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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

19-05-2026

आगे भी मिलेगी ग्रोथ को ग्रीन लाइट

  •  भारत का पैसेंजर वेहीकल मार्केट वित्त वर्ष 27 में एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में घरेलू पीवी डीलर सेल 5-7 परसेंट बढक़र लगभग 59 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है। मजबूत घरेलू डिमांड, एसयूवी के लिए दीवानगी और जीएसटी कट जैसे फैक्टर बड़े ग्रोथ ड्राइवर बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत का ऑटो मार्केट तेजी से प्रीमियम और फीचर-रिच मॉडलों की ओर शिफ्ट हो रहा है। जिसका सबसे ज्यादा फायदा एसयूवी सेगमेंट को हुआ है। देश में कुल पीवी प्रोडक्शन में डोमेस्टिक डिमांड का शेयर 86 परसेंट है। क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष27 में यूवी सेल्स 7-9 परसेंट बढ़ सकती है। इसके चलते कुल पैसेंजर वेहीकल सेगमेंट में यूवी का शेयर बढक़र 69 परसेंट तक पहुंचने की संभावना है, जो वित्त वर्ष26 में 67 परसेंट था। इंडियन बायर अब लार्ज, सेफ और टेक्नोलॉजी-फीचर से लैस गाडिय़ों को पसंद कर रहे हैं।  वहीं स्मॉल कार सेगमेंट में भी सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। स्मॉल कार की सेल्स वित्त वर्ष27 में 2-4 परसेंट तक बढ़ सकती है। कम जीएसटी, सस्ता फाइनेंस और और बेहतर अफोर्डेबिलिटी इस सेगमेंट को सपोर्ट कर रहे हैं। सितंबर 2025 में हुए जीएसटी कट ने ऑटो इंक के लिए गेमचेंजर का काम किया। वित्त वर्ष26 की पहली छमाही में पैसेंजर वेहीकल सेल्स 1.4 परसेंट घटी थी, लेकिन जीएसटी कट के बाद के छह महीनों यानी दूसरी छमाही में सेल्स 16.7 परसेंट उछल गई। इससे पूरे वित्त वर्ष26 में घरेलू पीवी सेल्स 7.9 परसेंट बढऩे में मदद मिली। एनेलिस्ट्स का मानना है कि टैक्स कट ने खासकर एंट्री-लेवल और मिड-सेगमेंट बायर की परचेज पावर को मजबूत किया। हालांकि घरेलू बाजार मजबूत है, लेकिन एक्सपोर्ट मार्केट में चैलेंज बने हुए हैं। वेस्ट एशिया में संघर्ष के कारण एक्सपोर्ट ग्रोथ स्लो पड़ सकती है। वित्त वर्ष26 में एक्सपोर्ट 17.5 परसेंट बढक़र 9 लाख यूनिट पहुंचा था, लेकिन वित्त वर्ष27 में इसकी ग्रोथ रेट घटकर 6-8 परसेंट रह जाने का अनुमान है। भारत के कुल पीवी एक्सपोर्ट में वेस्ट एशिया का शेयर लगभग 25 परसेंट है। बढ़ती लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और कमजोर डिमंाड एक्सपोर्ट पर प्रेशर बढ़ा सकती है। ऑटो कंपनियों पर लागत दबाव भी बढ़ रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप मेटल्स की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ऑटो इंक ने इस वर्ष 1-3 परसेंट तक कीमतें बढ़ाई हैं। इसके अलावा अप्रैल 2027 से लागू होने वाले कैफे-3, भारत स्टेज-7 एमिशन स्टेंडर्ड्स और एथेनॉल ब्लेंडिंग के नए नियम भी ऑटो इंक के लिए नए चैलेंज होंगे जिसके चलते कंपनियों को नया इंवेस्टमेंट करना होगा।

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आगे भी मिलेगी ग्रोथ को ग्रीन लाइट

 भारत का पैसेंजर वेहीकल मार्केट वित्त वर्ष 27 में एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में घरेलू पीवी डीलर सेल 5-7 परसेंट बढक़र लगभग 59 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है। मजबूत घरेलू डिमांड, एसयूवी के लिए दीवानगी और जीएसटी कट जैसे फैक्टर बड़े ग्रोथ ड्राइवर बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत का ऑटो मार्केट तेजी से प्रीमियम और फीचर-रिच मॉडलों की ओर शिफ्ट हो रहा है। जिसका सबसे ज्यादा फायदा एसयूवी सेगमेंट को हुआ है। देश में कुल पीवी प्रोडक्शन में डोमेस्टिक डिमांड का शेयर 86 परसेंट है। क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष27 में यूवी सेल्स 7-9 परसेंट बढ़ सकती है। इसके चलते कुल पैसेंजर वेहीकल सेगमेंट में यूवी का शेयर बढक़र 69 परसेंट तक पहुंचने की संभावना है, जो वित्त वर्ष26 में 67 परसेंट था। इंडियन बायर अब लार्ज, सेफ और टेक्नोलॉजी-फीचर से लैस गाडिय़ों को पसंद कर रहे हैं।  वहीं स्मॉल कार सेगमेंट में भी सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। स्मॉल कार की सेल्स वित्त वर्ष27 में 2-4 परसेंट तक बढ़ सकती है। कम जीएसटी, सस्ता फाइनेंस और और बेहतर अफोर्डेबिलिटी इस सेगमेंट को सपोर्ट कर रहे हैं। सितंबर 2025 में हुए जीएसटी कट ने ऑटो इंक के लिए गेमचेंजर का काम किया। वित्त वर्ष26 की पहली छमाही में पैसेंजर वेहीकल सेल्स 1.4 परसेंट घटी थी, लेकिन जीएसटी कट के बाद के छह महीनों यानी दूसरी छमाही में सेल्स 16.7 परसेंट उछल गई। इससे पूरे वित्त वर्ष26 में घरेलू पीवी सेल्स 7.9 परसेंट बढऩे में मदद मिली। एनेलिस्ट्स का मानना है कि टैक्स कट ने खासकर एंट्री-लेवल और मिड-सेगमेंट बायर की परचेज पावर को मजबूत किया। हालांकि घरेलू बाजार मजबूत है, लेकिन एक्सपोर्ट मार्केट में चैलेंज बने हुए हैं। वेस्ट एशिया में संघर्ष के कारण एक्सपोर्ट ग्रोथ स्लो पड़ सकती है। वित्त वर्ष26 में एक्सपोर्ट 17.5 परसेंट बढक़र 9 लाख यूनिट पहुंचा था, लेकिन वित्त वर्ष27 में इसकी ग्रोथ रेट घटकर 6-8 परसेंट रह जाने का अनुमान है। भारत के कुल पीवी एक्सपोर्ट में वेस्ट एशिया का शेयर लगभग 25 परसेंट है। बढ़ती लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और कमजोर डिमंाड एक्सपोर्ट पर प्रेशर बढ़ा सकती है। ऑटो कंपनियों पर लागत दबाव भी बढ़ रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप मेटल्स की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ऑटो इंक ने इस वर्ष 1-3 परसेंट तक कीमतें बढ़ाई हैं। इसके अलावा अप्रैल 2027 से लागू होने वाले कैफे-3, भारत स्टेज-7 एमिशन स्टेंडर्ड्स और एथेनॉल ब्लेंडिंग के नए नियम भी ऑटो इंक के लिए नए चैलेंज होंगे जिसके चलते कंपनियों को नया इंवेस्टमेंट करना होगा।


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