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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
‘‘दृष्टव्य है कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भम्र से बुद्धि व्यग्र होती है जो मनुष्य के पतन का कारण है।’’
Winner work hard to win, losers find and excuse to lose! stop giving excuses!
अगर हम ज्योतिष विद्या के आधार पर पूंजी और पानी के मिजाज को देखें तो दोनों की राशि समान होने से उनके 36 गुण ही नहीं मिलते वरन अर्थव्यवस्था एवं समाज व्यवस्था के......
व्यसन मानव जीवन में कलंक के रुप में आते हैं और पूरे जीवन को विपत्ति के मुहाने पर छोड़ देते हैं। आजकल कुछ लोग ङ्क्षचता मुक्त होने के लिए अथवा मनोरंजन के लिए...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......