भारत की ट्रेवल इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ट्यूरिस्ट के विश्वास और खर्च में तेजी देखी जा रही है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 88 प्रतिशत यात्री घूमना चाहते हैं। वहीं, इंडस्ट्री का फोकस प्रीमियमाइजेशन और वैल्यू पर है। रिपोर्ट में कहा गया कि डोमेस्टिक ट्रैवल में 72 प्रतिशत ट्यूरिस्ट ट्यूर कॉस्ट को कम महत्व देते हैं और 81 प्रतिशत यात्री अनुमान से अधिक स्पेंडिंग कर देते हैं। यह प्रीमियमाइजेशन विदेशी ट्यूर में भी तेजी से बढ़ रहा है जहां एवरेज स्पेंड डोमेस्टिक ट्रैवल के खर्च का 3.2 गुना है। आजकल यंग गु्रप्स ट्यूर के अनुभव को महत्व दे रहे हैं। स्पेंड बेशक अधिक हो जाये, लेकिन अनुभव, रिलेक्सेशन कम नहीं होना चाहिये। गूगल इंडिया के ट्रैवल एवं फूडटेक हेड ने कहा कि यात्रा करना अब सेल्फ-एक्सप्रेशन का एक रूप बन गया है। हालांकि, बुकिंग के तरीकों में अभी भी एकरूपता नहीं है और हम देख रहे हैं कि हमारा डिजिटल इकोसिस्टम इस जटिलता को सरल बना रहा है। देश में बढ़ते ट्रैवल का फायदा प्रमुख तौर पर एविएशन सेगमेंट को भी मिल रहा है। इस समय तो जिस प्रकार के हालात दुनिया में चल रहे हैं, ऐयर ट्रैवल कॉस्ट बढ़ रही है। फिर भी अनेक रूट बंद हैं। डोमेस्टिक लेवल पर भी एयर फेयर आसमान छू रहे हैं। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए कहा कि यात्रियों की संख्या बढऩे की वजह क्षमता विस्तार भी है, क्योंकि अक्टूबर,2025 में डोमेस्टिक डिपार्चर की संख्या करीब 99,816 रही है, जो कि मासिक आधार पर 10.8 प्रतिशत और सालाना आधार पर 1.7 प्रतिशत अधिक है। आईसीआरए को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में भारतीय एयरलाइनों के लिए इंटरनेशनल पैसेंजर ट्रेफिक में 13-15 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिसे विस्तारित इंटरनेशनल रूट और विमानों की बढ़ती उपलब्धता से सपोर्ट मिलेगा। वहीं, यात्रियों की मांग को देखते हुए देश में नए-नए एयरपोर्ट्स भी खुल रहे हैं। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हो गया है। वहीं, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शुरू हो गया है। यह दोनों ही एयरपोर्ट्स वल्र्डक्लास सुविधाओं वाले हैं और पैसेंजर्स की संख्या को बढ़ावा देंगे।