अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 22 पैसे टूटकर 95.86 (अस्थायी) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं से रुपये पर दबाव बढ़ा है। कारोबार के दौरान एक समय यह 96 प्रति डॉलर के से नीचे चला गया था। रुपया इस वर्ष अब तक 6' से अधिक टूट चुका है और पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह लगभग दो प्रतिशत कमजोर हुआ है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ रुपये में गिरावट आई है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं, अपेक्षाकृत उच्च मूल्यांकन और एआई-आधारित निवेश अवसरों की कमी ने पूंजी प्रवाह पर दबाव डाला है। इसके अलावा, कमजोर शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से भुगतान संतुलन पर दबाव पडऩे की संभावना है, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा रही हैं। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.86 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह पिछले बंद भाव से 50 पैसे टूटकर 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। अंतत: रुपया 95.86 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 22 पैसे की गिरावट है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से इसे कुछ सहारा मिला। रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, अंत में दो पैसे की मामूली बढ़त के साथ 95.64 पर बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘ हमारा अनुमान है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के बीच रुपये में गिरावट जारी रहेगी। मजबूत डॉलर और विदेशी पूंजी की निकासी से भी रुपये पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक का कोई भी हस्तक्षेप और सोने-चांदी पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी निचले स्तरों पर रुपये को सहारा दे सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया का हाजिर भाव 95.60 से 96.20 के बीच रह सकता है।’’ इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.15 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 160.73 अंक टूटकर 75,237.99 अंक जबकि निफ्टी 46.10 अंक फिसलकर 23,643.50 अंक पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 3.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 109.04 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को शुद्ध लिवाल रहे थे और उन्होंने 187.46 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।