बदलते कारोबारी माहौल के बीच जहां पॉवरफुल बनने के लिए एक ओर युद्ध का सहारा लेना आसान होता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के उपयोग से पॉवर को अपने वश में करने का काम सरकारों के सपोर्ट से बड़ी-बड़ी कंपनियां कर रही हैं। AI का तेज बुखार कुछ गिनी चुनी कंपनियों पर चढ़ा हुआ है पर इनकी तरफ से आने वाली खबरों ने पूरी दुनिया में काम करने वालों को डर में जीने पर मजबूर कर दिया है। अभी तक AI का डवलपमेंट जिस स्थिति में है उसमें AI पर काम कर रही कंपनियां इंवेस्टरों के फंड्स को कंज्यूमर तक ट्रांसफर कर रही हैं यानि खुद कुछ कमाकर नहीं दिखा पा रही हैं। एक दिलचस्प उदाहरण AI कंपनी Open AI का है जो वर्ष 2030 तक 600 बिलियन डॉलर इंवेस्ट करने के प्लान पर काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि प्रोफिट में आने से पहले वह 143 बिलियन डॉलर खो देगी और मजेदार बात यह है कि इंवेस्ट करने व खोने का पैसा इसके पास है ही नहीं यानि बड़े-बड़े इंवेस्टर ऐसा करने के लिए कंपनी को सपोर्ट करेंगे। अमेरिका मे हो रहे कई सर्वे बता रहे हैं कि 55 प्रतिशत से ज्यादा लोग यह मानते हैं कि AI ज्यादातर लोगों का फायदा करने की बजाए नुकसान कर सकती है। लोगों का यह भी मानना है कि AI को डवलप कर रही कंपनियां सिर्फ अपने फायदे के लिए ऐसा कर रही हैं। इन सच्चाईयों के बीच हम कैसे आगे बढ़ सकते हैं जब AI से लाखों नौकरियां खतरे में दिख रही हैं। एलन मस्क का ही बयान है कि AI सभी जॉब्स की जगह ले लेगी। बिल गेट्स कह चुके हैं कि ज्यादातर कामों के लिए इंसान की जरूरत नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो आगे बढऩा तो दूर जीने व परिवारों को पालने के लिए इनकम कैसे होगी? इकोनोमी या जॉब ही नहीं बल्कि AI जब हमारे रिश्तों पर भी असर डाल रही है तब हम आगे कैसे बढ़ सकते हैं? लोग व बच्चे AI से साथी और दोस्त बना रहे हैं जो उन्हें अकेलेपन की ओर धकेल रही है। हमारी प्राइवेसी पर टेक्नोलॉजी का हमला बहुत पहले से हो रहा है जिससे हमारा पर्सनल डेटा न जाने कहां कहां स्टोर हो चुका है। AI के जरिए इस डेटा को इतनी स्पीड से ऐसे लेवल पर काम में लिया जाने लगा है जैसा इतिहास में कभी नहीं हुआ। हम आगे कैसे बढ़ सकते हैं जब लोग इस डर में जी रहे हों कि उनके बारे में हर चीज रिपोर्ट व रिकॉर्ड हो रही है। AI का प्रभाव हमारे लोकतंत्र पर भी होने लगा है जहां फेक फोटो, वीडियो के साथ-साथ बयान व भाषण तैयार करके प्रसारित किए जा रहे हैं। जब लोगों को यह भरोसा न हो कि वे जो देख या सुन रहे हैं वह सच है या नहीं तो कोई भी निर्णय करना असंभव-सा ही हो जाता है। Meta कंपनी न्यूयॉर्क के Manhattan जितना बड़ा डेटा सेंटर बना रही है जिसमें काम आने वाली बिजली से 15 लाख से ज्यादा घरों को रोशनी मिल सकती है। हम आगे कैसे बढ़ सकते हैं जब हमारी एनर्जी का बड़ा हिस्सा दुनियाभर में डवलप हो रहे इन डेटा सेंटरों को चलाने के काम आएगा। नोबल प्राइज विजेता भी कह चुके हैं कि AI इंसान को बेकार बना सकती है जिससे बड़े लेवल पर आपराधिक घटनाएं बढऩे लगेगी। एक साइंटिस्ट का दावा है कि AI के जरिए हम आग से खेल रहे हैं और हमें अभी तक यह नहीं पता कि जब AI मशीने हमारे खिलाफ काम करने लगे तो हमें क्या करना चाहिए। अमेरिका में सरकार AI के डवलपमेंट पर इसलिए लगाम नहीं लगा पा रही है क्योंकि ये कंपनियां अब तक 185 मिलियन डॉलर खर्च कर चुकी है और इस इंवेस्टमेंट के बर्बाद होने के डर से सरकार इनके काम में हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। कुछ गिने-चुने अमीर लोग अपना सपना पूरा करने यानि पूरी पॉवर अपने पास रखने के लिए AI पर बड़े-बड़े दांव लगा रहे हैं जिससे यह लगभग तय ही माना जा रहा है कि AI जॉब, समानता (Equality), आपस में जुड़ाव, लोकतंत्र, कारोबारी इकोसिस्टम व बड़ी संख्या में लोगों को Disturb कर देगी और ऐसी स्थिति में हम आगे कैसे बढ़ सकते हैं यह सवाल पूछने की शुरुआत शायद कर देनी चाहिए।