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23-05-2026

बच्चों के बेहतर मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा है एनीमिया

  •  बच्चों का स्वस्थ और सक्रिय रहना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है, लेकिन शरीर में आयरन की कमी कई बार बच्चों के विकास पर गंभीर असर डाल सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया मस्तिष्क के विकास और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बच्चों को समय पर संतुलित और पोषक आहार देना बेहद जरूरी है। हैल्थ एक्सपट्र्स का मानना है कि बचपन में सही पोषण मिलने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। वहीं, आयरन की कमी होने पर बच्चे कमजोर, सुस्त और कम सक्रिय हो सकते हैं। लंबे समय तक एनीमिया रहने से बच्चों की याददाश्त, सीखने की क्षमता और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने बच्चों में एनीमिया से बचाव के लिए आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने की सलाह दी है। इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, चना, गुड़, अनार और खजूर जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा, विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू भी शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करते हैं। हेल्थ एक्सपट्र्स के अनुसार, बच्चों को छह महीने की उम्र के बाद समय पर पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। मां के दूध के साथ पौष्टिक आहार बच्चों को जरूरी पोषण देने में मदद करता है। संतुलित भोजन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है और वे अधिक स्वस्थ रहते हैं। वहीं, एनएचएम ने यह भी बताया कि 6 से 59 माह तक के बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (आईएफए) सिरप की पूरक खुराक जरूर दी जानी चाहिए। यह बच्चों में आयरन की कमी को दूर करने और एनीमिया से बचाव में मददगार साबित होता है। साथ ही, बच्चों के खानपान पर शुरू से ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि सही पोषण और नियमित देखभाल से बच्चों को एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाया जा सकता है।

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बच्चों के बेहतर मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा है एनीमिया

 बच्चों का स्वस्थ और सक्रिय रहना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है, लेकिन शरीर में आयरन की कमी कई बार बच्चों के विकास पर गंभीर असर डाल सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया मस्तिष्क के विकास और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बच्चों को समय पर संतुलित और पोषक आहार देना बेहद जरूरी है। हैल्थ एक्सपट्र्स का मानना है कि बचपन में सही पोषण मिलने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। वहीं, आयरन की कमी होने पर बच्चे कमजोर, सुस्त और कम सक्रिय हो सकते हैं। लंबे समय तक एनीमिया रहने से बच्चों की याददाश्त, सीखने की क्षमता और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने बच्चों में एनीमिया से बचाव के लिए आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने की सलाह दी है। इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, चना, गुड़, अनार और खजूर जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा, विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू भी शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करते हैं। हेल्थ एक्सपट्र्स के अनुसार, बच्चों को छह महीने की उम्र के बाद समय पर पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। मां के दूध के साथ पौष्टिक आहार बच्चों को जरूरी पोषण देने में मदद करता है। संतुलित भोजन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है और वे अधिक स्वस्थ रहते हैं। वहीं, एनएचएम ने यह भी बताया कि 6 से 59 माह तक के बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (आईएफए) सिरप की पूरक खुराक जरूर दी जानी चाहिए। यह बच्चों में आयरन की कमी को दूर करने और एनीमिया से बचाव में मददगार साबित होता है। साथ ही, बच्चों के खानपान पर शुरू से ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि सही पोषण और नियमित देखभाल से बच्चों को एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाया जा सकता है।


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