28 फरवरी को ईरान-अमेरिका और इजराइल में शुरू हुई जंग ग्लोबल बिजनस इकोसिस्टम की चूल हिलाने के बाद शांत होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका और ईरान ने पीस डील की घोषणा कर दी है जिस पर शुक्रवार को स्विटजरलैंड में हस्ताक्षर होंगे। लेकिन दुनियाभर के एनेलिस्ट इस पीस डील के ज्यादा दिन टिक पाने को लेकर भरोसे में नहीं है क्योंकि जंग ट्रिगर होने का सबसे बड़ा कारण इजराइल इस शांति समझौते में शामिल नहीं है और अपनी नाराजगी जता रहा है। यानी वेस्ट-एशिया (खाड़ी के देश) की शांति और स्ट्रेट ऑफ होरमुज से आवाजाही को समान्य करने वाला यह शांति समझौता बहुत फ्रेजाइल यानी क्षण-भंगुर है। जंग खत्म करने और होरमुज शिपिंग चैनल खोलने पर समझौता हो जाने से ऑइल प्राइस में तेज करेक्शन आया। 15 जून को सायं 5.30 बजे ब्रेंट क्रूड 80.33 डॉलर के लेवल पर था। एनेलिस्ट्स के अनुसार यदि यह शांति डील का फ्रेमवर्क है तो भी बड़ा ब्रेकथ्रू (कामयाबी) है। हजारों लोग मारे जा चुके हैं, अरबों (बिलियन्स) डॉलर का नुकसान हो चुका है और एनर्जी क्राइसिस अलग से। ग्लोबल इकोनॉमी को अमूमन 500-700 बिलियन डॉलर का डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नुकसान झेलना पड़ा है।अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर शाम ट्रुथ सोशल पर ...""The Deal with the Islamic Republic of Iran is now complete,".. पर इसकी घोषणा की। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर ने कहा है कि 60 दिन के सीजफायर के दौरान समझौते पर विस्तृत बातचीत होगी। वहीं इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर इजराइल कात्ज के बयान से इस पीस डील के बहुत कमजोर होने के संकेत मिल रहे हैं। कात्ज के अनुसार इजराइल के फोर्सेस लेबनान, सीरिया और गाजा से नहीं हटाई जाएंगी और ट्रंप को भी यह फैसला बता दिया गया है। यदि लेबनान पर इजराइल के अटैक के चलते ईरान इजराइल पर अटैक करता है तो हम भयंकर जबाव देंगे। ट्रंप ने कहा है कि होरमुज शिपिंग चैनल शुक्रवार को खुल जाएगा और ईरान के बंदरगाहों के ब्लॉकेड (नाकाबंदी) अमेरिका खत्म कर देगा। सेंटर फोर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के जोन ऑल्टरमैन के अनुसार ईरान ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिबंधों के कारण बहुत कमजोर पड़ जाने के बावजूद वह जब चाहे स्ट्रेट ऑफ होरमुज को ब्लॉक कर ग्लोबल इकोनॉमी को घुटनों पर ला सकता है।