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28-05-2026

बायजू के फाउंडर रवींद्रन को सिंगापुर की कोर्ट ने दी 6 महीने की सजा

  •  बायजू के फाउंडर रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने संपत्ति के खुलासे से जुड़े एक मामले में अदालत की अवमानना के लिए छह महीने जेल की सजा सुनाई है। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजरों की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई यूजर्स ने इस घटनाक्रम को स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक चेतावनी भरी कहानी बताया और कई लोगों ने इस एडटेक प्लेटफॉर्म द्वारा अपनाई गई तेजी से बढऩे की रणनीति पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि बायजू एक ऐसी कंपनी थी जो बच्चों को पढ़ाने में मदद करती थी। हालांकि इसका संस्थापक ‘जब तक सफल न हो जाओ, तब तक सफल होने का नाटक करो’ वाले रास्ते पर चल पड़ा। ज्यादा सफलता की चाह और दबाव ने उसे अपने असली लक्ष्य से दूर कर दिया। यूजर ने इसे युवाओं के लिए अच्छा केस स्टडी बताया। अन्य यूजर ने कहा जेल की सजा, इस एडटेक कंपनी के पतन से जुड़े विवादों में एक बड़ा मोड़ है। एक यूजर ने लिखा कि अदालत की अवमानना के लिए जेल की सजा मिलना इसका मतलब है कि अदालत ने माना कि संस्थापक ने सीधे अदालत का आदेश नहीं माना या सबूत छिपाए। यह बड़ा झटका है। अब यह मामला सिर्फ कंपनी की आर्थिक विफलता नहीं रह गया है बल्कि आपराधिक मामले में बदल गया है। कुछ यूजर्स ने सजा की गंभीरता पर भी बहस की। एक पोस्ट में कहा गया कि सिंगापुर की अदालत द्वारा लगाया जुर्माना तो काफी बड़ा है लेकिन 6 महीने की जेल की सजा तुलनात्मक रूप से कम गंभीर है। अन्य लोगों ने बायजू की एक टेक्नोलॉजी कंपनी के तौर पर पहचान पर ही सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि बायजू एक टेक्नोलॉजी कंपनी कैसे बन गई। वह तो ट्यूटोरियल और पढ़ाई का सामान बेच रही थी। ब्लूमबर्ग ने बताया कि सिंगापुर की अदालत ने रवींद्रन को अधिकारियों के सामने सरेंडर करने, कानूनी खर्च चुकाने, और बीयर इन्वेस्टको प्राइवेट लिमिटेड में अपनी मालिकाना हक साबित करने वाले दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है। बीयर इन्वेस्टको प्राइवेट एक ऐसी कॉर्पोरेट संस्था है, जिसके पास एक संबंधित कंपनी के शेयर थे। इस बीच, रवींद्रन ने कहा कि सिंगापुर की अदालत का यह मामला केवल एक प्रक्रियात्मक मामला है। यह चल रही कानूनी कार्यवाही में दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के विवाद से जुड़ा अदालत की अवमानना का केस है। इसमें धोखाधड़ी या किसी गलत काम का कोई ठोस आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि मुझे 15 जून को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है और मेरे पास अपील करने के विकल्प उपलब्ध हैं। रवींद्रन ने कहा कि कर्ज देने वाली संस्थाएं जिनमें जीएलएएस ट्रस्ट और कतर निवेश प्राधिकरण ( क्यूआईए) शामिल हैं। पहले से ही संस्थापकों के साथ समझौते पर बातचीत कर रही हैं और सैद्धांतिक रूप से एक समझौता हो भी चुका है, बस कुछ छोटे-मोटे मुद्दे ही सुलझने बाकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते की कोशिशें जारी होने के बावजूद इस मामले को गुमराह करने वाले तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो उन्हें और न ही अन्य संस्थापकों को विवादित फंड का कोई भी हिस्सा व्यक्तिगत तौर पर मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर में कानूनी कार्रवाई कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की एक सहायक कंपनी ने शुरू की थी। इस कंपनी ने उस समय बायजू में निवेश किया था, जब बायजू नौकरियों में कटौती कर रहा था और अपने कामकाज को फिर से व्यवस्थित कर रहा था। यह घटनाक्रम दिसंबर 2025 में डेलावेयर कोर्ट के उस फैसले के कुछ महीनों बाद सामने आया है, जिसमें कोर्ट ने रवींद्रन के खिलाफ दिए गए अपने पहले के 1 अरब डॉलर के फैसले को पलट दिया था। कोर्ट ने यह फैसला 20 नवंबर के आदेश में सुधार की मांग करने वाले एक प्रस्ताव के जरिए पेश किए गए नए तथ्यों की समीक्षा करने के बाद लिया था।

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बायजू के फाउंडर रवींद्रन को सिंगापुर की कोर्ट ने दी 6 महीने की सजा

 बायजू के फाउंडर रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने संपत्ति के खुलासे से जुड़े एक मामले में अदालत की अवमानना के लिए छह महीने जेल की सजा सुनाई है। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजरों की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई यूजर्स ने इस घटनाक्रम को स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक चेतावनी भरी कहानी बताया और कई लोगों ने इस एडटेक प्लेटफॉर्म द्वारा अपनाई गई तेजी से बढऩे की रणनीति पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि बायजू एक ऐसी कंपनी थी जो बच्चों को पढ़ाने में मदद करती थी। हालांकि इसका संस्थापक ‘जब तक सफल न हो जाओ, तब तक सफल होने का नाटक करो’ वाले रास्ते पर चल पड़ा। ज्यादा सफलता की चाह और दबाव ने उसे अपने असली लक्ष्य से दूर कर दिया। यूजर ने इसे युवाओं के लिए अच्छा केस स्टडी बताया। अन्य यूजर ने कहा जेल की सजा, इस एडटेक कंपनी के पतन से जुड़े विवादों में एक बड़ा मोड़ है। एक यूजर ने लिखा कि अदालत की अवमानना के लिए जेल की सजा मिलना इसका मतलब है कि अदालत ने माना कि संस्थापक ने सीधे अदालत का आदेश नहीं माना या सबूत छिपाए। यह बड़ा झटका है। अब यह मामला सिर्फ कंपनी की आर्थिक विफलता नहीं रह गया है बल्कि आपराधिक मामले में बदल गया है। कुछ यूजर्स ने सजा की गंभीरता पर भी बहस की। एक पोस्ट में कहा गया कि सिंगापुर की अदालत द्वारा लगाया जुर्माना तो काफी बड़ा है लेकिन 6 महीने की जेल की सजा तुलनात्मक रूप से कम गंभीर है। अन्य लोगों ने बायजू की एक टेक्नोलॉजी कंपनी के तौर पर पहचान पर ही सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि बायजू एक टेक्नोलॉजी कंपनी कैसे बन गई। वह तो ट्यूटोरियल और पढ़ाई का सामान बेच रही थी। ब्लूमबर्ग ने बताया कि सिंगापुर की अदालत ने रवींद्रन को अधिकारियों के सामने सरेंडर करने, कानूनी खर्च चुकाने, और बीयर इन्वेस्टको प्राइवेट लिमिटेड में अपनी मालिकाना हक साबित करने वाले दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है। बीयर इन्वेस्टको प्राइवेट एक ऐसी कॉर्पोरेट संस्था है, जिसके पास एक संबंधित कंपनी के शेयर थे। इस बीच, रवींद्रन ने कहा कि सिंगापुर की अदालत का यह मामला केवल एक प्रक्रियात्मक मामला है। यह चल रही कानूनी कार्यवाही में दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के विवाद से जुड़ा अदालत की अवमानना का केस है। इसमें धोखाधड़ी या किसी गलत काम का कोई ठोस आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि मुझे 15 जून को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है और मेरे पास अपील करने के विकल्प उपलब्ध हैं। रवींद्रन ने कहा कि कर्ज देने वाली संस्थाएं जिनमें जीएलएएस ट्रस्ट और कतर निवेश प्राधिकरण ( क्यूआईए) शामिल हैं। पहले से ही संस्थापकों के साथ समझौते पर बातचीत कर रही हैं और सैद्धांतिक रूप से एक समझौता हो भी चुका है, बस कुछ छोटे-मोटे मुद्दे ही सुलझने बाकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते की कोशिशें जारी होने के बावजूद इस मामले को गुमराह करने वाले तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो उन्हें और न ही अन्य संस्थापकों को विवादित फंड का कोई भी हिस्सा व्यक्तिगत तौर पर मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर में कानूनी कार्रवाई कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की एक सहायक कंपनी ने शुरू की थी। इस कंपनी ने उस समय बायजू में निवेश किया था, जब बायजू नौकरियों में कटौती कर रहा था और अपने कामकाज को फिर से व्यवस्थित कर रहा था। यह घटनाक्रम दिसंबर 2025 में डेलावेयर कोर्ट के उस फैसले के कुछ महीनों बाद सामने आया है, जिसमें कोर्ट ने रवींद्रन के खिलाफ दिए गए अपने पहले के 1 अरब डॉलर के फैसले को पलट दिया था। कोर्ट ने यह फैसला 20 नवंबर के आदेश में सुधार की मांग करने वाले एक प्रस्ताव के जरिए पेश किए गए नए तथ्यों की समीक्षा करने के बाद लिया था।


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