ईरान वॉर का असर अब भारत के गुड्स ट्रांसपोर्ट सैक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। क्रिसिल रेटिंग्स की एक नई रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में भारत में टोल कलेक्शन की ग्रोथ रेट घटकर 5 से 7 परसेंट रह सकती है। यह पहले की ग्रोथ रेट के मुकाबले करीब 2 परसेंट कम है। रिपोर्ट में लगभग 10 हाजर किमी लंबे 91 टोल बूथ का अध्ययन किया गया। देश के कुल टोल रोड नेटवर्क में 60 परसेंट शेयर इन्हीं 91 टोल बूथ का है। रिपोर्ट के अनुसार टोल कलेक्शन में लगभग 75 परसेंट शेयर कमर्शियल वेहील्स का है और ये इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, माइनिंग और कंस्ट्रक्शन से सीधे जुड़े होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च और अप्रैल में फास्टैग टोल कलेक्शन में क्रमिक गिरावट दर्ज की गई। इससे सीधा संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितता और ईरान वॉर के कारण गुड्स ट्रांसपोर्ट पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्लोडाउन अस्थायी हो सकता है। अगले वित्त वर्ष यानी वित्त वर्ष28 में टोल कलेक्शन ग्रोथ रेट फिर से 8 से 10 परसेंट तक पहुंच सकती है। इसका बड़ा कारण टोल टैक्स में इंफ्लेशन के आधार पर की जाने वाली बढ़ोतरी है। 2008 के बाद दिए गए अधिकांश रोड प्रोजेक्ट्स में हर वर्ष 3 परसेंट निश्चित टोल रेट बढऩे के साथ-साथ थोक मूल्य सूचकांक आधारित अतिरिक्त वृद्धि का प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार निकट अवधि में वास्तविक ट्रेफिक ग्रोथ केवल 2 से 4% रह सकती है। ऐसे में अगले वर्ष रेवेन्यू ग्रोथ ज्यादातर ट्रेफिक नहीं बल्कि टोल रेट्स में बढ़ोतरी के कारण होगी। हालांकि पैसेंजर और प्राइवेट वेहीकल्स ट्रेफिक अभी भी मजबूत बना हुआ है।
