमेंट लगभग तीन गुना हो गया है। एनेलिस्ट्स के अनुसार देश में कुल डीमैट अकाउंट्स की संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई। इसी दौरान म्यूचुअल फंड में दिसंबर 2025 तक 5.9 करोड़ नए यूनीक इंवेस्टर दर्ज किए गए। इनमें से लगभग 3.5 करोड़ इंवेस्टर नॉन-मेट्रो और छोटे शहरी क्षेत्रों से थे।

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म्यूचुअल फंड नहीं! फैमिली सेविंग्स के सेफ हेवन

 भारत में सेविंग्स पैटर्न को लेकर गर्मा-गर्म बहस चल रही है। ना पक्ष की लॉबी कह रही है कि महंगाई बढ़ रही तो सेविंग्स घट रही है। लेकिन हां पक्ष की लॉबी कहती है सेविंग्स घट नहीं रही बल्कि डाइवर्ट हो रही है...फिजिकल से फाइनेंशियल की ओर। साथ में लगी टेबल 1 के अनुसार वित्त वर्ष 23 से 25 के बीच फिजिकल सेविंग्स 6 परसेंट घटकर 73 से 67 परसेंट पर आ गई और फाइनेंशियल सेविंग्स इतनी ही बढ़ गई। सेबी के एक रिसर्च पेपर के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में इंडियन फैमिली की सिक्यॉरिटी•ा मार्केट के जरिए की गई सेविंग लगभग दोगुनी होकर 6.91 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। वित्त वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 3.58 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2023 में यह केवल 2.59 लाख करोड़ रुपये रहा था। यानी तीन साल में फाइनेंशियल सेविंग्स करीब तीन गुना हो गई। सिक्यॉरिटीज मार्केट इस फास्ट्रेक ग्रोथ का फैक्टर म्यूचुअल फंड्स रहे। रिसर्च पेपर के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में सिक्यॉरिटीज मार्केट में आने वाली कुल हाउसहोल्ड सेविंग्स का लगभग 80 परसेंट हिस्सा म्यूचुअल फंड के जरिए आया। प्राइमरी मार्केट में म्यूचुअल फंड में इंवेस्टमेंट वित्त वर्ष 25 में 5.13 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 2.85 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 केवल 1.66 लाख करोड़ रुपये था। कुल प्राइमरी मार्केट इंवेस्टमेंट भी लगभग दोगुना होकर 6.31 लाख करोड़ रुपये हो गया। म्यूचुअल फंड्स इंवेस्टमेंट में इस तेज ग्रोथ का बड़ा कारण इंवेस्टर्स का सीधे शेयर्स में इंवेस्ट करने के बजाय प्रोफेशनल मैनेजमेंट वाले निवेश साधनों में भरोसा बढऩा है। पेपर के अनुसार इंडियन इंवेस्टर्स का डायरेक्ट इक्विटी इंवेस्टमेंट से वित्त वर्ष 2025 में 54,786 करोड़ रुपये के नेट विद्ड्रॉल रहा जबकि वित्त वर्ष 2024 में 69,329 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 27,684 करोड़ रुपये की निकासी हुई । सेबी के रिसर्च पेपर में कहा गया है कि प्राइमरी और सैकंडरी दोनों बाजारों को मिलाकर डैट इंस्ट्रूमेंट्स में इंवेस्टमेंट 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यानी मार्केट में भयंकर वॉलेटिलिटी के बीच इंवेस्टर का स्टेबल इनकम वाले प्रोडक्ट्स में भरोसा बढ़ा है। एनेलिस्ट कहते हैं कि यह पैटर्न इंवेस्टर्स का शेयर मार्केट से दूरी बनाना नहीं बल्कि उनके व्यवहार में स्ट्रक्चरल शिफ्ट की ओर इशारा करता है। महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हाउसहोल्ड सेविंग्स बढ़ी है, बल्कि यह है कि इंडियन फैमिली शेयर में प्रोफिटबुक कर नई सेविंग्स के प्रोफेशनल मैनेजमेंट वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रहे हैं। भारत का इक्विटी मार्केट अब स्पिकुलेटर मार्केट (सट्टेबाज बाजार) से  इंवेस्टर्स मार्केट (निवेशक बाजार) में बदल रहा है। हाउसहोल्ड सेविंग्स का सबसे बड़ा जरिया म्यूचुअल फंड बन चुके हैं। वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2025 के बीच म्यूचुअल फंड में इंवेस्टमेंट लगभग तीन गुना हो गया है। एनेलिस्ट्स के अनुसार देश में कुल डीमैट अकाउंट्स की संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई। इसी दौरान म्यूचुअल फंड में दिसंबर 2025 तक 5.9 करोड़ नए यूनीक इंवेस्टर दर्ज किए गए। इनमें से लगभग 3.5 करोड़ इंवेस्टर नॉन-मेट्रो और छोटे शहरी क्षेत्रों से थे।


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