उत्तर भारत में लिक्विड दूध की पिछले एक पखवाड़े से भारी किल्लत होने से प्लांटों में क्षमता के अनुरूप नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि चालू सप्ताह में देसी घी एवं दूध पाउडर में 10 रुपए प्रति किलो की तेजी आ गई है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बटर एवं दूध पाउडर के ऊंचे भाव होने से निर्यात मांग जोरों पर चल रही है। घरेलू थोक मांग भी कंपनियों से अच्छी है, जबकि बाजारों में कुछ सुस्ती जरूर है। अत: उत्पादन लागत महंगा होने से अभी बाजार 10 रुपए प्रति किलो और बढ़ सकते हैं। हरबंस लाल फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन विजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि उत्तर भारत में लिक्विड दूध की उपलब्धि पिछले 20-22 दिनों के अंतराल 18-20 प्रतिशत घटकर प्लांटों में 75-80 लाख लीटर दैनिक रह गई है, जिस कारण कंपनियों को लिक्विड दूध उक्त अवधि के अंतराल चार-पांच रुपए बढक़र 60/62 रुपए प्रति लीटर के बीच क्वालिटी के अनुसार खरीदना पड़ रहा है, इस वजह से निर्माता कंपनियों को पड़ता महंगा हो जाने से एक पखवाड़े के अंतराल 20 रुपए प्रति किलो बढ़ाना पड़ा है। अभी चालू सप्ताह में 10 रुपए दो बार में बढक़र प्रीमियम क्वालिटी का दूध पाउडर 310/328 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। देसी घी भी 150 रुपए बढक़र प्रीमियम क्वालिटी का 9550/9750 रुपए प्रति टीन के बीच कंपनियां बोलने लगी है, सैंपल पास माल भी 8200/8400 रुपए प्रति टीम बिक रहे हैं। फिलहाल खारी बावली सहित अन्य बाजारों में कंपनियों की तुलना में अंडर रेट माल बिक रहे हैं, लेकिन कंपनियों की लागत ऊंची होने से बेचू नहीं है। हम मानते हैं कि मिलावटी देसी घी चौतरफा धड़ल्ले से बिक रहे हैं, जो बढिय़ा देसी घी निर्माताओं को मुश्किल में डाल रहे हैं, इसे रोकने के लिए सरकार को ‘गैस क्रोमेटोग्राफी’ टेस्टिंग को ही विधिवत मान्यता देनी चाहिए। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव होने तथा किसी भी प्लांटों में स्टॉक का प्रेशर नहीं होने से रूक-रूक कर आगे तेजी ही लग रही है। देसी घी एवं दूध पाउडर में तेजी का मुख्य कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाल ही 50-60 डॉलर प्रति टन एस एम पी के भाव बढ़ गए हैं तथा फैट में भी 105-110 डॉलर प्रति टन की तेजी आ गई है, दूसरे लिक्विड दूध के भाव भी बढ़े हैं।