भारत के ईवी मार्केट में समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं। हाईग्रोथ मार्केट में टाटा और महिन्द्रा ने ब्लडबाथ (मारकाट) मचा दी है जिसकी चपेट में जेएसडब्ल्यू एमजी आ गई लगती है। जेएसडब्ल्यू एमजी की विंडसर को अर्ली लीड (शुरुआती बढ़त) मिलने से टाटा के ईवी वॉल्यूम पर प्रेशर बढ़ गया था लेकिन अब टाटा और महिंद्रा दोनों ने अपनी ग्रिप (मजबूत) कर ली है। वाहन पोर्टल के डेटा के अनुसार, टाटा मोटर्स ने मई 2026 में ईवी पीवी मार्केट में शेयर बढ़ाकर 39.9 परसेंट कर लिया। एक साल पहले यह 34.5 परसेंट ही रह गया था। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा का मार्केट शेयर इस दौरान 21.4 परसेंट से बढक़र 24.0 परसेंट हो गया। विंडसर को मिले शुरुआती रेस्पॉन्स के दम पर एमजी ने टाटा के ईवी मार्केट शेयर में गहरी सेंध लगाई थी और मार्केट शेयर 31.2 परसेंट तक पहुंच गया था। लेकिन विंडसर फ्रेंजी (दीवानगी) फि•ाल आउट (बुलबुला फटना) होने के कारण यह घटकर 19.3 परसेंट रह गया। हालांकि, मार्केट शेयर गिरने के बावजूद एमजी की ईवी सेल्स बढ़ रही है। मई में कंपनी ने 4,985 ईवी बेचे, जबकि पिछले साल मई में यह आंकड़ा 4,593 यूनिट था। चूंकि ईवी मार्केट हाई ग्रोथ की हवा पर सवार है इसलिए एमजी पीछे छूटती दिख रही है। मई में कुल ईवी रजिस्ट्रेशन 79 परसेंट बढक़र 26,373 यूनिट हो गया, जो एक साल पहले 14,699 यूनिट था। टाटा मोटर्स ईवी सेगमेंट में अपनी लीडरशिप पोजिशन को लगातार पांच वर्ष से बनाए रखने में कामयाब रही है। मई में कंपनी के ईवी रजिस्ट्रेशन दोगुने से ज्यादा बढक़र 10,339 यूनिट हो गए, जबकि एक साल पहले यह 5,073 यूनिट थे। वहीं महिंद्रा की ईवी सेल्स 3,148 यूनिट से बढक़र 6210 यूनिट हो गई। इस तरह महिंद्रा एमजी को पीछे छोड़ते हुए ईवीपीवी मार्केट में दूसरे पायदान पर पहुंच गई। इंडस्ट्री एनेलिस्ट्स के अनुसार टाटा की लीडरशिप का कारण उसका ईवी पोर्टफोलियो है। कंपनी के पास अलग-अलग प्राइस और सेगमेंट में टियागो ईवी, पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी, कर्व ईवी और हैरियर ईवी हैं। महिंद्रा की बढ़त उसके न्यूजेन इलेक्ट्रिक एसयूवी मॉडल जैसे एक्सईवी 9ई और बीई 6 के चलते है। वहीं एमजी का पोर्टफोलियो बहुत सीमित और अपेक्षाकृत पुराना है। कंपनी की ज्यादातर ईवी सेल्स विंडसर पर निर्भर है।
एसएंडपी ग्लोबल मोबिलिटी के एसोसिएट डायरेक्टर गौरव वांगाल के अनुसार, टाटा और महिंद्रा ने नए मॉडलों के दम पर लगातार ईवी पोर्टफोलियो का विस्तार किया। जिससे ये देसी दिग्गज नए कस्टमर कैचमेंट तक पहुंचने में कामयाब रहीं। इनकी ईवी को मेनस्ट्रीम करने की इसी कोशिश के चलते ईवी का सेल्स वॉल्यूम बढ़ रहा है और बायर में ईवी को लेकर इतनी हिचकिचाहट नहीं रही। एमजी विंडसर ईवी की परफॉर्मेन्स अच्छी रही है लेकिन मल्टी-सेगमेंट मॉडल लाइनअप की कमी के कारण एमजी ईवी की हाईग्रोथ का फायदा नहीं उठा पा रही है। मारुति सुजुकी और विनफास्ट जैसे नए खिलाडिय़ों की एंट्री ने भी मार्केट में नई ऊर्जा पैदा की है। 2026 के पहले पांच महीनों के आंकड़ों में भी यही ट्रेंड दिखाई देता है। जनवरी से मई 2026 के दौरान टाटा ने 38.3 परसेंट मार्केट शेयर के साथ लीडरशिप कायम रखी, जो पिछले साल 34.5 परसेंट थी। इस दौरान कंपनी ने 26,098 से बढक़र 44,579 ईवी बेचे। महिंद्रा की हिस्सेदारी 15.2 परसेंट से बढक़र 22 परसेंट हो गई। इन पांच महीनों में कंपनी ने 10,278 यूनिट्स के मुकाबले 25,633 ईवी बेचे। वहीं एमजी का मार्केट शेयर 32.8 परसेंट से घटकर 21.9 परसेंट रह गई, हालांकि उसकी सेल्स 22,158 यूनिट से बढक़र 25,485 यूनिट हो गई। ह्यूंदे का ईवी सेल्स मई में 719 यूनिट से घटकर 460 यूनिट रह गए और मार्केट शेयर केवल 1.8 परसेंट रह गया। बीवाईडी की सेल्स 621 से 686 यूनिट्स हो गई लेकिन मार्केट शेयर घटकर 2.7 परसेंट रह गया। मारुति ने मई में 1,580 ईवी के साथ 6 परसेंट मार्केट शेयर हासिल किया है। विनफास्ट ने भी 1,238 यूनिट बेचीं और 4.8 परसेंट बाजार हिस्सेदारी हासिल की।
