ईरान वॉर के कारण पैदा हुए हालात के बीच सरकार ने लोगों को गोल्ड खरीदने और फॉरेन ट्रेवल से परहेज करने को कहा है। इससे डॉलर की बचत होगी, चालू खाते का घाटा कम होगा और रुपये पर दबाव कम होगा। लेकिन देश में कई लोग ऐसे भी हैं जो बैंकों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स के जरिए भारत से पैसा विदेश भेजने में लगे हैं। कई मामलों में यह देखने में आया है कि भारत से फंड थाईलैंड में बैठे लोगों को भेजा गया है जो मनी लॉड्रिंग का हब बनकर उभरा है। इनकम टैक्स विभाग के हवाले से छपी एक रिपोर्ट के अनुसार थाईलैंड के साथ एग्रीमेंट के तहत मिली जानकारी के मुताबिक थाईलैंड पैसे भेजने के लिए पर्पज कोड एस0305 का इस्तेमाल करके बैंकों और मनी ट्रांसफर ऑपरेटर्स को गुमराह किया जा रहा है। यह कोड ओवरसीज एजुकेशन के लिए है। लेकिन इसका इस्तेमाल कर भारत से थाईलैंड पैसा भेजा जा रहा है। कई मामलों में लोगों ने दर्जनों फर्जी पैन का इस्तेमाल किया है। इनमें नाम एक ही है लेकिन जन्मतिथि अलग-अलग है। इन फर्जी पैन कार्ड का इस्तेमाल करके आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत पैसा विदेश भेजा गया। इस योजना के तहत एक साल में 2.50 लाख डॉलर से ज्यादा पैसा विदेश नहीं भेजा जा सकता है। गलत कोड और गलत पैन कार्ड के इस्तेमाल से एलआरएस की लिमिट को बाइपास कर और मनी ट्रेल को छिपाने की बात सामने आई है। एक टैक्स अधिकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने 47 पैन कार्ड का जबकि एक अन्य मामले में 27 पैन कार्ड इस्तेमाल किए गए। कई ट्रांजैक्शंस में कई ऐसे यूपीआई आईडी सामने आए हैं जो माल्टा और साइप्रस जैसे देशों से गेमिंग वेबसाइट्स से जुड़े हैं। टैक्स कन्सल्टेंट्स के अनुसार एलआरएस के तहत पैसा भेजने के लिए फॉर्म ए2 अनिवार्य है। अगर आप एजुकेशन के लिए पैसा भेज रहे हैं तो इसके लिए एडमिशन लेटर और कॉलेज इनवॉइस की जरूरत होती है। इंडियन्स के लिए थाईलैंड हायर स्टडी का सेंटर नहीं है। कोविड और क्रिप्टो के खिलाफ चीन की कार्रवाई के बाद चीन के कई क्रिप्टो ट्रेडर थाइलैंड चले आए हैं। थाईलैंड और कंबोडिया सीमा पर क्रिप्टो घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए हैं। राजस्थान के कई शहरों से साइबर क्राइम ओर क्रिप्टो सेल के जरिए की गई कमाई को थाईलैंड भेजने के मामले सामने आए हैं।