पीवी में ईवी के ऑटोपायलट पर आने के बाद रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी फ्लेक्सफ्यूल वेहीकल्स पर दांव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में 100 परसेंट एथेनॉल फ्यूल (ई100) को मंजूरी दे दी है। नागपुर में शुगर, एथेनॉल एंड बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस के मौके पर गडकरी ने कहा कि 100 परसेंट एथेनॉल के इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी मिलने से ऑटो कंपनियों, पेट्रोल पंप ऑपरेटर और टेस्ट एजेंसियों को ई100 कंपैटिबल (अनुकूल) वेहीकल्स के डवलपमेंट और सेल्स का क्लीयर रोडमैप मिल जाएगा। गडकरी के अनुसार, 12 ऑटो कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल तैयार कर रही हैं। इनमें टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ह्यूंदे, टोयोटा, मारुति सुजुकी और एमजी मोटर जैसी कंपनियां शामिल हैं। आने वाले लगभग छह सप्ताह में इन कंपनियों की ओर से नए मॉडल की घोषणाएं होने की उम्मीद है। मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल (ई100) लॉन्च की है। दूसरी ओर हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किए हैं। ई100 में 100 परसेंट एथेनॉल नहीं होता। इसमें सामान्यत: 93-95 परसेंट निर्जल (एनहाइड्रस) एथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल तथा कुछ एडिटिव्स होते हैं, जो ठंडे मौसम में इंजन स्टार्ट और फ्यूल की स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं। ई20 में 20 परसेंट एथेनॉल और 80 परसेंट पेट्रोल होता है, जबकि ई85 में लगभग 85 परसेंट एथेनॉल होता है। हालांकि हर पेट्रोल वाहन ई100 पर नहीं चल सकता। केवल वही वाहन ई100 इस्तेमाल कर सकते हैं जिन्हें विशेष रूप से ई100 प्रमाणित किया गया हो। पुरानी पेट्रोल या ई20 कारों में सीधे ई100 डालने से इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान हो सकता है। ई100 कंपैटिबल वाहनों में एथेनॉल प्रतिरोधी (रेसिस्टेंट) फ्यूल पाइप और सील, इंजन ट्यूनिंग नए सिरे से करना, ज्यादा फ्यूल फ्लो कैपेसिटी और नया इंजन कंट्रोल सॉफ्टवेयर जैसे बदलाव किए जाते हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वेहीकल टेंक में मौजूद एथेनॉल की मात्रा को सेंसर से पहचान लेते हैं और उसी के अनुसार इंजन की टाइमिंग तथा फ्यूल इंजेक्शन को बदल देते हैं। इसलिए ऐसे वाहन ई20 से लेकर ई100 तक अलग-अलग मिश्रणों पर चल सकते हैं। लेकिन एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है, इसलिए ई100 का मायलेज पेट्रोल वेहीकल्स के मुकाबले कम हो सकता है। ई100 फ्यूल की प्राइस करीब 80 रुपये लीटर है। भले ही यह पेट्रोल के मुकाबले करीब 30 परसेंट सस्ता है लेकिन ई100 गाड़ी का मायलेज पेट्रोल से कम होता है। विशेष रूप से डिजाइन किए गए एथेनॉल इंजन ज्यादा कंप्रेशन रेशियो के जरिए मायलेज के इस घाटे को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। सरकार के अनुसार 2014-15 से जुलाई 2025 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये के बराबर डॉलर की बचत हुई है और लगभग 245 लाख टन क्रूड ऑइल कम इंपोर्ट करना पड़ा है। गन्ने से बने एथेनॉल से पेट्रोल की तुलना में लाइफ-साइकल एमिशन (गाड़ी के पूरे जीवन में होने वाले एमिशन) लगभग 65 परसेंट तक कम हो सकता है, जबकि मक्का से बने एथेनॉल का एमिशन लगभग 50 परसेंट तक कम हो सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, नए बिकने वाले 50 परसेंट टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर फ्लेक्सफ्यूल वाले हों तो लगभग 311.8 करोड़ लीटर एक्स्ट्रा एथेनॉल की डिमांड जेनरेट हो सकती है और किसानों की आय करीब 12,403 करोड़ बढ़ सकती है। सरकार का प्लान दिसंबर 2026 तक लगभग 500 ई100 डिस्पेंसिंग स्टेशन और 2027 के अंत तक लगभग 5 हजार स्टेशन बनाने की है।