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12-06-2026

वर्कप्लेस को फ्लैक्सीबिलिटी के साथ डिजाइन करने का समय आया

  •  भारत में वेतन पाने वाले कुल श्रमबल की भागीदारी को वर्तमान के 47 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना होगा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए श्रमबल में महिलाओं को बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण होगा। एक्सिस बैंक के एक अध्ययन में यह बात कही गई है। अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में जी-20 अर्थव्यवस्थाओं में वेतन पाने वालों के मामले में भारत में महिला श्रमबल की भागीदारी दर सबसे कम है। यहां तक कि जो महिलाएं कामकाजी हैं, वे भी ज्यादातर कृषि, स्वरोजगार या बिना वेतन वाले कार्यों में लगी हुई हैं। ‘द मिसिंग हाफ- वीमेन एंड इंडियाज ग्रोथ चैलेंज’ शीर्षक वाला यह अध्ययन 42 भारतीय शहरों की लगभग 11,000 शिक्षित महिलाओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें खुलासा हुआ है कि 12.5 करोड़ शिक्षित महिलाएं श्रमबल से बाहर हैं और 60 प्रतिशत स्नातक महिलाओं ने वेतन वाले कार्य से बाहर रहने का विकल्प चुना है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 61 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सुरक्षा और आवागमन को श्रमबल में प्रवेश करने के लिए सबसे बड़ी बाधा बताया है। इसमें कहा गया है कि अगले 25 वर्षों तक लगभग सात प्रतिशत की वृद्धि दर बनाए रखने के लिए जो विकसित भारत के लिए आवश्यक है, कुल कामगार भागीदारी को लगभग 47 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 60 प्रतिशत करना होगा और इसमें महिलाओं की भागीदारी निर्णायक होगी। एक्सिस बैंक की समूह कार्यकारी और मानव संसाधन प्रमुख ने कहा कि विकास का अगला दशक उन संगठनों का होगा जो कॅरियर को लचीलेपन के साथ डिजाइन करेंगे, जिससे महिलाओं को बिना किसी नुकसान के काम में दोबारा लौटने की सुविधा मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में 22 प्रतिशत की वृद्धि करना केवल एक सामाजिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह हमारे पास मौजूद सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक जरिया है। अध्ययन के मुताबिक, भारत में महिलाओं को अब भी शादी और मां बनने की वजह से कॅरियर में कीमत चुकानी पड़ती है और कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिला श्रमबल की भागीदारी बढ़ाने के लिए कामकाज के तौर-तरीकों में बदलाव, बच्चों की देखभाल के लिए मदद और काम से हुई दूरी के बाद दोबारा वापसी के रास्तों को आसान बनाना जरूरी है। कामकाज की मुख्यधारा से दूर रह गई महिलाओं को श्रमबल में लाने के लिए हमें श्रम की मांग बढ़ानी होगी, शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा, पुराने कानूनी अवरोधों को हटाना होगा और बच्चों की देखभाल की सुविधाओं एवं कार्यस्थल में लचीलेपन पर काम करना होगा।

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वर्कप्लेस को फ्लैक्सीबिलिटी के साथ डिजाइन करने का समय आया

 भारत में वेतन पाने वाले कुल श्रमबल की भागीदारी को वर्तमान के 47 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना होगा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए श्रमबल में महिलाओं को बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण होगा। एक्सिस बैंक के एक अध्ययन में यह बात कही गई है। अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में जी-20 अर्थव्यवस्थाओं में वेतन पाने वालों के मामले में भारत में महिला श्रमबल की भागीदारी दर सबसे कम है। यहां तक कि जो महिलाएं कामकाजी हैं, वे भी ज्यादातर कृषि, स्वरोजगार या बिना वेतन वाले कार्यों में लगी हुई हैं। ‘द मिसिंग हाफ- वीमेन एंड इंडियाज ग्रोथ चैलेंज’ शीर्षक वाला यह अध्ययन 42 भारतीय शहरों की लगभग 11,000 शिक्षित महिलाओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें खुलासा हुआ है कि 12.5 करोड़ शिक्षित महिलाएं श्रमबल से बाहर हैं और 60 प्रतिशत स्नातक महिलाओं ने वेतन वाले कार्य से बाहर रहने का विकल्प चुना है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 61 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सुरक्षा और आवागमन को श्रमबल में प्रवेश करने के लिए सबसे बड़ी बाधा बताया है। इसमें कहा गया है कि अगले 25 वर्षों तक लगभग सात प्रतिशत की वृद्धि दर बनाए रखने के लिए जो विकसित भारत के लिए आवश्यक है, कुल कामगार भागीदारी को लगभग 47 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 60 प्रतिशत करना होगा और इसमें महिलाओं की भागीदारी निर्णायक होगी। एक्सिस बैंक की समूह कार्यकारी और मानव संसाधन प्रमुख ने कहा कि विकास का अगला दशक उन संगठनों का होगा जो कॅरियर को लचीलेपन के साथ डिजाइन करेंगे, जिससे महिलाओं को बिना किसी नुकसान के काम में दोबारा लौटने की सुविधा मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में 22 प्रतिशत की वृद्धि करना केवल एक सामाजिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह हमारे पास मौजूद सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक जरिया है। अध्ययन के मुताबिक, भारत में महिलाओं को अब भी शादी और मां बनने की वजह से कॅरियर में कीमत चुकानी पड़ती है और कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिला श्रमबल की भागीदारी बढ़ाने के लिए कामकाज के तौर-तरीकों में बदलाव, बच्चों की देखभाल के लिए मदद और काम से हुई दूरी के बाद दोबारा वापसी के रास्तों को आसान बनाना जरूरी है। कामकाज की मुख्यधारा से दूर रह गई महिलाओं को श्रमबल में लाने के लिए हमें श्रम की मांग बढ़ानी होगी, शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा, पुराने कानूनी अवरोधों को हटाना होगा और बच्चों की देखभाल की सुविधाओं एवं कार्यस्थल में लचीलेपन पर काम करना होगा।


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