आप से यदि पूछा जाये कि वीकेंड पर क्या कर रहे हैं तो आपको उम्मीद होगी मिलेनियल्स या जैन जेड का जवाब होगा नाइट क्लब, थियेटर या एंटरटेंमेंट सेंटर पर विजिट करेंगे। पर यहां आप गलत हो गये। दिल्ली की 20 वर्षीय आशी का जवाब है कि वह नई दिल्ली स्थित यशोभूमि सेंटर में लंदन बेस्ड कीर्तन आर्टिस्ट और भक्ति योग टीच राधिका दास की परफॉरमेंस देखने जायेंगी। चौंकिये मत, यह पीढ़ी भी ईश्वर के प्रति उतनी ही आस्थावान है, जितनी की मध्यम या पौढ़ पीढ़ी, हां उनका प्रार्थना, ध्यान का तरीका अलग हो सकता है। मन को सुकून वे भी ईश्वर भक्ति में ही तलाशते हैं। ‘भजन क्लबिंग’ की चर्चा हमने नफा नुकसान में पहले भी है। यह नया ट्रेंड है जो काफी पैर पसार रहा है। मजे की बात यह है कि भजन क्लबिंग का प्रचलन यंग गु्रप्स के द्वारा शुरू हुआ और अब तो यह शहरों में युवाओं को सुकून प्रदान करने का शानदार माध्यम बन रहा है। संस्कृत के मंत्र, भजन को संगीत स्वर के साथ उच्चारित किया जाता है और वीकेंड पर ऐसे आयोजन मैट्रो के साथ टीयर वन शहरों में काफी ज्यादा होने लगे हैं। यह कोई नई बात नहीं है, हमारे देश में शनिवार को श्याम भजन संध्या, हनुमान चालीसा पाठ, सुन्दरकांठ पाठ करने की परम्परा रही है। अच्छी बात यह है कि युवा पीढ़ी जिसकी इसे जरूरत भी है, वह इस परम्परा से जुड़ रही है। आशी के अनुसार जब हम भजन क्लबिंग परिसर में प्रवेश करते हैं तो तिलक लगाकर स्वागत किया जाता है। डेढ़-दो घंटे भजनों का संचार होता है जो मन को शांति प्रदान करता है। अब तो विदेशों से भी आर्टिस्ट इन्डिया आकर इवेंट ऑर्गेनाइज कर रहे हैं। यह ट्रेंड वैवाहिक आयोजन में भी हो रहा है और संगीत समारोह को नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। यह आध्यात्मिक के साथ सामाजिक आयोजन भी है।
कपल्स अपने विवाह में भजन क्लबिंग इवेंट आयोजित कर रहे हैं, इसमें परिवार के बुजुर्ग आदि भी शामिल होते हैं। भजन क्लबिंग प्रीमियम, लाइट एंटरटेंमेंट का माध्यम बन रहा है। शुरूआत छोटी कम्यूनिटी से हुई लेकिन दो-तीन वर्ष में ही दायरा काफी बढ़ गया है। इवेंट के टिकट भी दिये जाते हैं और प्रायोजक भी होते हैं। इसे कॉन्सर्ट का स्वरूप भी दिया जाने लगा है। अनेक यंग गु्रप्स के लिये यह रेवेन्यू जैनरेशन का हिस्सा बन गया है। वे दिन में ऑफिस में काम करते हैं और शाम को या वीकेंड्स पर भजन क्लबिंग का हिस्सा बनते हैं। टैम्पल कनेक्ट और इंटरनेशनल टेम्पल्स कन्वेंशन एंड एक्सपो (आईटीसीएक्स) के फाउंडर गीरेश वसुदेव कुलकर्णी के अनुसार यह देश की लाइव इवेंट्स इकोनॉमी का नया ट्रेंड है। यह इंडस्ट्री करीब 20,000 करोड़ रुपये की है और इसमें भजन क्लबिंग अहम स्थान बन रही है। हाल ही में उन्होंने राधिका दास ट्यूर 2025 आयोजित किया था। यह भक्ति, म्यूजिक और मेडीटेशन से सराबोर रहा। इसे हम प्रीमियम एंटरटेंमेंट फॉर्मेट की श्रेणी में रख सकते हैं। ट्यूरिज्म बोर्ड, लाइफस्टाइल ब्राण्ड्स इससे जुडऩे लगे हैं। शुरूआती टिकट करीब 999 रुपये से शुरू हाते हैं। बुकमायशो पर बकायदा बुकिंग होती है। दिल्ली, मुम्बई, बैंगलुरु, कोलकाता, जयपुर में यह इवेंट्स काफी सामान्य होने लगे हैं। डिस्ट्रिक्ट बाय जोमाटो की ‘टचिंग ग्रास: हाओ इन्डिया विल गो आउट इन 2026’ रिपोर्ट में बताया गया है कि जैन जेड में भजन क्लबिंग का ट्रेंड काफी बढ़ेगा। राशी एंटरटेंमेंट के फाउंडर और डायरेक्टर राजीव जैन के अनुसार भजन क्लबिंग जैनरेशन जेड को अट्रेक्ट कर रहा है। जो लोग ध्यान के साथ भजन संगीत को एंजॉय करते हैं, वे इसके लिये आगे आ रहे हैं। इवेंट के लिये वीआईपी पास भी अवेलेबल किये जाते हैं। फ्यूचर लाइनअप में वे इंटरनेशनल आर्टिस्ट को भी शामिल करने का विचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के एक एपीसोड में भजन क्लबिंग का जिक्र किया था और युवाओं के इससे जुडऩे पर प्रसन्नता व्यक्त की थी। यह संस्कृति, परम्परा, भक्ति, अध्यामिकता और आधुनिकता का संगम और अच्छा संगम है।