शांति समझौते से क्रूड ऑइल में आई गिरावट आरबीआई के हाथ मजबूत हो सकते हैं। सोमवार को रुपया करीब 0.7 परसेंट मजबूत होकर 94.4625 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह सात सप्ताह का सबसे मजबूत स्तर था। स्ट्रेट ऑफ होरमुज खुलने से क्रूड ऑइल की कीमतों में तेज गिरावट आई, जिससे रुपये को फायदा मिला। एनेलिस्ट्स का कहना है कि कम तेल कीमतों से भारत के इंपोर्ट बिल और चालू खाता घाटे (करंट अकाउंट) पर दबाव कम होगा। इसके साथ ही आरबीआई द्वारा डॉलर प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का भी अब ज्यादा असर दिखाई देगा। सोमवार को एशियाई करेंसी में रुपये का प्रदर्शन दूसरा सबसे अच्छा रहा। इससे बेहतर प्रदर्शन केवल इंडोनेशियाई रुपिया ने किया। साल की शुरुआत से रुपये की गिरावट अब घटकर करीब 5.6 परसेंट रह गई है। रुपया अब लगभग एक महीने पहले दर्ज किए गए अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 97 रुपये प्रति डॉलर से करीब 2.5 परसेंट ऊपर है। आईडीएफसी फस्र्ट बैंक की इकोनॉमिस्ट गौरा सेन गुप्ता के अनुसार आरबीआई के हाल में उठाए गए कदमों से भारत के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) पर दबाव कम करने में मदद मिली है। तेल कीमतों में गिरावट इन प्रयासों को और मजबूती दे रही है। सितंबर तक रुपया 93-94 प्रति डॉलर के स्तर तक मजबूत हो सकता है। इसमें एनआरआई से डॉलर डिपॉजिट्स आकर्षित करने वाली आरबीआई योजना से आने वाले डॉलर इनफ्लो की अहम भूमिका होगी। पहले जहां 70 बिलियन डॉलर के करंट अकाउंट डेफिसिट का आंकलन था वहीं अब एनेलिस्ट सरप्लस की उम्मीद कर रहे हैं। सिंगापुर की एस क्यूब कैपिटल के फाउंडर एंड सीआईओ हेमंत मिश्रा के अनुसार सितंबर तक रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 30 बिलियन डॉलर निकाले हैं। मिश्रा के अनुसार, अब ये निवेश वापस आ सकता है।