इस बार आईसक्रीम मेकर्स के लिये राहे कठिन बन रही हैं। सीजन स्टार्ट हुआ ही था कि कई बार एक्टिव हुए पश्चिमी विक्षोप का असर आईसक्रीम को पिघला गया। इस बार वैसे हैल्दी प्रीमियम फ्रोजन डेजर्ट विकल्प लांच हुए हैं। प्रोटीन पैक्ड स्कूप, जीरो शुगर टब, गिल्ट फ्री सेगमेंट को विशेष रूप से आगे किया गया। स्टार्टअप्स और लीगेसी ब्राण्ड्स इस बार नया करने की फिराक में चल रहे हैं। आईसक्रीम का मार्केट अब सीजनल नहीं रहा, बल्कि फुल ईयर का हो गया है। इसके नया देने का स्पेस भी बढ़ गया है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉम्र्स के आ जाने से शिफ्ट तेजी के साथ हो रहा है। जब मन में आईसक्रीम खाने की तलब हो, तभी तुरंत ऑर्डर कर दो। नोटो के फाउंडर वरुण सेठ के अनुसार क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आइसक्रीम की बिक्री करीब सत्तर प्रतिशत बढ़ गई है। ईयर-ऑन-ईयर लेवल पर ग्रोथ सौ प्रतिशत की है। बेहतर वितरण चैनल, बैक इन्फ्रास्ट्रक्चर चैनल मजबूत होने के बाद क्विक कॉमर्स को बेहतर रेस्पांस मिल रहा है। ‘गिल्ट फ्री सेगमेंट’ क्विक कॉमर्स आइसक्रीम सेल्स में करीब 20 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। करीब दो वर्ष पूर्व यह काफी छोटी श्रेणी थी लेकिन अब स्टार्टअप्स और लीगेसी प्लेयर्स का साथ मिलने के साथ विस्तार हो गया है। गैट ए वे को-फाउंडर और सीईओ जश शाह के अनुसार अब कन्ज्यूमर्स को प्रोडक्ट्स को फ्रिज में स्टोर करने की जरूरत नहीं है, इन्स्टेंट ऑर्डर प्लेस कर आइसक्रीम का आनंद ले सकते हैं। क्विक कॉमर्स पर यह श्रेणी दो से तीन गुना बढ़ रही है। इसका कारण बेहतर पैकेजिंग और फास्ट डिलीवरी है। जीरो शुगर, हाई प्रोटीन आइसक्रीम की डिमांड काफी ज्यादा है। इससे यह लगता है कि लोग हैल्थ को कम नुकसान के साथ आइसक्रीम खाना चाहते हैं। लीगेसी ब्राण्ड्स भी पीछे नहीं रहना चाहते। डेरी डे सीजन में तीस प्रतिशत रेवेन्यू ग्रोथ लेने का टारगेट कर रहे हैं। ड्यूअल फ्लेवर्ड कोन, फू्रट टब, रियल फू्रट चंक बाइट साइज मिनी फॉर्मेट पेश किये जा रहे हैं। कम्पनी सूत्रों के अनुसार कन्ज्यूमर प्रिफरेंस क्रिएट हो रही है। वे नये फ्लेवर्स चाहते हैं। नेचुरल्स आइसक्रीम ईयर-ऑन-ईयर लेवल पर 25 से 30 प्रतिशत की ग्रोथ लेने का लक्ष्य कर रही है। उनका फोकस प्रीमियमाइजेशन, एक्सपेरीमेंटेशन पर है। डार्क चॉकलेट सॉरबे, कॉफी एलमंड फज, टेंडर कोकोनट नागा चिली आदि फ्लेवर्स पेश किये गये हैं। क्विक कॉमर्स पर वे काफी सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।