TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

19-06-2026

ट्रैवल शेड्यूअल स्प्रिच्युअल, वैलनैस सेगमेंट पर फोकस हो रहे

  •  इन्डियन यंग ट्रैवलर्स ट्रेंड को देखें तो यह पाते हैं कि इसमें आध्यात्मिक और वैलनेस का मिश्रण देखने को मिल रहा है। समुद्री तट, पहाड़ों की सैर के बजाय मिलेनियल्स, यंग ट्रैवलर्स रिलेक्सेशन भी पसंद कर रहे हैं। कारण तो स्पष्ट है। ऑफिस बर्नआउट से परेशान होकर प्रोफेशनल्स माइंड को रीसैट करने का प्रयास करते हैं और यह योग, ध्यान, आध्यात्म, स्पा ट्रीटमेंट से बेहतर कौन दे सकता है। ऐसे में वे हाइब्रिड इटीनरी बना रहे हैं। इसमें धार्मिक, आध्यात्मिक और वैलनेस पैकेज शामिल हो। ट्रैवल टैक फम्र्स भी इस अवसर का लाभ लेने के लिये ऐसे ही पैकेज डिजाइन कर रही है। मंदिर दर्शन के साथ डीप टिशू मसाज को शामिल किया जा रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार धार्मिक सर्किट के साथ माइंडफुल लिविंग को महत्व दिया जा रहा है। ऋषिकेश, दक्षिण भारत के टैंपल टाउन के साथ आध्यात्मिक और वैलनेस हब की सैर काफी प्रचलित यात्रा बन रही है। यहां पर सवेरे मंत्रोचार के बीच योग, ध्यान, दिन में डीटॉक्स थेरेपी और शाम को भी मंदिर दर्शन, अध्यात्मिक ज्ञान का सहारा लिया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि यंग ट्रैवलर्स आंतरिक शांति के लिये ऐसे वीकेंड ट्यूर ले रहे हैं। बढ़ती उपयोग हेतु आय ने ऐसे पैकेज को ज्यादा प्रचलित किया है। पैकेज में सभी सुविधाएं दी जाती हैं। मार्केट एंड डेटा रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2032 तक ट्यूरिज्म अपॉच्र्यूनिटी 440 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। फाइनेंशियल ईयर 2025 से 2032 के मध्य दस प्रतिशत सीएजीआर की ग्रोथ सम्भव है। रिलीजियस ट्यूरिज्म मार्केट वित्तीय वर्ष 2024 में करीब 220 मिलियन डॉलर का रहा और यह बात भारतीयों की आस्था से जुडऩे के कारण ही सम्भव हुई।  दरअसल में धार्मिक यात्रा परिवार को जोड़ रही है। इजीमायट्रिप के सीईओ के अनुसार पूरा परिवार धार्मिक यात्रा पर जाता है। वित्तीय वर्ष 2025 में उनकी कम्पनी ने करीब दोगुनी ग्रोथ इस सेगमेंट में देखी है। तीन पीढ़ी के लोग भी एकसाथ धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं। टीयर टू, थ्री सिटी से फ्लो बेहतर है। इसका कारण बेहतर सुविधाएं और कनेक्टिविटी है। अनेक ट्रैवलर्स जब फैमिली के साथ जाते हैं तो वीकेंड के बजाय ऑफ सीजन ट्यूर लेते हैं। आजकल प्रोफेशनल्स के बीच वैलनेस का के्रज काफी बढ़ रहा है। पीक सीजन के बजाय वे ऑड टाइम में वैलनेस सेंटर्स पर जाते हैं। आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिये यह जरूरी भी है। ट्रैवल टैक कम्पनियां के लिये फॉर्मूला सीधा है। वे आध्यात्मिक और वैलनेस ट्यूर को ब्लैंड कर पेश कर रहे हैं। यही ज्यादा डिमांड में भी हैं।

Share
ट्रैवल शेड्यूअल स्प्रिच्युअल, वैलनैस सेगमेंट पर फोकस हो रहे

 इन्डियन यंग ट्रैवलर्स ट्रेंड को देखें तो यह पाते हैं कि इसमें आध्यात्मिक और वैलनेस का मिश्रण देखने को मिल रहा है। समुद्री तट, पहाड़ों की सैर के बजाय मिलेनियल्स, यंग ट्रैवलर्स रिलेक्सेशन भी पसंद कर रहे हैं। कारण तो स्पष्ट है। ऑफिस बर्नआउट से परेशान होकर प्रोफेशनल्स माइंड को रीसैट करने का प्रयास करते हैं और यह योग, ध्यान, आध्यात्म, स्पा ट्रीटमेंट से बेहतर कौन दे सकता है। ऐसे में वे हाइब्रिड इटीनरी बना रहे हैं। इसमें धार्मिक, आध्यात्मिक और वैलनेस पैकेज शामिल हो। ट्रैवल टैक फम्र्स भी इस अवसर का लाभ लेने के लिये ऐसे ही पैकेज डिजाइन कर रही है। मंदिर दर्शन के साथ डीप टिशू मसाज को शामिल किया जा रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार धार्मिक सर्किट के साथ माइंडफुल लिविंग को महत्व दिया जा रहा है। ऋषिकेश, दक्षिण भारत के टैंपल टाउन के साथ आध्यात्मिक और वैलनेस हब की सैर काफी प्रचलित यात्रा बन रही है। यहां पर सवेरे मंत्रोचार के बीच योग, ध्यान, दिन में डीटॉक्स थेरेपी और शाम को भी मंदिर दर्शन, अध्यात्मिक ज्ञान का सहारा लिया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि यंग ट्रैवलर्स आंतरिक शांति के लिये ऐसे वीकेंड ट्यूर ले रहे हैं। बढ़ती उपयोग हेतु आय ने ऐसे पैकेज को ज्यादा प्रचलित किया है। पैकेज में सभी सुविधाएं दी जाती हैं। मार्केट एंड डेटा रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2032 तक ट्यूरिज्म अपॉच्र्यूनिटी 440 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। फाइनेंशियल ईयर 2025 से 2032 के मध्य दस प्रतिशत सीएजीआर की ग्रोथ सम्भव है। रिलीजियस ट्यूरिज्म मार्केट वित्तीय वर्ष 2024 में करीब 220 मिलियन डॉलर का रहा और यह बात भारतीयों की आस्था से जुडऩे के कारण ही सम्भव हुई।  दरअसल में धार्मिक यात्रा परिवार को जोड़ रही है। इजीमायट्रिप के सीईओ के अनुसार पूरा परिवार धार्मिक यात्रा पर जाता है। वित्तीय वर्ष 2025 में उनकी कम्पनी ने करीब दोगुनी ग्रोथ इस सेगमेंट में देखी है। तीन पीढ़ी के लोग भी एकसाथ धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं। टीयर टू, थ्री सिटी से फ्लो बेहतर है। इसका कारण बेहतर सुविधाएं और कनेक्टिविटी है। अनेक ट्रैवलर्स जब फैमिली के साथ जाते हैं तो वीकेंड के बजाय ऑफ सीजन ट्यूर लेते हैं। आजकल प्रोफेशनल्स के बीच वैलनेस का के्रज काफी बढ़ रहा है। पीक सीजन के बजाय वे ऑड टाइम में वैलनेस सेंटर्स पर जाते हैं। आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिये यह जरूरी भी है। ट्रैवल टैक कम्पनियां के लिये फॉर्मूला सीधा है। वे आध्यात्मिक और वैलनेस ट्यूर को ब्लैंड कर पेश कर रहे हैं। यही ज्यादा डिमांड में भी हैं।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news