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12-06-2026

डीपफेक वीडियो और नकली पहचान से हो सकती है बड़ी ठगी

  •  केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की जनता के लिए साइबर फ्रॉड को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के मुताबिक, साइबर अपराधी एआई का इस्तेमाल करके असली लगने वाले डीपफेक वीडियो और नकली पहचान (सिंथेटिक आइडेंटिटी) बना बनाकर धोखाधड़ी कर सकते हैं। एडवाइजरी में कहा गया है कि साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके सिक्योरिटी सिस्टम को बायपास कर सकते हैं और फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं। सरकार ने एडवाइजरी में साइबर अपराधियों के काम करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी है। एडवाइजरी में कहा गया है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल फेशियल ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-केवाईसी, अकाउंट रिकवरी और फाइनेंशियल व डिजिटल सेवाओं तक अनधिकृत पहुंच (बिना इजाजत एक्सेस) पाने के लिए किया जा सकता है। एडवाइजरी में बताया गया है कि धोखाधड़ी करने वाले आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जॉब पोर्टल, डेटिंग प्लेटफॉर्म या फोन कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे पीडि़तों का फेशियल डेटा इक_ा करते हैं, जिसके लिए वे कभी-कभी उन्हें कैमरे के सामने पलक झपकाने, सिर घुमाने या बोलने जैसी आसान हरकतें करने के लिए मना लेते हैं। साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सरकार ने कुछ सुरक्षा उपाय भी साझा किए हैं। सरकार ने फिनटेक कंपनियों समेत फाइनेंशियल संस्थानों को डीपफेक का पता लगाने वाले सिस्टम को मजबूत करने और कस्टमर ऑनबोर्डिंग सिस्टम को बेहतर बनाने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे अपने बायोमेट्रिक डेटा को सुरक्षित रखें, संदिग्ध लॉगिन कोशिशों के प्रति सतर्क रहें और फाइनेंशियल गतिविधियों से जुड़े ईमेल या एसएमएस नोटिफिकेशन पर नियमित रूप से नजर रखें। नागरिकों को यह भी सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट तुरंत नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए करें।

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डीपफेक वीडियो और नकली पहचान से हो सकती है बड़ी ठगी

 केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की जनता के लिए साइबर फ्रॉड को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के मुताबिक, साइबर अपराधी एआई का इस्तेमाल करके असली लगने वाले डीपफेक वीडियो और नकली पहचान (सिंथेटिक आइडेंटिटी) बना बनाकर धोखाधड़ी कर सकते हैं। एडवाइजरी में कहा गया है कि साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके सिक्योरिटी सिस्टम को बायपास कर सकते हैं और फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं। सरकार ने एडवाइजरी में साइबर अपराधियों के काम करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी है। एडवाइजरी में कहा गया है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल फेशियल ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-केवाईसी, अकाउंट रिकवरी और फाइनेंशियल व डिजिटल सेवाओं तक अनधिकृत पहुंच (बिना इजाजत एक्सेस) पाने के लिए किया जा सकता है। एडवाइजरी में बताया गया है कि धोखाधड़ी करने वाले आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जॉब पोर्टल, डेटिंग प्लेटफॉर्म या फोन कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे पीडि़तों का फेशियल डेटा इक_ा करते हैं, जिसके लिए वे कभी-कभी उन्हें कैमरे के सामने पलक झपकाने, सिर घुमाने या बोलने जैसी आसान हरकतें करने के लिए मना लेते हैं। साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सरकार ने कुछ सुरक्षा उपाय भी साझा किए हैं। सरकार ने फिनटेक कंपनियों समेत फाइनेंशियल संस्थानों को डीपफेक का पता लगाने वाले सिस्टम को मजबूत करने और कस्टमर ऑनबोर्डिंग सिस्टम को बेहतर बनाने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे अपने बायोमेट्रिक डेटा को सुरक्षित रखें, संदिग्ध लॉगिन कोशिशों के प्रति सतर्क रहें और फाइनेंशियल गतिविधियों से जुड़े ईमेल या एसएमएस नोटिफिकेशन पर नियमित रूप से नजर रखें। नागरिकों को यह भी सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट तुरंत नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए करें।


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