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19-05-2026

AI रैली में पिछड़ा इंडियन मार्केट

  •  दुनिया भर के शेयर बाजार जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंपनियों की तेज़ी के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करता दिखाई दे रहा है। हालिया वैश्विक बाजार आंकड़े बताते हैं कि भारत की यह सुस्ती केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक AI निवेश चक्र से सीमित जुड़ाव की वजह से भी है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के बाद से अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में AI कंपनियों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। अमेरिका में AI आधारित कंपनियों का मार्केट कैप सालाना एवरेज 24 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि ताइवान में यह वृद्धि 69 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 101 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके विपरीत भारतीय आईटी सर्विस सेक्टर का मार्केट कैप करीब 34 प्रतिशत गिर गया, जिससे पूरे भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर पड़ गया। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक निवेशकों का फोकस इस समय ्रढ्ढ हार्डवेयर, चिप निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी कंपनियों पर है, जबकि भारत का टेक सेक्टर मुख्य रूप से आईटी सर्विसेज पर आधारित है। यही वजह है कि भारत वैश्विक AI रैली का पूरा लाभ नहीं उठा सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारतीय बाजार से आईटी सेक्टर को अलग कर देखा जाए, तो बाकी सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई देता है। दूसरी ओर चीन ने हाल के महीनों में बेहतर वापसी के संकेत दिए हैं। CY24-26YTD आंकड़ों में चीन का कुल मार्केट कैप 35 प्रतिशत तक बढ़ा, जबकि भारत का कुल मार्केट कैप 4 प्रतिशत घटा। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान भी भारत से हटकर अन्य एशियाई बाजारों की ओर जाता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार की यह अंडरपरफॉर्मेंस स्थायी नहीं मानी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि ्रढ्ढ सेक्टर में अत्यधिक तेजी के बाद यदि वैश्विक स्तर पर मुनाफावसूली शुरू होती है, तो विदेशी निवेशक फिर से उन बाजारों की ओर लौट सकते हैं जहां घरेलू मांग मजबूत है और आर्थिक वृद्धि स्थिर बनी हुई है। भारत इस स्थिति में सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बाजार की कमजोरी को केवल नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत की व्यापक इक्विटी कहानी अभी भी मजबूत घरेलू खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि पर आधारित है। हालांकि फिलहाल वैश्विक निवेश की दिशा AI और टेक्नोलॉजी केंद्रित होने के कारण भारतीय बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है। 

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AI रैली में पिछड़ा इंडियन मार्केट

 दुनिया भर के शेयर बाजार जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंपनियों की तेज़ी के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करता दिखाई दे रहा है। हालिया वैश्विक बाजार आंकड़े बताते हैं कि भारत की यह सुस्ती केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक AI निवेश चक्र से सीमित जुड़ाव की वजह से भी है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के बाद से अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में AI कंपनियों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। अमेरिका में AI आधारित कंपनियों का मार्केट कैप सालाना एवरेज 24 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि ताइवान में यह वृद्धि 69 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 101 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके विपरीत भारतीय आईटी सर्विस सेक्टर का मार्केट कैप करीब 34 प्रतिशत गिर गया, जिससे पूरे भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर पड़ गया। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक निवेशकों का फोकस इस समय ्रढ्ढ हार्डवेयर, चिप निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी कंपनियों पर है, जबकि भारत का टेक सेक्टर मुख्य रूप से आईटी सर्विसेज पर आधारित है। यही वजह है कि भारत वैश्विक AI रैली का पूरा लाभ नहीं उठा सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारतीय बाजार से आईटी सेक्टर को अलग कर देखा जाए, तो बाकी सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई देता है। दूसरी ओर चीन ने हाल के महीनों में बेहतर वापसी के संकेत दिए हैं। CY24-26YTD आंकड़ों में चीन का कुल मार्केट कैप 35 प्रतिशत तक बढ़ा, जबकि भारत का कुल मार्केट कैप 4 प्रतिशत घटा। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान भी भारत से हटकर अन्य एशियाई बाजारों की ओर जाता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार की यह अंडरपरफॉर्मेंस स्थायी नहीं मानी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि ्रढ्ढ सेक्टर में अत्यधिक तेजी के बाद यदि वैश्विक स्तर पर मुनाफावसूली शुरू होती है, तो विदेशी निवेशक फिर से उन बाजारों की ओर लौट सकते हैं जहां घरेलू मांग मजबूत है और आर्थिक वृद्धि स्थिर बनी हुई है। भारत इस स्थिति में सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बाजार की कमजोरी को केवल नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत की व्यापक इक्विटी कहानी अभी भी मजबूत घरेलू खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि पर आधारित है। हालांकि फिलहाल वैश्विक निवेश की दिशा AI और टेक्नोलॉजी केंद्रित होने के कारण भारतीय बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है। 


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