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13-03-2026

उत्पादन में भारी कमी से बासमती चावल रूक रूक कर तेज रहेगा

  •  बासमती चावल की सभी प्रजातियों में तीन-चार दिनों में नीचे के भाव से इसमें 400/500 रुपए प्रति कुंतल की तेजी आ गई है। वर्तमान में निर्यातकों की फिर खरीद चलने तथा धान महंगा होने से राइस मिलें चावल के बिकवाल नहीं हैं। इस समय में निर्यात सौदे लगातार हो रहे हैं। उत्पादक मंडियों में धान मिलना मुश्किल हो गया है, इसलिए इजरायल ईरान जंग समाप्त होते ही तेजी का रिकॉर्ड टूट सकता है। इस बार नॉर्थ इंडिया में धान की रोपाई के समय ही बाढ़ एवं बरसात का प्रकोप जारी रहा तथा जब फसल तैयार होने को हुई, उस समय भी लगातार बरसात होने से उत्पादन का समीकरण पूरी तरह बिगड़ चुका था। यही कारण है कि उत्पादन में भारी कमी आ गई है। पंजाब हिमाचल तथा हरियाणा के लगते क्षेत्रों में बाढ़ व बरसात से पंजाब में 24-25 प्रतिशत धान की फसल को नुकसान हो गया था। अब हरियाणा में भी 13-14 प्रतिशत का नुकसान बताया जा रहा है, जिस कारण फसल से ही 1509 सहित सभी प्रजाति के धान व चावल में भारी तेजी आ गई है। तत्पश्चात जनवरी के तीसरे सप्ताह से ही राइस मिलों को धान नहीं मिलने एवं निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक खरीद से चावल 1718 सेला छलांग लगाकर पुन: 7800/7900 रुपए प्रति कुंतल के बीच हो गया है। इसी अनुपात में चावल 1509 सेला के भाव भी 7400/7500 रुपए चालू सप्ताह में ऊंचाई पर पहुंच गया है तथा इन भावों में भी माल नहीं मिल रहा है। पिछले डेढ़ माह में 1401 चावल स्टीम के भाव भी 8600 से गिरकर 7800/8000 रुपए प्रति क्विंटल नीचे में बनने के बाद अब 8200/8300 रुपए बिक गया है। राइस मिलों में धान एवं चावल दोनों की कमी बनी हुई है तथा दूसरे देशों के लिए निर्यातकों के पास सौदे काफी पेंडिंग में पड़े हुए हैं, जिस कारण इसके भाव 1000 रुपए और बढ़ जाने की धारणा बन गई है। इधर जंडियाला गुरु, अमृतसर, तारांतरण मंडी में 1718 धान के भाव 4550/4600 रुपए हो गए हैं। तरावड़ी कैथल टोहाना सफीदों चीका मंडी में धान के भाव 4500/4525 रुपए प्रति कुंतल के बीच नमी व लेंथ के हिसाब से बोल रहे हैं। यूपी के दादरी उझानी बहजोई जहांगीराबाद बरेली लाइन में क्वालिटी अनुसार धान के भाव 4400/4450 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं।  इस बार निर्यात सौदे एवं राइस मिलों में मिलिंग पड़ता को देखते हुए हर धान एवं चावल में भरपूर लाभ मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। पिछले कई वर्षों वाली सीजन की तेजी की तरह इस बार रिस्क नहीं है। अत: रुक रुक कर भारी तेजी की उम्मीद बनी हुई है।

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उत्पादन में भारी कमी से बासमती चावल रूक रूक कर तेज रहेगा

 बासमती चावल की सभी प्रजातियों में तीन-चार दिनों में नीचे के भाव से इसमें 400/500 रुपए प्रति कुंतल की तेजी आ गई है। वर्तमान में निर्यातकों की फिर खरीद चलने तथा धान महंगा होने से राइस मिलें चावल के बिकवाल नहीं हैं। इस समय में निर्यात सौदे लगातार हो रहे हैं। उत्पादक मंडियों में धान मिलना मुश्किल हो गया है, इसलिए इजरायल ईरान जंग समाप्त होते ही तेजी का रिकॉर्ड टूट सकता है। इस बार नॉर्थ इंडिया में धान की रोपाई के समय ही बाढ़ एवं बरसात का प्रकोप जारी रहा तथा जब फसल तैयार होने को हुई, उस समय भी लगातार बरसात होने से उत्पादन का समीकरण पूरी तरह बिगड़ चुका था। यही कारण है कि उत्पादन में भारी कमी आ गई है। पंजाब हिमाचल तथा हरियाणा के लगते क्षेत्रों में बाढ़ व बरसात से पंजाब में 24-25 प्रतिशत धान की फसल को नुकसान हो गया था। अब हरियाणा में भी 13-14 प्रतिशत का नुकसान बताया जा रहा है, जिस कारण फसल से ही 1509 सहित सभी प्रजाति के धान व चावल में भारी तेजी आ गई है। तत्पश्चात जनवरी के तीसरे सप्ताह से ही राइस मिलों को धान नहीं मिलने एवं निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक खरीद से चावल 1718 सेला छलांग लगाकर पुन: 7800/7900 रुपए प्रति कुंतल के बीच हो गया है। इसी अनुपात में चावल 1509 सेला के भाव भी 7400/7500 रुपए चालू सप्ताह में ऊंचाई पर पहुंच गया है तथा इन भावों में भी माल नहीं मिल रहा है। पिछले डेढ़ माह में 1401 चावल स्टीम के भाव भी 8600 से गिरकर 7800/8000 रुपए प्रति क्विंटल नीचे में बनने के बाद अब 8200/8300 रुपए बिक गया है। राइस मिलों में धान एवं चावल दोनों की कमी बनी हुई है तथा दूसरे देशों के लिए निर्यातकों के पास सौदे काफी पेंडिंग में पड़े हुए हैं, जिस कारण इसके भाव 1000 रुपए और बढ़ जाने की धारणा बन गई है। इधर जंडियाला गुरु, अमृतसर, तारांतरण मंडी में 1718 धान के भाव 4550/4600 रुपए हो गए हैं। तरावड़ी कैथल टोहाना सफीदों चीका मंडी में धान के भाव 4500/4525 रुपए प्रति कुंतल के बीच नमी व लेंथ के हिसाब से बोल रहे हैं। यूपी के दादरी उझानी बहजोई जहांगीराबाद बरेली लाइन में क्वालिटी अनुसार धान के भाव 4400/4450 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं।  इस बार निर्यात सौदे एवं राइस मिलों में मिलिंग पड़ता को देखते हुए हर धान एवं चावल में भरपूर लाभ मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। पिछले कई वर्षों वाली सीजन की तेजी की तरह इस बार रिस्क नहीं है। अत: रुक रुक कर भारी तेजी की उम्मीद बनी हुई है।


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