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09-05-2026

दुर्घटना में मृतक के पक्ष में भावी आय वृद्धि की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त 40 प्रतिशत भुगतान का आदेश

  •  गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सन्दीप एन.भट्ट के समक्ष एक याचिका मोटर वाहन कानून 1988 की धारा 178 के अन्तर्गत मोटरवाहन दुर्घटना के अन्तर्गत आदेशित क्षतिपूर्ति की मांग में वृद्धि को लेकर बीबी युसुफ रोबार व अन्य बनाम महेश भाई राठौड़ संबंधित प्रकरण में विचारार्थ प्रस्तुत की गई। इस प्रकरण का संक्षिप्त विवरण यह है कि 11.06.2008 को रात्रि 10 बजे मृतक एक आटोरिक्शा में यात्रा कर रहा था। यह रिक्शा राजपीपला की ओर लौट रहा था और ऑटो का परिचालन सोहेल मृतक के द्वारा किया जा रहा था। जब ऑटोरिक्शा रतनपुर सिमोदरा के बीच पहुचा प्रतिपक्षी ट्रक संख्या त्रछ्व-१८--७१७२ विपरीत दिशा से आ रहा था और यह ट्रक तेज गति से अनियन्त्रित रूप से आगे बढ़ रहा था। उसने ऑटोरिक्शा को लापरवाही से परिचालन के साथ टक्कर मार दी और इसी टक्कर के कारण सुहेल की मृत्यु हो गई। अब्दुल्ल रज्जाक को गंभीर चोटें आई। इसी सन्दर्भ में सुहेल के कानूनी वारिसों ने क्लेम दावा प्रस्तुत किया और 9 लाख की क्षतिपूर्ति की मांग की। यह दावा प्रतिवादी के विरूद्ध किया गया। संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया, प्रतिवादी संख्या 1 से 4 उपस्थित नहीं हुए और इस दावे को कानूनी स्तर पर विरोध किया। प्रतिपक्षी संख्या 5 बीमा कम्पनी के अधिवक्ता ने उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत किया और शिकायतकर्ता क्लेमेन्ट के दावे को खन्डन किया। ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात क्लेम दावे को आंशिक स्तर पर स्वीकार किया तथा ट्रिब्यूनल ने 574000 रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया। इस आदेश के विरूद्ध क्लेमेन्ट ने यह अपील करके क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाने की मांग की है। अपीलेन्ट क्लेमेंन्ट के अधिवक्ता ने उपस्थित होकर न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय के साथ उसकी भावी आय वृद्धि की संभावना पर न्याय संगत विचार नहीं किया है। उसके द्वारा मृतक कि 3000 रुपये प्रतिमाह आय का आकलन किया गया है। लॉस ऑफ एस्टेट व लापरवाही  के सन्दर्भ में क्षतिपूर्ति का निर्धारण नहीं किया गया है। अपीलेन्ट अधिवक्ता ने हालांकि उपरोक्त प्रतिमाह आय का विरोध नहीं किया है। अपील में कहा गया है कि मृतक को देखते हुए न्यायालय को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रणव सेठी नेशनल इन्श्योरेन्स कम्पनी लिमिटेड संबंध (2017)16 स्ष्टष्ट 680 : 2017(4)ञ्ज्रष्ट 673 आदेश के अनुसार मृतक की भावी आय वृद्धि के सन्दर्भ में 40 प्रतिशत वृद्धि का आदेश देना चाहिए था। अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि ट्रिब्यूनल ने व्यक्तिगत खर्च के सन्दर्भ में हालांकि 25 प्रतिशत कटौती की है, जो उचित है।

    अधिवक्ता ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने लॉस ऑफ एस्टेट के सन्दर्भ में कोई क्षतिपूर्ति घोषित नहीं की है। दाह संस्कार खर्च की राशि भी कम क्षतिपूर्ति के सन्दर्भ में दी गई है। मृतक एक विवाहित पुरूष था और उसके परिवार पर ट्रिब्यूनल ने कोई ध्यान अपने आदेश में नहीं दिया है। इस संबंध में अधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय के सरला वर्मा नानूराम व अन्य सामवाली व अन्य संबंधित प्रकरणों का हवाला भी दिया। उपरोक्त सभी तथ्यों को देखते हुए ट्रिब्यूनल का आदेश उचित नहीं है।  प्रतिवादी संख्या 3 से 5 के अधिवक्ता ने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा इस प्रकरण में जो आदेश दिया गया है, वह उचित है। ट्रिब्यूनल ने मृतक का उचित आकलन भी किया है। अधिवक्ता ने अगर इस सन्दर्भ में अपीलेन्ट के अधिवक्ता अगर ट्रिब्यूनल आदेश से सन्तुष्ट नहीं है तो आदेश में कुछ संशोधन किया जा सकता है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात कहा कि न्यायसंगत न्याय मृतक के परिजनों के साथ इस संदर्भ में होना चाहिये, यह कानून न्यायसंगत निर्णय के लिए ही बनाया गया है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि उन्होंने न्याय संगत विभिन्न विषयों पर ध्यान दिया है। ट्रिब्यूनल ने 3000 रुपये प्रतिमाह आय का आकलन मृतक के सन्दर्भ में किया है और इसको लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन प्रणय सेठी प्रकरण के अनुसार आय पर 40 प्रतिशत भावी वेतन वृद्धि का आदेश अवश्य देना चाहिए। न्यायालय का मानना है कि ट्रिब्युनल से इस सन्दर्भ में चूक हुई है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर न्यायालय 40 प्रतिशत भावी आय वृद्धि को स्वीकार करके मृतक की आय का आकलन 4200 रुपये के स्तर पर करता है। न्यायालय ने एक चौथाई स्वयं के खर्च को स्वीकार किया है और इसके आधार पर प्रतिमाह क्षतिपूर्ति की राशि का आकलन 3150 रुपये के स्तर पर होता है इसमें 18 के मल्टीप्लायर को स्वीकार किये जाने से क्षतिपूर्ति की राशि सरला वर्मा प्रकरण के स्वीकृत प्रकरण के अनुसार 642600 रुपये की क्षतिपूर्ति फ्यूचर लॉस ऑफ इनकम के सन्दर्भ में न्यायालय स्वीकार करता है। न्यायालय ने कहा कि लॉस ऑफ एस्टेट के सन्दर्भ में 18000 रुपये की धनराशि स्वीकार की जाती है। उचित दाह संस्कार खर्च के सन्दर्भ में न्यायालय 18000 रुपये के भुगतान का आदेश देता है लॉस ऑफ कन्र्सोटियम के अन्तर्गत 192000 रुपये के भुगतान का न्यायालय आदेश देता है। इस प्रकार कुल 870000 रुपये की संशोधित क्षतिपूर्ति का आदेश न्यायालय देता है। न्यायालय ने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकृत 574000 रुपये की क्षतिपूर्ति के अलावा 296000 रुपये की अतिरिक्त धनराशि के भुगतान का आदेश इस सन्दर्भ में न्यायालय के द्वारा दिया जाता है। यह भुगतान 9 प्रतिशत ब्याज के साथ करने का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया। उपरोक्त तथ्यों पर विचार करने के पश्चात न्यायालय द्वारा कुल 296600 रुपये के अतिरिक्त भुगतान का आदेश स्वीकृत किया गया। अपील को स्वीकार किया गया।

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दुर्घटना में मृतक के पक्ष में भावी आय वृद्धि की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त 40 प्रतिशत भुगतान का आदेश

 गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सन्दीप एन.भट्ट के समक्ष एक याचिका मोटर वाहन कानून 1988 की धारा 178 के अन्तर्गत मोटरवाहन दुर्घटना के अन्तर्गत आदेशित क्षतिपूर्ति की मांग में वृद्धि को लेकर बीबी युसुफ रोबार व अन्य बनाम महेश भाई राठौड़ संबंधित प्रकरण में विचारार्थ प्रस्तुत की गई। इस प्रकरण का संक्षिप्त विवरण यह है कि 11.06.2008 को रात्रि 10 बजे मृतक एक आटोरिक्शा में यात्रा कर रहा था। यह रिक्शा राजपीपला की ओर लौट रहा था और ऑटो का परिचालन सोहेल मृतक के द्वारा किया जा रहा था। जब ऑटोरिक्शा रतनपुर सिमोदरा के बीच पहुचा प्रतिपक्षी ट्रक संख्या त्रछ्व-१८--७१७२ विपरीत दिशा से आ रहा था और यह ट्रक तेज गति से अनियन्त्रित रूप से आगे बढ़ रहा था। उसने ऑटोरिक्शा को लापरवाही से परिचालन के साथ टक्कर मार दी और इसी टक्कर के कारण सुहेल की मृत्यु हो गई। अब्दुल्ल रज्जाक को गंभीर चोटें आई। इसी सन्दर्भ में सुहेल के कानूनी वारिसों ने क्लेम दावा प्रस्तुत किया और 9 लाख की क्षतिपूर्ति की मांग की। यह दावा प्रतिवादी के विरूद्ध किया गया। संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया, प्रतिवादी संख्या 1 से 4 उपस्थित नहीं हुए और इस दावे को कानूनी स्तर पर विरोध किया। प्रतिपक्षी संख्या 5 बीमा कम्पनी के अधिवक्ता ने उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत किया और शिकायतकर्ता क्लेमेन्ट के दावे को खन्डन किया। ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात क्लेम दावे को आंशिक स्तर पर स्वीकार किया तथा ट्रिब्यूनल ने 574000 रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया। इस आदेश के विरूद्ध क्लेमेन्ट ने यह अपील करके क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाने की मांग की है। अपीलेन्ट क्लेमेंन्ट के अधिवक्ता ने उपस्थित होकर न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय के साथ उसकी भावी आय वृद्धि की संभावना पर न्याय संगत विचार नहीं किया है। उसके द्वारा मृतक कि 3000 रुपये प्रतिमाह आय का आकलन किया गया है। लॉस ऑफ एस्टेट व लापरवाही  के सन्दर्भ में क्षतिपूर्ति का निर्धारण नहीं किया गया है। अपीलेन्ट अधिवक्ता ने हालांकि उपरोक्त प्रतिमाह आय का विरोध नहीं किया है। अपील में कहा गया है कि मृतक को देखते हुए न्यायालय को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रणव सेठी नेशनल इन्श्योरेन्स कम्पनी लिमिटेड संबंध (2017)16 स्ष्टष्ट 680 : 2017(4)ञ्ज्रष्ट 673 आदेश के अनुसार मृतक की भावी आय वृद्धि के सन्दर्भ में 40 प्रतिशत वृद्धि का आदेश देना चाहिए था। अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि ट्रिब्यूनल ने व्यक्तिगत खर्च के सन्दर्भ में हालांकि 25 प्रतिशत कटौती की है, जो उचित है।

अधिवक्ता ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने लॉस ऑफ एस्टेट के सन्दर्भ में कोई क्षतिपूर्ति घोषित नहीं की है। दाह संस्कार खर्च की राशि भी कम क्षतिपूर्ति के सन्दर्भ में दी गई है। मृतक एक विवाहित पुरूष था और उसके परिवार पर ट्रिब्यूनल ने कोई ध्यान अपने आदेश में नहीं दिया है। इस संबंध में अधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय के सरला वर्मा नानूराम व अन्य सामवाली व अन्य संबंधित प्रकरणों का हवाला भी दिया। उपरोक्त सभी तथ्यों को देखते हुए ट्रिब्यूनल का आदेश उचित नहीं है।  प्रतिवादी संख्या 3 से 5 के अधिवक्ता ने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा इस प्रकरण में जो आदेश दिया गया है, वह उचित है। ट्रिब्यूनल ने मृतक का उचित आकलन भी किया है। अधिवक्ता ने अगर इस सन्दर्भ में अपीलेन्ट के अधिवक्ता अगर ट्रिब्यूनल आदेश से सन्तुष्ट नहीं है तो आदेश में कुछ संशोधन किया जा सकता है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात कहा कि न्यायसंगत न्याय मृतक के परिजनों के साथ इस संदर्भ में होना चाहिये, यह कानून न्यायसंगत निर्णय के लिए ही बनाया गया है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि उन्होंने न्याय संगत विभिन्न विषयों पर ध्यान दिया है। ट्रिब्यूनल ने 3000 रुपये प्रतिमाह आय का आकलन मृतक के सन्दर्भ में किया है और इसको लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन प्रणय सेठी प्रकरण के अनुसार आय पर 40 प्रतिशत भावी वेतन वृद्धि का आदेश अवश्य देना चाहिए। न्यायालय का मानना है कि ट्रिब्युनल से इस सन्दर्भ में चूक हुई है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर न्यायालय 40 प्रतिशत भावी आय वृद्धि को स्वीकार करके मृतक की आय का आकलन 4200 रुपये के स्तर पर करता है। न्यायालय ने एक चौथाई स्वयं के खर्च को स्वीकार किया है और इसके आधार पर प्रतिमाह क्षतिपूर्ति की राशि का आकलन 3150 रुपये के स्तर पर होता है इसमें 18 के मल्टीप्लायर को स्वीकार किये जाने से क्षतिपूर्ति की राशि सरला वर्मा प्रकरण के स्वीकृत प्रकरण के अनुसार 642600 रुपये की क्षतिपूर्ति फ्यूचर लॉस ऑफ इनकम के सन्दर्भ में न्यायालय स्वीकार करता है। न्यायालय ने कहा कि लॉस ऑफ एस्टेट के सन्दर्भ में 18000 रुपये की धनराशि स्वीकार की जाती है। उचित दाह संस्कार खर्च के सन्दर्भ में न्यायालय 18000 रुपये के भुगतान का आदेश देता है लॉस ऑफ कन्र्सोटियम के अन्तर्गत 192000 रुपये के भुगतान का न्यायालय आदेश देता है। इस प्रकार कुल 870000 रुपये की संशोधित क्षतिपूर्ति का आदेश न्यायालय देता है। न्यायालय ने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकृत 574000 रुपये की क्षतिपूर्ति के अलावा 296000 रुपये की अतिरिक्त धनराशि के भुगतान का आदेश इस सन्दर्भ में न्यायालय के द्वारा दिया जाता है। यह भुगतान 9 प्रतिशत ब्याज के साथ करने का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया। उपरोक्त तथ्यों पर विचार करने के पश्चात न्यायालय द्वारा कुल 296600 रुपये के अतिरिक्त भुगतान का आदेश स्वीकृत किया गया। अपील को स्वीकार किया गया।


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