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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
‘‘दृष्टव्य है कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भम्र से बुद्धि व्यग्र होती है जो मनुष्य के पतन का कारण है।’’
I have a lantern. You steal my lantern. What, then is your honor worth no more to you than the price of my lantern!
गत तीन दशकों में राजनेताओं एवं नीति-निर्माताओं के साथ-साथ हर समाज व्यवस्था में इंटेलीजेंसी की व्यापकता जिस तेज गति से बढ़ी है उसका परिणाम यह है कि अब केवल......
परिवर्तन संसार का अपरिवर्तनीय नियम है। जो कल था वह आज नहीं है तथा जो आज है वह कल नहीं रहेगा। प्रकृति में कोई वस्तु व जीव स्थिर या स्थाई नहीं होता। यही संसार...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......