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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

25-05-2026

बड़ी छोटी इलायची, लालमिर्च, हल्दी, जीरा, अंजीर में मंदा

  •  गत सप्ताह ग्राहकी निकलने से कालीमिर्च, दालचीनी, केसर, राई, इमली, मगज तरबूज, सिंघाड़ा, बादामगिरी, पिस्ता, छुहारा, आबजोश, अखरोट में तेजी दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर आपूर्ति बढऩे से बड़ी छोटी इलायची, जायफल, लालमिर्च, हल्दी, जीरा, अंजीर के भाव मंदे बोले गए। आलोच्य सप्ताह ग्राहकी का समर्थन मिलने से मरकरा के भाव 5 रुपए बढक़र 770/780 रुपए प्रति किलो हो गए। दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों जैसे केरल और तमिलनाडु में भी बेमौसम बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर उपलब्धता कम हुई है, जिससे दालचीनी के भाव 5 रुपए तेज होकर 270/272 रुपए बोले गए। अमेरिका-ईरान में तनाव बने रहने के कारण आयात प्रभावित होने की आशंका के चलते बिकवाली कमजोर होने से केसर के भाव 5 रुपये बढक़र 235/250 रुपए तथा कश्मीरी 260/270 रुपए हो गए। ईरान में चल रहे संघर्ष और तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर अवरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे बाहर से आने वाली केसर की आवक कम हो रही है। राई के भाव गत सप्ताह 400 रुपए बढऩे के बाद 200 रुपए घटकर 12800/13000 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। मांग निकलने से इमली भी 100 रुपए बढक़र 5600/5700 रुपए हो गई। मगर तरबूज के भाव भी पूरे सप्ताह ऊपर नीचे घूमते रहे, जिससे सप्ताह मध्य में इसके भाव 5 रुपए बढक़र 520/525 रुपए प्रति किलो बोले गए। सिंघाड़ा का उत्पादन कम होने से इसके भाव 10 रुपए तेज होकर 160/170 रुपए हो गए। उधर मेवों में डॉलर की मजबूती के चलते आयातकों की बिकवाली कमजोर होने से बादामगिरी कैलीफोनिया 20/40 रुपये बढक़र 880/910 रुपए प्रति किलो हो गई। पिस्ता भी बिकवाली कमजोर होने ईरानी माल 50 रुपए बढक़र 2300/2400 रुपए प्रति किलो हो गया। स्टाकिस्टों की बिकवाली कमजोर होने से छुहारा रंगकाट क्वालिटी 500 रुपए तेज होकर 15000/27000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। शक्करपारा भी बिकवाली कमजोर होने से 500 रुपए बढक़र 11000/16000 रुपए तथा आबजोश 27000/34500 रुपए प्रति 40 किलो हो गया। उधर चीन का माल कम आने तथा ग्राहकी निकलने से अखरोट के भाव 20/30 रुपए बढक़र 360/570 रुपए तथा इसकी गिरी 50 रुपए तेज होकर 800/1350 रुपए प्रति किलो हो गई। वहीं दूसरी ओर बड़ी इलायची की कीमतों में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है। खरीदार केवल जरूरत के अनुसार ही माल खरीद कर रहे हैं। इसके अलावा, ऊंचे भावों पर व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस दबाव के चलते बड़ी इलायची कैचीकट के भाव 10 रुपए गिरकर 1540/1550 रुपए प्रति किलो के निम्न स्तर पर आ गए। छोटी इलायची के उत्पादक क्षेत्रों से आवक बढऩे तथा पुराने मालों के प्रेशर से बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। जिससे मुंहखुला के 50 रुपए गिरकर 2300/2400 रुपए रह गए। जायफल नया माल आने से 20 रुपए मंदा होकर सप्ताह अंत में 750/755 रुपए बोला गया। इस सीज़न में लालमिर्च का उत्पादन उम्मीद से अधिक हुआ है। गुंटूर और वारंगल जैसी प्रमुख मंडियों में मिर्च की आवक ज्यादा हो गई है, जिससे तेजा के भाव 500 रुपए गिरकर 19500/23000 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। ग्राहकी का समर्थन न मिलने से हल्दी इरोड गट्टा के भाव पूरे सप्ताह नरम रहे, लेकिन सप्ताह अंत में 200 रुपए सुधरकर 14500/14600 रुपए प्रति क्विंटल बोली गई।चालू सीजन के दौरान जीरे की बंपर पैदावार और कमज़ोर निर्यात मांग से भावो में लगातार गिरावट आ रही है। ऊंझा मंडी में जीरे की आवक बढऩे की जानकारी मिल रही है, जिससे एवरेज क्वालिटी के भाव 200 रुपए घटकर 22000/22500 रुपए रह गए। उधर मांग कमजोर होने से अंजीर बढिय़ा क्वालिटी के भाव 1000 रुपए टूटकर 57000/78000 रुपये प्रति 40 किलो रह गए।

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बड़ी छोटी इलायची, लालमिर्च, हल्दी, जीरा, अंजीर में मंदा

 गत सप्ताह ग्राहकी निकलने से कालीमिर्च, दालचीनी, केसर, राई, इमली, मगज तरबूज, सिंघाड़ा, बादामगिरी, पिस्ता, छुहारा, आबजोश, अखरोट में तेजी दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर आपूर्ति बढऩे से बड़ी छोटी इलायची, जायफल, लालमिर्च, हल्दी, जीरा, अंजीर के भाव मंदे बोले गए। आलोच्य सप्ताह ग्राहकी का समर्थन मिलने से मरकरा के भाव 5 रुपए बढक़र 770/780 रुपए प्रति किलो हो गए। दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों जैसे केरल और तमिलनाडु में भी बेमौसम बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर उपलब्धता कम हुई है, जिससे दालचीनी के भाव 5 रुपए तेज होकर 270/272 रुपए बोले गए। अमेरिका-ईरान में तनाव बने रहने के कारण आयात प्रभावित होने की आशंका के चलते बिकवाली कमजोर होने से केसर के भाव 5 रुपये बढक़र 235/250 रुपए तथा कश्मीरी 260/270 रुपए हो गए। ईरान में चल रहे संघर्ष और तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर अवरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे बाहर से आने वाली केसर की आवक कम हो रही है। राई के भाव गत सप्ताह 400 रुपए बढऩे के बाद 200 रुपए घटकर 12800/13000 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। मांग निकलने से इमली भी 100 रुपए बढक़र 5600/5700 रुपए हो गई। मगर तरबूज के भाव भी पूरे सप्ताह ऊपर नीचे घूमते रहे, जिससे सप्ताह मध्य में इसके भाव 5 रुपए बढक़र 520/525 रुपए प्रति किलो बोले गए। सिंघाड़ा का उत्पादन कम होने से इसके भाव 10 रुपए तेज होकर 160/170 रुपए हो गए। उधर मेवों में डॉलर की मजबूती के चलते आयातकों की बिकवाली कमजोर होने से बादामगिरी कैलीफोनिया 20/40 रुपये बढक़र 880/910 रुपए प्रति किलो हो गई। पिस्ता भी बिकवाली कमजोर होने ईरानी माल 50 रुपए बढक़र 2300/2400 रुपए प्रति किलो हो गया। स्टाकिस्टों की बिकवाली कमजोर होने से छुहारा रंगकाट क्वालिटी 500 रुपए तेज होकर 15000/27000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। शक्करपारा भी बिकवाली कमजोर होने से 500 रुपए बढक़र 11000/16000 रुपए तथा आबजोश 27000/34500 रुपए प्रति 40 किलो हो गया। उधर चीन का माल कम आने तथा ग्राहकी निकलने से अखरोट के भाव 20/30 रुपए बढक़र 360/570 रुपए तथा इसकी गिरी 50 रुपए तेज होकर 800/1350 रुपए प्रति किलो हो गई। वहीं दूसरी ओर बड़ी इलायची की कीमतों में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है। खरीदार केवल जरूरत के अनुसार ही माल खरीद कर रहे हैं। इसके अलावा, ऊंचे भावों पर व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस दबाव के चलते बड़ी इलायची कैचीकट के भाव 10 रुपए गिरकर 1540/1550 रुपए प्रति किलो के निम्न स्तर पर आ गए। छोटी इलायची के उत्पादक क्षेत्रों से आवक बढऩे तथा पुराने मालों के प्रेशर से बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। जिससे मुंहखुला के 50 रुपए गिरकर 2300/2400 रुपए रह गए। जायफल नया माल आने से 20 रुपए मंदा होकर सप्ताह अंत में 750/755 रुपए बोला गया। इस सीज़न में लालमिर्च का उत्पादन उम्मीद से अधिक हुआ है। गुंटूर और वारंगल जैसी प्रमुख मंडियों में मिर्च की आवक ज्यादा हो गई है, जिससे तेजा के भाव 500 रुपए गिरकर 19500/23000 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। ग्राहकी का समर्थन न मिलने से हल्दी इरोड गट्टा के भाव पूरे सप्ताह नरम रहे, लेकिन सप्ताह अंत में 200 रुपए सुधरकर 14500/14600 रुपए प्रति क्विंटल बोली गई।चालू सीजन के दौरान जीरे की बंपर पैदावार और कमज़ोर निर्यात मांग से भावो में लगातार गिरावट आ रही है। ऊंझा मंडी में जीरे की आवक बढऩे की जानकारी मिल रही है, जिससे एवरेज क्वालिटी के भाव 200 रुपए घटकर 22000/22500 रुपए रह गए। उधर मांग कमजोर होने से अंजीर बढिय़ा क्वालिटी के भाव 1000 रुपए टूटकर 57000/78000 रुपये प्रति 40 किलो रह गए।


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