देश की ज्वैलरी इंडस्ट्री में हम बिहेवोरियल शिफ्ट देख सकते हैं क्योंकि तैयारी भी इसी की चल रही है। सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी को बढ़ाया है और प्रधानमंत्री ने आने वाले एक वर्ष तक सोना न खरीदने की बात कही है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड ज्वैलर्स के अनुसार प्रधानमंत्री की बात का असर यह होगा कि लोग ओल्ड गोल्ड से न्यू ज्वैलरी को एक्सचेंज करेंगे। यह ट्रेंड जोर पकड़ेगा। मालाबार गु्रप के चेयरमैन के अनुसार आने वाली तिमाहियों ने डिमांड में कमी नहीं आयेगी, बल्कि एक शिफ्ट नजर आयेगा। एक्सचेंज से जुड़ी खरीद होगी और दूसरा कन्ज्यूमर वैल्यू कॉन्शियस हो जायेगा। वैसे भी हम जानते हैं कि कठिन दौर में कन्ज्यूमर सोच-समझकर वैल्यू बाइंग पर फोकस रखता है। वेडिंग और विशेष अवसरों से जुड़ी डिमांड रहेगी लेकिन इन्वेस्टमेंट से जुड़ी बाइंग धीमी पड़ जायेगी। जॉय एलूकास के मैनेजिंग डायरेक्टर के अनुसार प्रधानमंत्री के आग्रह से निवेश से जुड़े सेगमेंट पर ज्यादा असर आयेगा। उनके अनुसार अब कस्टमर्स वैल्यू पर फोकस करते हुए वजन में हल्के डिजाइंस की मांग कर रहे हैं। सोने से भावनात्मक लगाव रखने वाले हमारे देश में यह सम्भव नहीं कि वे सोना खरीदना बंद कर दें। डिमांड मजबूज होगी लेकिन एक्सचेंज मार्केट पर फोकस ज्यादा होगा। बाजार बिहेवोरियल शिफ्ट से रूबरू होगा। द केरला गोल्ड एंड सिल्वर मार्चेंट्स एसोसिएशन ने सरकार से डोमेस्टिक हैल्ड गोल्ड को रीसाइकिल करने की बात कही है। हायर ड्यूटी के साथ गोल्ड परचेज को हतोत्साहित न करें। हैदराबाद के ट्रेडर्स ने कहा है कि मार्केट में कैश क्रंच है और इसलिये सोने की बिक्री गत दिनों से प्रभावित हो रही है। इंडस्ट्री प्लेयर्स को अब गोल्ड रीसाइक्लिंग और मॉनेटाइजेशन में ज्यादा अवसर नजर आ रहे हैं।