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09-06-2026

एफपीआई ने जून के पहले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार से 43,000 करोड़ रुपये निकाले

  •  विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से अपनी हिस्सेदारी कम करना जारी रखा है और जून के पहले सप्ताह में करीब 43,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। यह रुझान वैश्विक पूंजी के प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े अवसरों की ओर झुकाव तथा रुपये में जारी कमजोरी के बीच देखने को मिला है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, इस निकासी के साथ ही वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से एफपीआई की कुल निकासी बढक़र 2.67 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों, रुपये में गिरावट और वैश्विक बाजारों में विशेषकर प्रौद्योगिकी एवं एआई क्षेत्र में आकर्षक निवेश अवसरों के कारण एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से दूरी बना रहे हैं। एल्फा एएमसी के संस्थापक राजेश सिंगला ने कहा, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के अलावा, वैश्विक निवेशक वर्तमान में दुनिया भर में उभर रहे सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और एआई-संबंधित सार्वजनिक बाजार के अवसरों की ओर पूंजी को स्थानांतरित कर रहे हैं। आगामी स्पेसएक्स के आईपीओ और अग्रणी एआई कंपनियों के इर्द-गिर्द संभावित पूंजी बाजार गतिविधियों के कारण वैश्विक नकदी वहां आकर्षित हो रही है। इससे भारत सहित अन्य उभरते बाजारों से अस्थायी रूप से पूंजी बाहर जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में फरवरी को छोडक़र हर महीने एफपीआई शुद्ध विक्रेता रहे हैं। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक निवेश था। हालांकि, मार्च में बिकवाली तेज हो गई और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी जारी रही। जून के पहले सप्ताह में भी 42,927 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में लगातार कमजोरी भी विदेशी निवेश की निकासी का एक प्रमुख कारण है। भारतीय मुद्रा 2026 में अब तक लगभग छह प्रतिशत और पिछले एक वर्ष में करीब 10 प्रतिशत कमजोर हुई है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश से होने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को कर से मुक्त करने के सरकार के फैसले के साथ-साथ हाल के आरबीआई के उपायों से नए विदेशी निवेश को समर्थन मिल सकता है।

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एफपीआई ने जून के पहले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार से 43,000 करोड़ रुपये निकाले

 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से अपनी हिस्सेदारी कम करना जारी रखा है और जून के पहले सप्ताह में करीब 43,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। यह रुझान वैश्विक पूंजी के प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े अवसरों की ओर झुकाव तथा रुपये में जारी कमजोरी के बीच देखने को मिला है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, इस निकासी के साथ ही वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से एफपीआई की कुल निकासी बढक़र 2.67 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों, रुपये में गिरावट और वैश्विक बाजारों में विशेषकर प्रौद्योगिकी एवं एआई क्षेत्र में आकर्षक निवेश अवसरों के कारण एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से दूरी बना रहे हैं। एल्फा एएमसी के संस्थापक राजेश सिंगला ने कहा, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के अलावा, वैश्विक निवेशक वर्तमान में दुनिया भर में उभर रहे सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और एआई-संबंधित सार्वजनिक बाजार के अवसरों की ओर पूंजी को स्थानांतरित कर रहे हैं। आगामी स्पेसएक्स के आईपीओ और अग्रणी एआई कंपनियों के इर्द-गिर्द संभावित पूंजी बाजार गतिविधियों के कारण वैश्विक नकदी वहां आकर्षित हो रही है। इससे भारत सहित अन्य उभरते बाजारों से अस्थायी रूप से पूंजी बाहर जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में फरवरी को छोडक़र हर महीने एफपीआई शुद्ध विक्रेता रहे हैं। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक निवेश था। हालांकि, मार्च में बिकवाली तेज हो गई और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी जारी रही। जून के पहले सप्ताह में भी 42,927 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में लगातार कमजोरी भी विदेशी निवेश की निकासी का एक प्रमुख कारण है। भारतीय मुद्रा 2026 में अब तक लगभग छह प्रतिशत और पिछले एक वर्ष में करीब 10 प्रतिशत कमजोर हुई है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश से होने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को कर से मुक्त करने के सरकार के फैसले के साथ-साथ हाल के आरबीआई के उपायों से नए विदेशी निवेश को समर्थन मिल सकता है।


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