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19-05-2026

शहरों के घर बनते जा रहे हैं ‘हीट चैंबर’

  •  दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना या जयपुर : अब गर्मी सिर्फ दोपहर की परेशानी नहीं रही। हालात इतने बदल चुके हैं कि रात के अंधेरे में भी घरों की दीवारें तपती रहती हैं और पंखे-एसी के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिलती। भारत के शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती गर्मी ने अब घरों को ही ‘हीट चैंबर’ में बदलना शुरू कर दिया है। हाल ही में सामने आई एक नई स्टडी ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के लो और मिडिल इनकम वाले शहरी इलाकों में हजारों घरों का तापमान रातभर 31 से 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। इसका मतलब यह है कि लोग दिन की झुलसाने वाली गर्मी से बचने के बाद भी रात में अपने ही घरों में लगातार ‘हीट एक्सपोजर’ झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ असहजता का मामला नहीं है, बल्कि सीधे हेल्थ से जुड़ा बड़ा संकट बनता जा रहा है। जब रात में तापमान कम नहीं होता, तब शरीर को दिनभर की गर्मी से रिकवर होने का मौका नहीं मिलता। इससे डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट स्ट्रेस, नींद की कमी और मानसिक थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। दरअसल शहरों का कंक्रीट मॉडल अब खुद गर्मी पैदा करने लगा है। तेजी से हो रहा शहरीकरण, सीमेंट-कंक्रीट की ऊंची इमारतें, कम होते पेड़ और बंद गलियों वाले मोहल्ले ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ा रहे हैं। दिनभर धूप से गर्म हुई सडक़ें और इमारतें रात में भी गर्मी छोड़ती रहती हैं, जिससे तापमान नीचे नहीं आ पाता। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 5,800 घंटे ऐसे दर्ज किए गए, जब घरों के अंदर तापमान बेहद ऊंचा बना रहा। यानी लोगों ने लगभग आठ महीने तक लगातार गर्म रातों का सामना किया। यह स्थिति खासतौर पर उन परिवारों के लिए ज्यादा मुश्किल है जिनके पास लगातार एसी चलाने की सुविधा नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है। भारत के कई हिस्सों में तापमान पहले ही 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। अगर शहरों की प्लानिंग में बदलाव नहीं किए गए तो आने वाले समय में रात की गर्मी सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है। फिलहाल सरकारी हीट एक्शन प्लान ज्यादातर दिन की गर्म हवाओं और लू पर केंद्रित रहते हैं, लेकिन अब विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि ‘नाइट हीट’ को भी आपदा प्रबंधन का हिस्सा बनाया जाए। शहरों में ग्रीन कवर बढ़ाना, ठंडी छतों (कूल रूफ) को बढ़ावा देना, बेहतर वेंटिलेशन और कम गर्मी सोखने वाली निर्माण सामग्री का इस्तेमाल अब जरूरत बन चुका है। गर्मी का यह नया चेहरा साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में खतरा सिर्फ बाहर की धूप नहीं, बल्कि घरों के भीतर कैद होती गर्मी भी होगी। शहरों की चमक के पीछे छिपा यह ‘हीट ट्रैप’ अब करोड़ों लोगों की सेहत और जिंदगी पर भारी पडऩे लगा है।

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शहरों के घर बनते जा रहे हैं ‘हीट चैंबर’

 दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना या जयपुर : अब गर्मी सिर्फ दोपहर की परेशानी नहीं रही। हालात इतने बदल चुके हैं कि रात के अंधेरे में भी घरों की दीवारें तपती रहती हैं और पंखे-एसी के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिलती। भारत के शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती गर्मी ने अब घरों को ही ‘हीट चैंबर’ में बदलना शुरू कर दिया है। हाल ही में सामने आई एक नई स्टडी ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के लो और मिडिल इनकम वाले शहरी इलाकों में हजारों घरों का तापमान रातभर 31 से 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। इसका मतलब यह है कि लोग दिन की झुलसाने वाली गर्मी से बचने के बाद भी रात में अपने ही घरों में लगातार ‘हीट एक्सपोजर’ झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ असहजता का मामला नहीं है, बल्कि सीधे हेल्थ से जुड़ा बड़ा संकट बनता जा रहा है। जब रात में तापमान कम नहीं होता, तब शरीर को दिनभर की गर्मी से रिकवर होने का मौका नहीं मिलता। इससे डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट स्ट्रेस, नींद की कमी और मानसिक थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। दरअसल शहरों का कंक्रीट मॉडल अब खुद गर्मी पैदा करने लगा है। तेजी से हो रहा शहरीकरण, सीमेंट-कंक्रीट की ऊंची इमारतें, कम होते पेड़ और बंद गलियों वाले मोहल्ले ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ा रहे हैं। दिनभर धूप से गर्म हुई सडक़ें और इमारतें रात में भी गर्मी छोड़ती रहती हैं, जिससे तापमान नीचे नहीं आ पाता। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 5,800 घंटे ऐसे दर्ज किए गए, जब घरों के अंदर तापमान बेहद ऊंचा बना रहा। यानी लोगों ने लगभग आठ महीने तक लगातार गर्म रातों का सामना किया। यह स्थिति खासतौर पर उन परिवारों के लिए ज्यादा मुश्किल है जिनके पास लगातार एसी चलाने की सुविधा नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है। भारत के कई हिस्सों में तापमान पहले ही 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। अगर शहरों की प्लानिंग में बदलाव नहीं किए गए तो आने वाले समय में रात की गर्मी सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है। फिलहाल सरकारी हीट एक्शन प्लान ज्यादातर दिन की गर्म हवाओं और लू पर केंद्रित रहते हैं, लेकिन अब विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि ‘नाइट हीट’ को भी आपदा प्रबंधन का हिस्सा बनाया जाए। शहरों में ग्रीन कवर बढ़ाना, ठंडी छतों (कूल रूफ) को बढ़ावा देना, बेहतर वेंटिलेशन और कम गर्मी सोखने वाली निर्माण सामग्री का इस्तेमाल अब जरूरत बन चुका है। गर्मी का यह नया चेहरा साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में खतरा सिर्फ बाहर की धूप नहीं, बल्कि घरों के भीतर कैद होती गर्मी भी होगी। शहरों की चमक के पीछे छिपा यह ‘हीट ट्रैप’ अब करोड़ों लोगों की सेहत और जिंदगी पर भारी पडऩे लगा है।


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