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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

25-05-2026

एफडीआई ऐसे बन रहा इंडिया के लिए पहेली

  •  94.5 बिलियन डॉलर...ग्रॉस एफडीआई रहा वित्त वर्ष 26 में। लेकिन डीपडाइव करते हैं तो (गहराई से छानबीन करना) नेट एफडीआई केवल 7.6 बिलियन डॉलर ही रह गया।  हालांकि आरबीआई की मानें तो यह भारत में एफडीआई इनफ्लो का ऑलटाइम रिकॉर्ड है। अभी महीने की शुरुआत में चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अनंत नागेश्वरन ने कहा कि एफडीआई इस बात का संकेत है कि इंवेस्टर्स का भारत पर भरोसा बना हुआ है।

    क्या है पहेली : लेकिन रिकॉर्ड इनफ्लो के साथ ही रिकॉर्ड आउटफ्लो रहा।  वित्त वर्ष 26 में नेट एफडीआई 7.6 बिलियन डॉलर रहा जो ग्रॉस एफडीआई इनफ्लो का केवल 8 परसेंट है। वित्त वर्ष 25 में भारत का नेट एफडीआई 1 बिलियन डॉलर से भी कम रहा था। अब सवाल है कि जब आए 94.5 बिलियन डॉलर को रुके केवल 7.6 बिलियन डॉलर ही क्यों। एफडीआई के इस डेटा की बखिया उधेडऩे पर पता चलता है कि (टेबल 1) 53.6 बिलियन डॉलर तो इंवेस्टर अपनी हिस्सेदारी बेचकर या कंपनियां प्रोफिट बाहर ले गए। इसी तरह वेंचर फंड या पीई भी इंवेस्टमेंट से एक्जिट कर पैसा बाहर ले जाते हैं। आईपीओ के जरिए फॉरेन इंवेस्टर अपनी हिस्सेदारी को मॉनीटाइज कर लेते हैं। कंपनियां अपनी कैपिटल घटाती हैं। इस तरह अब बचा 40.9 बिलियन डॉलर। पिछले वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों ने 33.3 बिलियन डॉलर विदेशों में इंवेस्ट किए। यानी बचा केवल (नेट एफडीआई) 7.6 बिलियन डॉलर। सवाल यह है कि फॉरेन इंवेस्टर्स भारत से प्रोफिट को बाहर क्यों ले रहे हैं और इंवेस्टमेंट से एक्जिट क्यों कर रहे हैं। बड़ी बात है कि वित्त वर्ष 21 (टेबल 2) के बाद से ही नेट एफडीआई में बहुत तेज गिरावट आ रही है। वित्त वर्ष 21 में नेट एफडीआई जहां 69.3 बिलियन डॉलर था जो लगातार घटते हुए वित्त वर्ष 26 में केवल 7.6 बिलियन डॉलर रह गया। वित्त वर्ष 23 में नेट एफडीआई 39 परसेंट था जो वित्त वर्ष 24 में 15 परसेंट रह गया। वित्त वर्ष 26 में तो यह कुल एफडीआई इनफ्लो का केवल 8 परसेंट रह गया। क्योंकि पिछले कुछ वर्ष में पीई इंवेस्टर्स के साथ ही ह्यूंदे और एलजी जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों ने इंडियन सब्सिडियरी में अपना इंवेस्टमेंट बेचकर पैसा देश से बाहर निकाला था। आप जानते हैं पिछले दो वर्ष में स्टार्टअप्स में आईपीओ की बाढ़ आई है और इनमें से पीई इंवेस्टर्स ने अपना पैसा निकाला है। प्राइवेट इक्विटी इंवेस्टर्स के साथ-साथ ह्यूंदे और एलजी जैसी कंपनियों ने इंडियन सब्सिडियरी में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी का एक हिस्सा देश से बाहर निकाला। दूसरी ओर बड़ी बात यह भी है कि इंडिया इंक अब विदेशों में इंवेस्टमेंट बढ़ा रही है। पिछले वित्त वर्ष में भारत से एफडीआई आउटफ्लो 18 परसेंट बढक़र 33.3 बिलियन डॉलर रहा। इसका सीधा अर्थ है कि इंडिया इंक ग्लोबल वेल्यू चेन से जुडऩे के लिए फॉरेन में इंवेस्टमेंट बढ़ा रही है। लेकिन एनेलिस्ट्स का मानना है कि भारत में एआई इंवेस्टमेंट के मौके नहीं होने के कारण फॉरेन इंवेस्टर्स भारत से पैसा निकालकर दूसरे देशों में लगा रहे हैं। हालांकि भारत सरकार ने डेटा सेंटर पर बड़ा दांव लगाया है और गूगल, अमेजन व माइक्रोसॉफ्ट अब तक डेटा सेंटर पर 70 बिलियन डॉलर के इंवेस्टमेंट का वायदा कर चुके हैं। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू हो गया है। वहीं फॉक्सकॉन, विनफास्ट और शेल जैसी कंपनियां भी करीब 65 बिलिनय डॉलर के इंवेस्टमेंट प्लान पर काम कर रही हैं। जापान के मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप ने श्रीराम फाइनेंस में 4 बिलियन डॉलर का इंवेस्टमेंट किया है वहीं सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन ने यस बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदा है। भारत ने हाल ही इंश्योरेंस सैक्टर में 100 परसेंट एफडीआई को भी मंजूरी दी है।

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एफडीआई ऐसे बन रहा इंडिया के लिए पहेली

 94.5 बिलियन डॉलर...ग्रॉस एफडीआई रहा वित्त वर्ष 26 में। लेकिन डीपडाइव करते हैं तो (गहराई से छानबीन करना) नेट एफडीआई केवल 7.6 बिलियन डॉलर ही रह गया।  हालांकि आरबीआई की मानें तो यह भारत में एफडीआई इनफ्लो का ऑलटाइम रिकॉर्ड है। अभी महीने की शुरुआत में चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अनंत नागेश्वरन ने कहा कि एफडीआई इस बात का संकेत है कि इंवेस्टर्स का भारत पर भरोसा बना हुआ है।

क्या है पहेली : लेकिन रिकॉर्ड इनफ्लो के साथ ही रिकॉर्ड आउटफ्लो रहा।  वित्त वर्ष 26 में नेट एफडीआई 7.6 बिलियन डॉलर रहा जो ग्रॉस एफडीआई इनफ्लो का केवल 8 परसेंट है। वित्त वर्ष 25 में भारत का नेट एफडीआई 1 बिलियन डॉलर से भी कम रहा था। अब सवाल है कि जब आए 94.5 बिलियन डॉलर को रुके केवल 7.6 बिलियन डॉलर ही क्यों। एफडीआई के इस डेटा की बखिया उधेडऩे पर पता चलता है कि (टेबल 1) 53.6 बिलियन डॉलर तो इंवेस्टर अपनी हिस्सेदारी बेचकर या कंपनियां प्रोफिट बाहर ले गए। इसी तरह वेंचर फंड या पीई भी इंवेस्टमेंट से एक्जिट कर पैसा बाहर ले जाते हैं। आईपीओ के जरिए फॉरेन इंवेस्टर अपनी हिस्सेदारी को मॉनीटाइज कर लेते हैं। कंपनियां अपनी कैपिटल घटाती हैं। इस तरह अब बचा 40.9 बिलियन डॉलर। पिछले वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों ने 33.3 बिलियन डॉलर विदेशों में इंवेस्ट किए। यानी बचा केवल (नेट एफडीआई) 7.6 बिलियन डॉलर। सवाल यह है कि फॉरेन इंवेस्टर्स भारत से प्रोफिट को बाहर क्यों ले रहे हैं और इंवेस्टमेंट से एक्जिट क्यों कर रहे हैं। बड़ी बात है कि वित्त वर्ष 21 (टेबल 2) के बाद से ही नेट एफडीआई में बहुत तेज गिरावट आ रही है। वित्त वर्ष 21 में नेट एफडीआई जहां 69.3 बिलियन डॉलर था जो लगातार घटते हुए वित्त वर्ष 26 में केवल 7.6 बिलियन डॉलर रह गया। वित्त वर्ष 23 में नेट एफडीआई 39 परसेंट था जो वित्त वर्ष 24 में 15 परसेंट रह गया। वित्त वर्ष 26 में तो यह कुल एफडीआई इनफ्लो का केवल 8 परसेंट रह गया। क्योंकि पिछले कुछ वर्ष में पीई इंवेस्टर्स के साथ ही ह्यूंदे और एलजी जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों ने इंडियन सब्सिडियरी में अपना इंवेस्टमेंट बेचकर पैसा देश से बाहर निकाला था। आप जानते हैं पिछले दो वर्ष में स्टार्टअप्स में आईपीओ की बाढ़ आई है और इनमें से पीई इंवेस्टर्स ने अपना पैसा निकाला है। प्राइवेट इक्विटी इंवेस्टर्स के साथ-साथ ह्यूंदे और एलजी जैसी कंपनियों ने इंडियन सब्सिडियरी में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी का एक हिस्सा देश से बाहर निकाला। दूसरी ओर बड़ी बात यह भी है कि इंडिया इंक अब विदेशों में इंवेस्टमेंट बढ़ा रही है। पिछले वित्त वर्ष में भारत से एफडीआई आउटफ्लो 18 परसेंट बढक़र 33.3 बिलियन डॉलर रहा। इसका सीधा अर्थ है कि इंडिया इंक ग्लोबल वेल्यू चेन से जुडऩे के लिए फॉरेन में इंवेस्टमेंट बढ़ा रही है। लेकिन एनेलिस्ट्स का मानना है कि भारत में एआई इंवेस्टमेंट के मौके नहीं होने के कारण फॉरेन इंवेस्टर्स भारत से पैसा निकालकर दूसरे देशों में लगा रहे हैं। हालांकि भारत सरकार ने डेटा सेंटर पर बड़ा दांव लगाया है और गूगल, अमेजन व माइक्रोसॉफ्ट अब तक डेटा सेंटर पर 70 बिलियन डॉलर के इंवेस्टमेंट का वायदा कर चुके हैं। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू हो गया है। वहीं फॉक्सकॉन, विनफास्ट और शेल जैसी कंपनियां भी करीब 65 बिलिनय डॉलर के इंवेस्टमेंट प्लान पर काम कर रही हैं। जापान के मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप ने श्रीराम फाइनेंस में 4 बिलियन डॉलर का इंवेस्टमेंट किया है वहीं सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन ने यस बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदा है। भारत ने हाल ही इंश्योरेंस सैक्टर में 100 परसेंट एफडीआई को भी मंजूरी दी है।


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