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23-04-2026

सडक़, रेलवे और बिजली क्षेत्रों की नीतियों में आपदा जोखिम से निपटने के उपायों का अभाव

  •  भारत के सडक़, रेलवे और बिजली क्षेत्रों की मौजूदा क्षेत्रीय नीतियों और मानक संविदा दस्तावेजों में आपदा जोखिम से निपटने के उपायों की कमी है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह बात कही गई। विश्लेषण में इस बात को एक गंभीर समस्या बताया गया है, क्योंकि भारत सहित पूरी दुनिया इस समय जलवायु और आपदा जोखिमों से वित्तीय खतरे का सामना कर रही है। इसमें वैश्विक बुनियादी ढांचे को सालाना 845 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक है। कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) की भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आपदा के दौरान मजबूत बने रहने के उपायों को मुख्यधारा में लाना नामक यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। एक बयान में सीडीआरआई के महानिदेशक अमित प्रोथी ने कहा, आपदा अनुकूलन यानी आपदा जोखिम से निपटने का अर्थ सार्वजनिक वित्त की रक्षा करना और विकास के लाभों को सुरक्षित करना है। आज मजबूत बुनियादी ढांचे में निवेश करना कल के वित्तीय झटकों को कम करता है और यह सरकारों द्वारा किए जा सकने वाले सबसे समझदारी भरे निवेशों में से एक है। रिपोर्ट में सडक़, रेलवे और बिजली क्षेत्रों में पांच प्रमुख कमी वाले क्षेत्रों... मानक संविदात्मक दस्तावेजों में कमियां, परियोजना काल में कमियां, डेटा और जोखिम मूल्यांकन प्रणालियों में कमियां, क्षमता में कमी और वित्तपोषण एवं जोखिम कवरेज में कमियां... की पहचान की गई है।

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सडक़, रेलवे और बिजली क्षेत्रों की नीतियों में आपदा जोखिम से निपटने के उपायों का अभाव

 भारत के सडक़, रेलवे और बिजली क्षेत्रों की मौजूदा क्षेत्रीय नीतियों और मानक संविदा दस्तावेजों में आपदा जोखिम से निपटने के उपायों की कमी है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह बात कही गई। विश्लेषण में इस बात को एक गंभीर समस्या बताया गया है, क्योंकि भारत सहित पूरी दुनिया इस समय जलवायु और आपदा जोखिमों से वित्तीय खतरे का सामना कर रही है। इसमें वैश्विक बुनियादी ढांचे को सालाना 845 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक है। कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) की भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आपदा के दौरान मजबूत बने रहने के उपायों को मुख्यधारा में लाना नामक यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। एक बयान में सीडीआरआई के महानिदेशक अमित प्रोथी ने कहा, आपदा अनुकूलन यानी आपदा जोखिम से निपटने का अर्थ सार्वजनिक वित्त की रक्षा करना और विकास के लाभों को सुरक्षित करना है। आज मजबूत बुनियादी ढांचे में निवेश करना कल के वित्तीय झटकों को कम करता है और यह सरकारों द्वारा किए जा सकने वाले सबसे समझदारी भरे निवेशों में से एक है। रिपोर्ट में सडक़, रेलवे और बिजली क्षेत्रों में पांच प्रमुख कमी वाले क्षेत्रों... मानक संविदात्मक दस्तावेजों में कमियां, परियोजना काल में कमियां, डेटा और जोखिम मूल्यांकन प्रणालियों में कमियां, क्षमता में कमी और वित्तपोषण एवं जोखिम कवरेज में कमियां... की पहचान की गई है।


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