भारत पर्सनल हैल्थ के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) अपनाने के मामले में दुनिया में सबसे आगे निकल गया है। एक नई रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 85 प्रतिशत लोग पहले से ही एआई-आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विकसित देशों से काफी ज्यादा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, (जिसका शीर्षक है उपभोक्ता एआई-सक्षम स्वास्थ्य सेवा के लिए तैयार हैं। स्वास्थ्य प्रणाली को भी तैयार रहने की आवश्यकता है) भारतीय उपयोगकर्ता जनरेटिव एआई को दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले कहीं तेजी से अपना रहे हैं। यह रिपोर्ट 15 देशों के 13,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए सर्वे पर आधारित है, जिसमें बताया गया कि भारत का एआई अपनाने का स्तर अमेरिका (50 प्रतिशत), ब्रिटेन (43 प्रतिशत) और जापान (34 प्रतिशत) से काफी ज्यादा है। दुनिया भर में करीब 60 प्रतिशत लोग हेल्थ से जुड़े कामों के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन भारत इस मामले में सबसे आगे है। यह दिखाता है कि देश में डिजिटल हेल्थ टूल्स को लेकर लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मरीज अब इलाज के तरीके को लेकर नई सोच अपना रहे हैं। ज्यादातर लोग ऐसा मॉडल पसंद करते हैं, जिसमें डॉक्टर और एआई मिलकर काम करें, न कि एआई डॉक्टरों की जगह ले। यह तरीका खासकर टेस्ट रिपोर्ट समझने और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों (क्रॉनिक कंडीशन) को मैनेज करने में ज्यादा उपयोगी माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युवा पीढ़ी इस बदलाव को तेजी से आगे बढ़ा रही है। करीब 78 प्रतिशत जेनरेशन जेड और 71 प्रतिशत मिलेनियल्स हेल्थ से जुड़े कामों के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। फिलहाल हेल्थकेयर में एआई का इस्तेमाल ज्यादा तर चैटबॉट्स और वियरेबल डिवाइस तक सीमित है, लेकिन लोगों की उम्मीदें तेजी से बढ़ रही हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी 33 प्रतिशत लोग चैटबॉट्स और 19 प्रतिशत लोग वियरेबल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब लोग ऐसे एडवांस एजेंटिक एआई की उम्मीद कर रहे हैं जो खुद से अपॉइंटमेंट बुक कर सके, रेफरल मैनेज कर सके और दवाओं के बीच संभावित इंटरैक्शन की पहचान कर सके। उपभोक्ता अब ऐसे स्मार्ट एआई सिस्टम चाहते हैं जो अपने आप कई जरूरी काम कर सकें और हेल्थकेयर को ज्यादा आसान और प्रभावी बना सकें।