भारत सरकार अब इलेक्ट्रिक कमर्शियल वेहीकल्स को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। महंगा फ्यूल, क्रूड ऑइल के लिए इंपोर्ट पर भारी निर्भरता और एनर्जी सिक्यॉरिटी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार प्राइवेट बस और ट्रक ऑपरेटरों के लिए 1 बिलियन डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपये) से अधिक के प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित योजना 10 साल तक चल सकती है और इसका मुख्य लक्ष्य भारत के प्राइवेट कमर्शियल वेहीकल नेटवर्क को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से शिफ्ट करना है। खासतौर पर इंटर-सिटी बस ऑपरेटरों को इस स्कीम के जरिए टार्गेट किया जाएगा। भारत अपनी लगभग 90 परसेंट क्रूड ऑइल की जरूरत इंपोर्ट के जरिए पूरी करता है। ईरान वॉर में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में खलल आ जाने के कारण सरकार की चिंता बढ़ी हुई है। ग्लोबल ऑइल प्राइस में आ रही तेजी सीधे भारत की महंगाई और व्यापार घाटे को भडक़ा रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बस और ट्रक को बढ़ावा देना केवल पर्यावरण नीति नहीं, बल्कि एनर्जी सिक्यॉरिटी स्ट्रेटेजी का हिस्सा बन गया है। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक कमर्शियल वेगीकल्स के इस्तेमाल से डीजल खपत में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही बड़े शहरों में प्रदूषण भी घटेगा। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के अनुसार, नई दिल्ली जैसे शहरों में पीएम 2.5 (सूक्ष्म प्रदूषण कण) का लगभग 40 परसेंट हिस्सा वेहीकल एमिशन के कारण आता है। भारत में इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा सरकारी परिवहन निगमों तक सीमित रहा है। देश में कुल 20 लाख से अधिक बसें हैं, जिनमें केवल लगभग 5 परसेंट ही सरकारी नियंत्रण में हैं। वहीं लगभग सभी ट्रक निजी कंपनियों या छोटे ऑपरेटरों द्वारा संचालित किए जाते हैं। योजना के तहत सरकार छोटे और मध्यम फ्लीट ऑपरेटरों की सबसे बड़ी समस्या — ऊंची एंट्री कॉस्ट और सीमित फाइनेंसिंग — को हल करने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित मॉडल में प्रति वाहन 15 लाख तक का ब्याज सब्सिडी सपोर्ट दिया जा सकता है, जो वाहन के पूरे जीवनकाल में लागू रहेगा। हालांकि समय के साथ यह सहायता धीरे-धीरे कम की जा सकती है। सरकार एक पार्शियल क्रेडिट गारंटी सिस्टम पर भी विचार कर रही है, ताकि बैंक और वित्तीय संस्थाएं निजी कंपनियों को इलेक्ट्रिक बस और ट्रक खरीदने के लिए आसानी से कर्ज दे सकें। शुरुआत में लगभग 10 हजार इलेक्ट्रिक बसों को सपोर्ट देने की योजना है, जिसे बाद में बढ़ाकर 40-50 हजार तक किया जा सकता है। इंडस्ट्री ने चार्जिंग पार्क, टोल टैक्स छूट, बिजली रियायत और टैक्स लाभ जैसी अतिरिक्त सुविधाओं की भी मांग की है। जहां चीन पहले से लाखों इलेक्ट्रिक बस और ट्रक चला रहा है, वहीं अमेरिका और यूरोप भी तेजी से अपने सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में ईवी जोड़ रहे हैं। अब भारत भी इसी दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने की तैयारी में दिख रहा है।