विभिन्न नीलामियों में पिछले कुछ दिनों से छोटी इलायची की आवक में उतार-चढ़ाव का रुख बना हुआ है। हालांकि मौसम प्रतिकूल होने की वजह से नई फसल का उत्पादन कुछ नीचा होने की आशंका से बाजार को समर्थन मिल सकता है। आगामी दिनों में हाजिर में छोटी इलायची बढऩे के आसार नहीं दिख रहे हैं। छोटी इलायची की तेजी-मंदी के सम्बन्ध में नवीनतम जानकारियां मिलती रहती हैं और उन्हें इससे लाभ भी होता है। केरल में मौसम में बदला होने की सूचना मिली है। वहां दिन में गर्मी और रात में वर्षा होने की रिपोर्ट आ रही है। हालांकि इस साल अभी तक वर्षा अपेक्षाकृत रूप से कम होने की वजह से छोटी इलायची की आने वाली फसल को हानि होने की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। इन आशंकाओं पर यदि विश्वास किया जाए तो नई फसल करीब 20 प्रतिशत कम आ सकती है। दूसरी ओर, ईरान में सीजफायर चालू होने के बाद भी अमेरिका के साथ तनाव जारी है। इसकी वजह से निर्यातकों की मांग प्रभावित हो रही है। बहरहाल, नीलामियों में छोटी इलायची की आवक में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। कीमत में भी रुक-रुककर मंदी आती जा रही है। इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय हुई मास इंटरप्राइजेज, वंदनमेट्टïू नीलामी में छोटी इलायची की आवक बढक़र 84,548 किलोग्राम की होने की सूचना मिली। आवक तुलनात्मक रूप से ऊंची होने और लिवाली का समर्थन कमजोर पडऩे से इसकी औसत नीलामी कीमत गिरकर 2537.70 रुपए प्रति किलोग्राम रह जाने की सूचना मिली। इससे पूर्व 30 अप्रैल को हुई इस नीलामी में इसकी 71,280 किलोग्राम की आवक हुई थी तथा इसकी औसत नीलामी कीमत 2651.26 रुपए प्रति किलोग्राम रही थी। उधर, ग्वाटेमाला की छोटी इलायची की कीमत तुलनात्मक रूप से ऊंची बनी होने से भी स्थानीय छोटी इलायची की तेजी को समर्थन मिल रहा है। इसकी वजह से भारतीय छोटी इलायची की निर्यात मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। राजधानी स्थित थोक किराना बाजार में लिवाली का समर्थन कमजोर पडऩे से छोटी इलायची साढ़े सात एमएम हाल ही में 50 रुपए मंदी होकर फिलहाल 2600/2700 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। इससे पूर्व हाल ही में इसमें इतनी ही मंदी आई थी। मसाला बोर्ड के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के आरंभिक दस महीनों में देश से 3019.59 करोड़ रुपए मूल्य की कुल 12,281 टन छोटी इलायची का निर्यात हुआ है। एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में इसकी 5294 टन मात्रा का निर्यात हुआ था और इससे 1162.23 करोड़ रुपए की आय हुई थी। इससे पता चलता है कि इसके मात्रात्मक निर्यात में 132 प्रतिशत और आय में 160 प्रतिशत का उछाल आया है। आने वाले दिनों में छोटी इलायची में तेजी संभावना नजर नहीं आ रही है।