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16-06-2026

...अब पे्रक्टीकल एक्सपीरियंस जॉब के लिये करेगा रैडी

  •  भारत में कौशल विकास कार्यक्रमों को लेकर कंपनियों की सोच बदल रही है। अधिकांश नियोक्ताओं का मानना है कि सिर्फ कक्षा में प्रशिक्षण देकर युवाओं को नौकरी के लिए तैयार नहीं किया जा सकता है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है। टीमलीज एडटेक की कौशल एवं रोजगार पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक, 95 प्रतिशत से अधिक कंपनियों का मानना है कि केवल कक्षाओं के जरिए प्रशिक्षण देने से युवाओं को रोजगार के लिए तैयार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 62 प्रतिशत कंपनियां अब भी अल्पकालिक कक्षा-आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश कर रही हैं, लेकिन लगभग 75 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि ट्रेनिंग और वर्कप्लेस एक्सपीरियंस को जोडऩे वाले मिश्रित शिक्षण मॉडल बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने में अधिक प्रभावी हैं। रिपोर्ट कहती है कि भारत की रोजगार क्षमता संबंधी चुनौती अब केवल कौशल तक पहुंच की नहीं, बल्कि कौशल को श्रम बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाए रखने की है। करीब 53 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि बाजार की जरूरतों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बीच तालमेल न होना रोजगार की राह में सबसे बड़ी बाधा है। वहीं, 39 प्रतिशत ने व्यावहारिक अनुभव की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलाव, स्वचालन और बदलती नौकरी भूमिकाओं के दौर में कंपनियां अब इस बात पर अधिक जोर दे रही हैं कि लोग अपने पूरे कॅरियर में रोजगार के लायक बने रहें। इसके लिए लगातार सीखने, नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप ढालने और नए कौशल हासिल करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, 81 प्रतिशत से अधिक कंपनियां अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के तहत दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता देती हैं। लगभग 85 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि कार्यस्थल से जुड़े और मिश्रित शिक्षण मॉडल केवल कक्षा-आधारित प्रशिक्षण से बेहतर सामाजिक लाभ प्रदान करते हैं। विभिन्न क्षेत्रों की 860 कंपनियों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में शामिल करीब 70 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम परिवारों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टीमलीज एडटेक के फाउंडर और सीईओ शांतनु रूज ने कहा कि भारत की कौशल विकास चुनौती अब कौशल तक पहुंच से आगे बढक़र रोजगार क्षमता की हो गई है। बदलती अर्थव्यवस्था में लोगों को केवल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि लगातार सीखने और नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत है।

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...अब पे्रक्टीकल एक्सपीरियंस जॉब के लिये करेगा रैडी

 भारत में कौशल विकास कार्यक्रमों को लेकर कंपनियों की सोच बदल रही है। अधिकांश नियोक्ताओं का मानना है कि सिर्फ कक्षा में प्रशिक्षण देकर युवाओं को नौकरी के लिए तैयार नहीं किया जा सकता है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है। टीमलीज एडटेक की कौशल एवं रोजगार पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक, 95 प्रतिशत से अधिक कंपनियों का मानना है कि केवल कक्षाओं के जरिए प्रशिक्षण देने से युवाओं को रोजगार के लिए तैयार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 62 प्रतिशत कंपनियां अब भी अल्पकालिक कक्षा-आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश कर रही हैं, लेकिन लगभग 75 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि ट्रेनिंग और वर्कप्लेस एक्सपीरियंस को जोडऩे वाले मिश्रित शिक्षण मॉडल बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने में अधिक प्रभावी हैं। रिपोर्ट कहती है कि भारत की रोजगार क्षमता संबंधी चुनौती अब केवल कौशल तक पहुंच की नहीं, बल्कि कौशल को श्रम बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाए रखने की है। करीब 53 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि बाजार की जरूरतों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बीच तालमेल न होना रोजगार की राह में सबसे बड़ी बाधा है। वहीं, 39 प्रतिशत ने व्यावहारिक अनुभव की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलाव, स्वचालन और बदलती नौकरी भूमिकाओं के दौर में कंपनियां अब इस बात पर अधिक जोर दे रही हैं कि लोग अपने पूरे कॅरियर में रोजगार के लायक बने रहें। इसके लिए लगातार सीखने, नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप ढालने और नए कौशल हासिल करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, 81 प्रतिशत से अधिक कंपनियां अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के तहत दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता देती हैं। लगभग 85 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि कार्यस्थल से जुड़े और मिश्रित शिक्षण मॉडल केवल कक्षा-आधारित प्रशिक्षण से बेहतर सामाजिक लाभ प्रदान करते हैं। विभिन्न क्षेत्रों की 860 कंपनियों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में शामिल करीब 70 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम परिवारों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टीमलीज एडटेक के फाउंडर और सीईओ शांतनु रूज ने कहा कि भारत की कौशल विकास चुनौती अब कौशल तक पहुंच से आगे बढक़र रोजगार क्षमता की हो गई है। बदलती अर्थव्यवस्था में लोगों को केवल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि लगातार सीखने और नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत है।


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