स्वतंत्रता के बाद के 250 साल के इतिहास में अमेरिका को प्रवासियों ने बसाया। दुनियाभर से साइंटिस्ट, इकोनॉमिस्ट, आर्टिस्ट अमेरिका बसे और अमेरिका को मॉडर्न वल्र्ड में फस्र्ट डवलप्ड नेशन बनाने में योगदान दिया। लेकिन लैंड ऑफ माइग्रेंट्स (आकर बसने वाले या आप्रवासी) और लैंड ऑफ अपॉचुर्निटी वाले अमेरिका में अब वो चुंबक नहीं रहा और रिवर्स माइग्रेशन यानी देश छोडऩे वाले अमेरिकियों के नाम पर जाना जाने लगा है। पिछले वर्ष जितने लोग अमेरिका आकर बसे उससे ज्यादा ने अमेरिकी पासपोर्ट सरेंडर कर दिया। इस तरह ग्रेट डिप्रेशन (1929 से 1939) के बाद 2025 पहला साल रहा जब अमेरिका में निगेटिव माइग्रेशन दर्ज किया गया। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने इस पलायन—यानी नकारात्मक नेट माइग्रेशन—को अपनी पॉलिसी की जीत बताया। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन वी•ाा पर तो लगाम लगा ही रहा हैं, डिपोर्ट (निर्वासित) भी कर रहा है। ट्रंप की पॉलिसी तो अपनी जगह है लेकिन अमेरिकी नागरिक रिकॉर्ड संख्या में देश छोड़ रहे हैं और अपने परिवारों के साथ सस्ते और सुरक्षित देशों में बस रहे हैं। 50 से अधिक देशों के रेजिडेंस परमिट, विदेशों में घरों की खरीद, स्कूल एडमिशन और अन्य डेटा से पता चलता है कि अमेरिकी रिकॉर्ड लेवल पर ...वोटिंग विद देयर फीट...यानी देश छोडक़र एक तरह से अमेरिकी सिस्टम को लेकर अपनी नापसंद जता रहे हैं। लाखों-लाख अमेरिकी स्टुडेंट्स विदेशों में पढ़ाई कर रहे है, लाखों अमेरिकी दूसरे देशों में काम कर रहे हंै या फिर दूसरे देशों में सुकून से रिटायर्ड लाइफ जी रहे हैं। अमेरिकन ड्रीम की कहानी आपने सुनी होगी लेकिन अब कुछ अमेरिकियों के लिए नया अमेरिकन ड्रीम अब अमेरिका को अलविदा कहना है। पुर्तगाल की कैपिटल लिस्बन में इतने अमेरिकी अपार्टमेंट खरीद रहे हैं कि लोग शिकायत करते हैं कि उन्हें पुर्तगाली से अधिक अंग्रेजी भाषा सुनाई देती है। इसी तरह आयरलैंड के डबलिन के ट्रेंडी ग्रैंड कैनाल डॉक इलाके में हर 15 निवासियों में से एक अमेरिका में जन्मा है। रियल एस्टेट एजेंटों के अनुसार यह अनुपात 19वीं सदी के आलू अकाल के बाद आयरलैंड में पैदा हुए अमेरिकियों के अनुपात से भी अधिक है। बाली, कोलंबिया और थाईलैंड में डॉलर में वेतन पाने वाले अमेरिकी रिमोट वर्करों के कारण मकान महंगे हो गए हैं जिससे लोकल्स प्रोटेस्ट करने लगे हैं क्योंकि उनके देसी इलाकों में जेंट्रीफिकेशन की हवा बह रही है। जेंट्रीफिकेशन यानी देसी इलाकों में हाई जेंट्र्ी के बसने के इलाकों की कल्चर बदलना और हाउस प्राइस (रेंट भी) बढऩा।
अमेरिका के 1 लाख से ज्यादा स्टुडेंट्स आज दुनिया के अलग-अलग देशों में कम फीस वाली यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं। यहां तक कि सीनियर सिटिजन मैक्सिको के सस्ते ओल्ड एज होम में रह रहे हैं। एक रिपोर्ट कहती है कि एक्सपात्सी नाम की एक रिलोकेशन कंपनी ने अल्बानिया में बसने के लिए एक कॉन्फ्रेंस कॉल मीटिंग बुलाई तो इसमें 400 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। यह तब है जब अल्बानिया 90 के दशक तक कम्यूनिस्ट देश था। अल्बानिया अब अमेरिकियों को स्पेशल रेजीडेंस एंड वर्क वीजा देता है जिसमें एक साल पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता। एक्सपात्सी कंपनी 10 लाख अमेरिकियों को विदेशों में बसाने का टार्गेट लेकर चल रही है। अमेरिका को अलविदा कहने वालों की इस नई लहर को एनेलिस्ट डोनाल्ड डैश कह रहे हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका छोडऩे वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि रिमोट वर्क, बढ़ती लाइफस्टाइल कॉस्ट और यूरोप में बसने के आकर्षण के कारण कई साल से अमेरिका को अलविदा का ट्रेंड चल रहा है। व्हाइट हाउस का दावा है कि ...असंख्य अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ विदेशी अमेरिका में बसने के लिए गोल्ड कार्ड पर 10 लाख डॉलर खर्च कर रहे हैं। ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के अनुसार 2025 में अमेरिका को लगभग 1.5 लाख लोगों का घाटा हुआ और 2026 में यह आउटफ्लो और बढ़ सकता है। 2025 में कुल आने वाले लोगों की संख्या लगभग 26 से 27 लाख रही, जो 2023 के लगभग 60 लाख के पीक से बहुत कम है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अनुसार पिछले वर्ष अमेरिका से 6.75 लाख प्रवासी डिपोर्ट किए गए। लेकिन रोचक यह है कि 22 लाख लोगों ने सेल्फ डिपोर्टेशन लिया यानी उन्होनें अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि कैपिटलिज्म और टेक्नोलॉजी के गढ़ अमेरिका को छोडक़र करीब 90 लाख अमेरिकी दूसरे देशों में रह रहे हैं। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार वर्ष 2022 में 16 लाख अमेरिकी मैक्सिको में रह रहे थे। यह वही मैक्सिको है जिसके अमेरिका के साथ बॉर्डर पर प्रेसिडेंट ट्रंप स्टील वॉल खड़ी कर रहे हैं। कनाडा में 2.5 लाख से अधिक अमेरिकी हैं। यूरोप में 15 लाख अमेरिकी रहते हैं। कोविड के बाद पुर्तगाल में अमेरिकियों की संख्या 500 परसेंट से अधिक बढ़ चुकी है। पिछले 10 वर्ष में स्पेन, नीदरलैंड और चेक रिपब्लिक में अमेरिकी दोगुने हो गए हैं। पिछले वर्ष जितने जर्मन अमेरिका गए उससे अधिक अमेरिकी जर्मनी में बस गए।
रिलोकेशन राइजिंग : रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सरकार के पास सिटिजनशिप छोडऩे वालों की वेटिंग लिस्ट चल रही है। इनमें से कुछ नया पासपोर्ट चाहते हैं तो कुछ टैक्स सेविंग के लिए विदेश में बसना। इमिग्रेशन कंपनियों के अनुसार वर्ष 2025 में अमेरिकी से दूसरे देशों में बसने वालों की पूछताछ 50 परसेंट बढ़ गई। अमेरिका में नई रिलोकेशन कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें इलीट्स के लिए लक्सनोमेड्स, ट्रंप आलोचकों के लिए जीटीएफओ टूर्स, अश्वेत अमेरिकियों के लिए ब्लेक्सिट ग्लोबल और महिलाओं के लिए शीहिटरिफ्रेश शामिल हैं। रिलोकेशन एजेंसियों के अनुसार उनके नए ग्राहक केवल यंग एडवेंचर पसंद ट्रेवलर या रिटायर माता-पिता नहीं हैं। इनमें मिडवेस्ट के छोटे आंत्रप्रेन्यॉर, आर्किटेक्ट, फाइनेंशियल कन्सल्टेंट और इंजीनियर भी शामिल हैं। बहुत से लोग अमेरिका में बेतहाशा मेडिकल खर्च से आजिज हैं तो कई मिडलएज तलाक शुदा महिलाएं नई शुरुआत चाहती हैं।
किड्स फ्लाइंग : ट्रेंड कहता है कि अमेरिका छोडऩे वाले अब अपने बच्चों को भी साथ लेकर जा रहे हैं और विदेशों में कॉलेजों में अमेरिकियों की नई जेनरेशन तैयार हो रही है। अमेरिका में स्कूल और कॉलेजों के हालात इस ट्रेंड को हवा दे रहे हैं। डलास के रियल एस्टेट एजेंट क्रिस फोर्ड कहते हैं कम से कम विदेश में यह डर नहीं रहता कि आपका 5 साल का बच्चा किंडरगार्टन में जाकर गन शूटिंग की प्रेक्टिस करेगा। अमेरिका में सैलरी ज्यादा है लेकिन यूरोप में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ। अमेरिका की पावरफुल इकोनॉमी भी पासपोर्ट सरंडर करने वालों को रोक नहीं पा रही है। अमेरिका के फ्यूचर को लेकर भरोसा घट रहा है और लाइफस्टाइल से कोफ्त हो रही है। क्राइम का बढ़ता ग्राफ, लाइफस्टाइल कॉस्ट और राजनीतिक रूप से दोफाड़ समाज भी पलायन को हवा दे रहा है। 2008 की मंदी के दौरान केवल 10% अमेरिकी देश छोडऩा चाहते थे लेकिन 2025 के सर्वे में 20% अमेरिकी दूसरे देश में बसना चाहते हैं।

