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29-05-2026

बैंकरप्ट्सी रिकवरी हो गई हाफ , बैंकों के बाल साफ

  •  रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार वित्त वर्ष 26 में आईबीसी यानी इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत रिकवरी रेट में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की रिकवरी रेट 46 से लगभग आधी होकर 23 परसेंट पर आ गई और बड़े लैंडर को बड़ा हेयरकट यानी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इक्रा ने कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान (क्रक्क) की संख्या वित्त वर्ष 26 में घटकर 225 रह गई, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह 259 थी। इसी दौरान कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) में दाखिल मामलों की संख्या भी 5 परसेंट घटकर 679 रह गई। इक्रा के अनुसार वित्त वर्ष 25 में बड़े मामलों के समाधान से रिकवरी में मजबूत सुधार देखने को मिला था, लेकिन वित्त वर्ष 26 में स्थिति फिर कमजोर हो गई। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में रिकवरी दर गिरकर लगभग 20 परसेंट तक पहुंच गई, जो कई तिमाहियों का सबसे निचला स्तर था। इससे बैंकों का औसत हेयरकट करीब 80 परसेंट तक पहुंच गया। इक्रा के मुताबिक दिसंबर 2025 तक आईबीसी के जरिए कुल रिकवरी लगभग 4.1 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, कुल औसत रिकवरी दर अब भी लगभग 30-33 परसेंट के आसपास बनी हुई है, यानी लैंडर को औसतन 67-70 परसेंट तक हेयरकट यानी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इक्रा ने कहा कि आईबीसी को लागू हुए 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन प्रोसेस अभी भी लंबी समयसीमा, भारी हेयरकट और बड़ी संख्या में लिक्विडेशन मामलों जैसी समस्याओं से जूझ रही है। 31 मार्च 2026 तक लगभग 78 परसेंट चल रहे कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) मामले 270 दिनों की तय सीमा से आगे निकल चुके थे। औसत समाधान समय  वित्त वर्ष25 में बढक़र 713 दिन हो गया, जो  वित्त वर्ष24 में 679 दिन था। वित्त वर्ष 26 में तो यह और भी बढक़र 744 दिन हो गया। आईसीआरए की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और ग्रुप हेड मनुश्री सग्गर के अनुसार अप्रैल 2026 में सातवां आईबीसी संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिसका उद्देश्य मौजूदा कमियों को दूर करना था। हालांकि एजेंसी का मानना है कि वास्तविक सुधार संशोधित कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में कहा गया कि एनसीएलटी में कर्मचारियों की कमी के कारण मामलों के निपटान में लगातार देरी हो रही है। इक्रा के अनुसार मार्च 2025 में आईबीसी द्वारा लिक्विडेशन प्रक्रिया में कई सुधार किए जाने के बावजूद वित्त वर्ष26 में लिक्विडेशन मामलों में रिकवरी दर वित्त वर्ष25 के 5 परसेंट से घटकर केवल 4 परसेंट रह गई। साथ ही लिक्विडेशन मामलों के निपटान की अवधि भी 508 से बढक़र 531 दिन हो गई।

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बैंकरप्ट्सी रिकवरी हो गई हाफ , बैंकों के बाल साफ

 रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार वित्त वर्ष 26 में आईबीसी यानी इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत रिकवरी रेट में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की रिकवरी रेट 46 से लगभग आधी होकर 23 परसेंट पर आ गई और बड़े लैंडर को बड़ा हेयरकट यानी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इक्रा ने कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान (क्रक्क) की संख्या वित्त वर्ष 26 में घटकर 225 रह गई, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह 259 थी। इसी दौरान कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) में दाखिल मामलों की संख्या भी 5 परसेंट घटकर 679 रह गई। इक्रा के अनुसार वित्त वर्ष 25 में बड़े मामलों के समाधान से रिकवरी में मजबूत सुधार देखने को मिला था, लेकिन वित्त वर्ष 26 में स्थिति फिर कमजोर हो गई। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में रिकवरी दर गिरकर लगभग 20 परसेंट तक पहुंच गई, जो कई तिमाहियों का सबसे निचला स्तर था। इससे बैंकों का औसत हेयरकट करीब 80 परसेंट तक पहुंच गया। इक्रा के मुताबिक दिसंबर 2025 तक आईबीसी के जरिए कुल रिकवरी लगभग 4.1 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, कुल औसत रिकवरी दर अब भी लगभग 30-33 परसेंट के आसपास बनी हुई है, यानी लैंडर को औसतन 67-70 परसेंट तक हेयरकट यानी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इक्रा ने कहा कि आईबीसी को लागू हुए 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन प्रोसेस अभी भी लंबी समयसीमा, भारी हेयरकट और बड़ी संख्या में लिक्विडेशन मामलों जैसी समस्याओं से जूझ रही है। 31 मार्च 2026 तक लगभग 78 परसेंट चल रहे कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) मामले 270 दिनों की तय सीमा से आगे निकल चुके थे। औसत समाधान समय  वित्त वर्ष25 में बढक़र 713 दिन हो गया, जो  वित्त वर्ष24 में 679 दिन था। वित्त वर्ष 26 में तो यह और भी बढक़र 744 दिन हो गया। आईसीआरए की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और ग्रुप हेड मनुश्री सग्गर के अनुसार अप्रैल 2026 में सातवां आईबीसी संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिसका उद्देश्य मौजूदा कमियों को दूर करना था। हालांकि एजेंसी का मानना है कि वास्तविक सुधार संशोधित कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में कहा गया कि एनसीएलटी में कर्मचारियों की कमी के कारण मामलों के निपटान में लगातार देरी हो रही है। इक्रा के अनुसार मार्च 2025 में आईबीसी द्वारा लिक्विडेशन प्रक्रिया में कई सुधार किए जाने के बावजूद वित्त वर्ष26 में लिक्विडेशन मामलों में रिकवरी दर वित्त वर्ष25 के 5 परसेंट से घटकर केवल 4 परसेंट रह गई। साथ ही लिक्विडेशन मामलों के निपटान की अवधि भी 508 से बढक़र 531 दिन हो गई।


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