इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि जल्दी लागू होने वाले कई एफटीए से देश के फर्नीचर सेक्टर के एक्सपोर्ट और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। भारत ने मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) समूह और ओमान के साथ एफटीए लागू किए हैं। इसी तरह यूके, ईयू और न्यूजीलैंड के साथ एफटीए अगले एक वर्ष में लागू हो जाएंगे। इजराइल, कनाडा, पेरू, चिली, खाड़ी सहयोग परिषद (बहरीन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब यानी जीसीसी) और यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू — आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस) के साथ भी ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत चल रही है। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के वाइस चांसलर राकेश मोहन जोशी ने कहा कि एफटीए ने भारतीय फर्नीचर सेक्टर के लिए एक्सपोर्ट के बड़े अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा, उद्योग को इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए। इसी तरह भारत क्लस्टर वेंचर्स के फाउंडर अमित आर. बारोट के अनुसार उनकी कंपनी महाराष्ट्र ग्लोबल फर्नीचर सिटी (महा-जीएफसी) विकसित कर रही है। यह फर्नीचर उद्योग के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम होगा जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडस, एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की सुविधा होगी। इस महीने की शुरुआत में स्वीडन की ग्लोबल फर्नीचर और होम फर्निशिंग क्षेत्र की दिग्गज आइकिया ने भारत में एक नई प्रोडक्ट डवलपमेंट कंपनी स्थापित करने की घोषणा की है। अनुमानों के अनुसार, भारत का फर्नीचर मार्केट 30 बिलियन डॉलर से अधिक का है और ग्लोबल फर्नीचर एक्सपोर्ट मार्केट में 1 परसेंट शेयर के साथ भारत 16वें स्थान पर है। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई) के अनुसार, ग्लोबल फर्नीचर इंडस्ट्री 2030 तक 872.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत से फर्नीचर का ज्यादातर एक्सपोर्ट अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन को होता है।