आर्थिक एवं वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय उपभोक्ता अपने खर्च को लेकर अब अधिक सतर्क हो गए हैं और बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह निष्कर्ष पेश किया गया है। मार्केट रिसर्च फर्म कांतार की उपभोक्ता धारणा पर केंद्रित यह सर्वेक्षण रिपोर्ट कहती है कि लोगों का इकोनॉमिक एवं पर्सनल फाइनेंस संभावनाओं को लेकर भरोसा कुछ कमजोर हुआ है, जिसकी वजह से वे खर्च के बजाय बचत बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। सर्वे में कहा गया है कि उपभोक्ता अब खर्च को लेकर अधिक चयनात्मक हो गए हैं और ऐसी चीजों पर ध्यान दे रहे हैं जो लंबे समय में मूल्य प्रदान करें। मई महीने में किए गए इस अध्ययन में 21 से 55 वर्ष आयु वर्ग के 1,684 उपभोक्ताओं को शामिल किया गया, जिनमें महानगरों एवं गैर-महानगरों के लोग शामिल थे। हालांकि रोजमर्रा के खर्च को लेकर लोग अधिक सतर्क हो गए हैं लेकिन ट्रैवल एवं अर्थपूर्ण अनुभव उपभोक्ताओं की प्राथमिकता में बने हुए हैं। सर्वे के मुताबिक, लोग अब भावनात्मक संतुष्टि, व्यक्तिगत विकास और तनाव से राहत देने वाले अनुभवों पर कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। जनवरी, 2026 में हुए अध्ययन के पहले चरण में महंगाई और आय स्थिरता को लेकर चिंता उभरनी शुरू हुई थी लेकिन अब इन चिंताओं में और वृद्धि देखी गई है। सर्वे के अनुसार, 2026 में अर्थव्यवस्था के बेहतर होने की उम्मीद 48 प्रतिशत लोगों को है जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत था। इसके अलावा, मौजूदा परिदृश्य में नौकरी जाने की चिंता 36 प्रतिशत से बढक़र 41 प्रतिशत हो गई है। वहीं, 61 प्रतिशत लोगों को अपनी बचत एवं निवेश या तो स्थिर रहने या घटने की आशंका है जबकि इनमें बढ़ोतरी की उम्मीद सिर्फ 39 प्रतिशत लोगों को है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च लोगों की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरा है, जिसे 85 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने प्रमुख फाइनेंशियल रिस्क बताया। इसके बाद 80 प्रतिशत ने जीवनयापन की बढ़ती लागत और 71 प्रतिशत ने किराया एवं मासिक किस्तें चुकाने की चिंता जताई। कांतार की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात में करीब 63 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि वे अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए अधिक बचत करने की योजना बना रहे हैं। सर्वे में यह भी पाया गया कि बाहर खाना, मनोरंजन, खरीदारी और सब्सक्रिप्शन जैसे विवेकाधीन खर्चों में कमी आई है। बड़े खर्चों पर खर्च बढ़ाने की योजना रखने वाले उपभोक्ताओं का प्रतिशत भी 46 से घटकर 44 रह गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुद्रास्फीति लोगों की इस सतर्कता का प्रमुख कारण बनी हुई है। करीब 65 प्रतिशत लोगों ने अपना खर्च घटाने के पीछे मुद्रास्फीति को ही मुख्य कारण माना है।